यूपी में सरकारी अफसरों के लिए शासनादेश जारी, सांसद-विधायकों के सामने जोड़ना होगा हाथ, नहीं तो…
UP Govt Rules: उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने गुरुवार को एक शासनादेश जारी किया है। इसमें अधिकारियों की ओर से सांसदों-विधायकों को मिलने वाले वाले प्रोटोकॉल के बारे में बताया गया है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
चीफ सेक्रेटरी एसपी गोयल (फाइल फोटो), सोर्स- सोशल मीडिया
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश सरकार में कार्यरत प्रशासनिक अफसरों को अब सांसदों और विधायकों को और ज्यादा प्रोटोकॉल देना पड़ेगा। हाल ही में पिछली सभी नियमावलियों का हवाला देते हुए एक शासनादेश जारी किया गया है। इसमें अफसरों को कई हिदायतें दी गई हैं।
उत्तर प्रदेश करकार के किसी दफ्तर में अगर कोई सांसद या विधायक आता है तो अब उसे और अधिक प्रोटोकॉल मिल सकेगा। अधिकारियों को अब और सहज तरीके से पेश आने की हिदायत दी गई है। ऐसा न करने पर कार्रवाई किए जाने का भी प्रावधान बताया गया है।
सांसदों-विधायकों के सामने जोड़ने होंगे हाथ
हाल ही में जारी किए शासनादेश की मानें तो यूपी सरकार के किसी दफ्तर में आए किसी सांसद या विधायक को हाथ जोड़कर स्वागत करना पड़ेगा। उनके लिए पानी का प्रबंध करना पड़ेगा। इसके साथ ही अपनी सीट से उठकर सम्मान भी देना पड़ेगा। इसके साथ ही अधिकारी के पास अगर सांसद या विधायक का फोन आता है तो उसका तुरंत जवाब देना होगा और फोन ना उठा पाने की दशा में पलटकर फोन करना होगा और जवाब देना होगा।
सम्बंधित ख़बरें
आग, धुआं और चीखें! कैसे मौत के जाल में बदल गई लखनऊ की बिल्डिंग? 10 प्वाइंट्स में समझें पूरी त्रासदी
Ayodhya Ram Mandir: दान राशि की पारदर्शिता के लिए बदली गई पूरी व्यवस्था, SIT जांच के बीच नई गाइडलाइंस जारी
21 साल पुराने सपा पार्टी के दफ्तर पर गरजा बुलडोजर, सीतापुर प्रशासन ने सुबह ही कार्रवाई को दिया अंजाम- VIDEO
लखनऊ में एक बहुमंजिला इमारत में भीषण आग से 15 बच्चों की मौत, रो पड़े डिप्टी CM बृजेश पाठक; देखें- VIDEO
लगातार शिकायतों के बाद जारी हुआ शासनादेश
बताया जा रहा है कि सांसदों और विधायकों के साथ प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन नहीं किया जा रहा था। बताया गया कि अधिकारियों की ओर से नियमावली का पालन नहीं किया जा रहा है। इस कारण गुरुवार को मुख्य सचिव एसपी गोयल ने इस संबंध में एक शासनादेश जारी किया। इस शासनादेश में कहा गया कि किसी भी जनप्रतिनिधि का फोन आने पर तुरंत फोन उठाया जाएगा और जवाब दिया जाएगा। मीटिंग में होने पर तत्काल रूप से कॉल का जवाब दिया जाएगा।
यह भी पढ़ें: TVK के 108 विधायक इस्तीफा दे दें तो क्या होगा? आसान भाषा में समझिए तमिलनाडु के सियासी घमासान का गुणा-गणित
इसके बार उनके मिली जानकारी या समस्या का यथासंभव निस्तारण किया जाएगा और इसकी जानकारी भी दी जाए। इसमें कहा गया है कि जनप्रतिनिधियों से बात करते समय उनको ध्यान से सुना जाय और उसका समाधान भी किया जाए। बताया जा रहा है कि ऐसा न करने वाले अधिकारियों के ऊपर आचरण नियमावली के तहत कार्रवाई भी की जाएगी। उम्मीद है कि इससे जनता की समस्या जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अधिकारियों तक जल्द पहुंच जाएगी और इसका निस्तारण भी जल्द से जल्द हो सकेगा।
