31 मई को नई दिल्ली में चौथे भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन का आयोजन, मजबूत होंगे अफ्रीका के 54 देशों के साथ संबंध
India Africa Summit 2026: भारत में दस साल के बाद भारत अफ्रीका समिट-4 का आयोजन किया जा रहा है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब ग्लोबल स्तर पर राजनीतिक, उर्जा और रणनीतिक स्थितियां असहज बनी हैं।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
नई दिल्ली में होगा चौथे भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन का आयोजन, फोटो- नवभारत ब्यूरो, दिल्ली
IA SPIRIT Strategic Partnership: दुनिया की नजरें एक बार फिर भारत पर टिकी हैं क्योंकि एक लंबे अंतराल के बाद दिल्ली में भारत-अफ्रीका समिट-4 का मंच सजने जा रहा है। पिछले दस सालों में दुनिया की राजनीतिक, ऊर्जा और रणनीतिक स्थितियां काफी असहज हो चुकी हैं और ऐसे में यह वैश्विक सम्मेलन बहुत मायने रखता है।
अफ्रीकी संघ के सहयोग से यह सुनिश्चित किया गया है कि अफ्रीका के सभी 54 देश इस बैठक का हिस्सा बनें ताकि कोई भी पीछे न छूटे। भारत इस सम्मेलन के माध्यम से अपने संबंधों को रणनीतिक और आर्थिक स्तर पर एक नई ऊंचाई देना चाहता है। इस बैठक के माध्यम से भारत खुद को एक भरोसेमंद विकास भागीदार के रूप में दुनिया के सामने मजबूती से पेश करने की तैयारी में है।
दस साल के लंबे इंतजार के बाद होने वाला महामिलन
इस सम्मेलन की थीम ‘इंडिया अफ्रीका स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फॉर इनोवेशन, रेजिलिएंस, एंड इनक्लूसिव ट्रांसफॉर्मेशन’ (आईए स्प्रिट) है। विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि इसका मुख्य लक्ष्य साझा इतिहास और सम्मान पर आधारित एक दीर्घकालिक, गैर-शोषणकारी साझेदारी को मजबूत करना है।
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अफ्रीकी देशों को भारत कितनी अहमियत देता है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत ने अगले 5 वर्षों के लिए 25 बिलियन डॉलर का क्रेडिट लाइन पैकेज पेश किया है। जो बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि परियोजनाओं पर केंद्रित होगा. भारत, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों और वीटो के लिए अफ्रीकी देशों का समर्थन चाहता है। साथ ही ग्लोबल साउथ (तीसरी दुनिया के देशों या विकासशील देशों) की आवाज को मजबूत करना चाहता है।
दो सौ अरब डॉलर के व्यापार का बड़ा लक्ष्य
भारत का लक्ष्य 2030 तक अफ्रीका के साथ व्यापार को $200 बिलियन से अधिक तक ले जाना है। इसके लिए अफ्रीका ग्रोथ फंड और छोटे मंझोले मध्यम उदयोग के बीच सहयोग पर जोर दिया जा रहा है। भारत अपने यूपीआई (UPI), आधार और डिजिटल स्टैक मॉडल के माध्यम से अफ्रीका में डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देना चाहता है। यह बड़ी राशि स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और सड़कों जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर खर्च की जाएगी जिससे वहां के लोगों का जीवन बेहतर हो सके।
भविष्य का डिजिटल अफ्रीका
रणनीतिक तौर पर भी यह समिट भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों और वीटो के लिए अफ्रीकी देशों का समर्थन चाहता है। भारत ग्लोबल साउथ की आवाज को दुनिया के हर बड़े मंच पर मजबूती से उठाना चाहता है।
हाल के समय में पश्चिम एशिया युद्ध की वजह से जिस तरह से दुनिया भर में ऊर्जा संकट उत्पन्न हुआ है। उसे देखते हुए भारत चाहता है कि तेल, गैस, और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए अफ्रीका के साथ दीर्घकालिक ऊर्जा समझौते किया जाए। इसके अलावा, भारत आतंकवाद विरोधी, साइबर सुरक्षा और समुद्री सहयोग के क्षेत्र में भी अफ्रीकी देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। यह बैठक चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने और भारत को एक भरोसेमंद विकास भागीदार के रूप में स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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साथ ही इस बैठक को क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के एक बड़े कदम के रूप में देख रहे हैं। भारत खुद को एक ऐसे भरोसेमंद विकास भागीदार के रूप में स्थापित करना चाहता है जो सिर्फ अपना फायदा नहीं बल्कि सबका साथ और समावेशी बदलाव चाहता है।
