-सीमा कुमारी
हर साल 22 अगस्त को ‘मद्रास’ (Madras) दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष यानी आज ‘मद्रास’ (Madras) पूरे 380 साल का हो गया है। आज की ही तारीख, यानी 22 अगस्त साल 1639 को तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई (मद्रास) की आधारशिला ब्रिटिश ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ (East India Company) द्वारा रखी गई थी। उस वक्त इसे ‘मद्रास’ के नाम से जाना जाता था।
करीब 70 लाख की आबादी वाला यह शहर दुनिया का 31वां सबसे बड़ा शहर माना जाता है। लेकिन इतिहास की नजर में ये शहर 379 नहीं बल्कि 2 हजार साल पुराना है।
इतिहास के मुताबिक, दूसरी शताब्दी में यह चोल साम्राज्य का हिस्सा था। वहीं तोडई मंडलम प्रांत में मद्रास पट्टनम नाम का छोटा सा गांव हुआ करता था।
आधुनिक मद्रास सेंट फोर्ट जार्ज के निर्माण के साथ ही 22 अगस्त 1639 को अस्तित्व में आया था। इसके बाद ईस्ट इंडिया कंपनी ने आसपास के छोटे-छोटे गांवों को भी मद्रास में ही मिला लिया था।
1639 को ईस्ट इंडिया कंपनी ने विजयनगर के राजा पेडा वेंकट राय से कोरोमंडल तट चंद्रगिरी में कुछ जमीन खरीदी थी। इसी जमीन पर आधुनिक मद्रास ने जन्म लिया। यहीं पर सेंट फोर्ट जॉर्ज का निर्माण किया गया था। जोे कि औपनिवेशिक गतिविधियों का केंद्र बिंदु था।
हर साल 22 अगस्त को तमिलनाडु राज्य की राजधानी चेन्नई में ‘मद्रास दिवस’ (Madras Day) समारोह मनाया जाता है। इस दिवस को ये नाम शहर के पुराने नाम मद्रास पर दिया गया है। इस दिन पूरे शहर में जगह-जगह आयोजन किए जाते हैं। इनमें शहर के सभी नागरिक हिस्सा लेते हैं। बता दें साल 1939 में मद्रास के इतिहास के बारे में पता लगाने के लिए एक कमिटी भी बनाई गई थी। जिसमें इतिहासकार और प्रोफेसर शामिल थे। इस दिवस को मनाने का विचार साल 2004 में चेन्नई हेरिटेज फाउंडेशन (Chennai Heritage Foundation) द्वारा रखा गया था। ताकि ऐतिहासिक धरोहरों का रखरखाव किया जा सके और नागरिक भी इनकी मरम्मत करने जैसी गतिविधियों में हिस्सा ले सकें।