क्या है नारी शक्ति वंदन अधिनियम? क्या संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को मिल पाएगा 33% आरक्षण? जानें सब

Nari Shakti Vandan Act: नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारत का एक ऐतिहासिक कानून है जो लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देकर उन्हें नीति निर्माण में समान भागीदार बनाता है। जानिए सबकुछ।
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Women Reservation Bill 2023: भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को एक मील के पत्थर के रूप में देखा जा रहा है। यह कानून केवल चुनावी राजनीति का हिस्सा नहीं है, बल्कि देश की आधी आबादी को शासन और नीति निर्माण की मुख्यधारा में लाने का एक सशक्त प्रयास है। लंबे समय से लंबित इस विधेयक को 2023 में संसद की मंजूरी मिली थी और अब इसे जमीन पर उतारने की प्रक्रिया तेज हो गई है।

इस कानून का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को केवल एक मतदाता के रूप में नहीं, बल्कि एक निर्णायक नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करना है। वर्तमान में लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी केवल 14 प्रतिशत के करीब है, जिसे सुधारने के लिए यह कानून बेहद जरूरी माना जा रहा है।

क्या है नारी शक्ति वंदन अधिनियम और इसके प्रावधान

नारी शक्ति वंदन अधिनियम (Nari Shakti Vandan Act) को तकनीकी रूप से 106वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2023 के नाम से जाना जाता है। इस कानून के तहत लोकसभा, राज्यों की विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए कुल सीटों में से 33 प्रतिशत या एक-तिहाई सीटें आरक्षित की जाएंगी। यह आरक्षण केवल सामान्य सीटों पर ही नहीं, बल्कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटों पर भी समान रूप से लागू होगा। इस कानून का सीधा मतलब यह है कि आने वाले समय में देश की संसद और विधानसभाओं में हर तीसरी सदस्य एक महिला होगी।

महिला आरक्षण और सीटों के रोटेशन की व्यवस्था

इस अधिनियम की एक और बड़ी विशेषता आरक्षित सीटों के रोटेशन की व्यवस्था है। इसके अनुसार महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों को हर परिसीमन अभ्यास के बाद अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में रोटेट किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि राज्य के सभी क्षेत्रों को समान प्रतिनिधित्व मिले और महिलाओं का नेतृत्व हर हिस्से तक पहुंचे। आरक्षण की यह पूरी व्यवस्था शुरुआत में 15 सालों के लिए लागू की जा रही है। हालांकि, समय की आवश्यकता और देश की परिस्थितियों को देखते हुए संसद के पास यह अधिकार होगा कि वह इस अवधि को आगे बढ़ा सके। यह रोटेशन प्रणाली चुनावी राजनीति में नए नेतृत्व को उभरने का मौका प्रदान करेगी।

परिसीमन और जनगणना के बाद लागू होने की प्रक्रिया

भले ही यह कानून संसद से पारित हो चुका है और राष्ट्रपति मुर्मू के हस्ताक्षर भी हो चुके हैं, लेकिन इसे लागू करने की एक निश्चित प्रक्रिया तय की गई है। अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, महिला आरक्षण तभी प्रभावी होगा जब नई जनगणना के आंकड़े प्रकाशित हो जाएंगे और उसके आधार पर सीटों का नया परिसीमन पूरा हो जाएगा।

हालिया घटनाक्रमों के अनुसार, केंद्र सरकार ने 2026 में परिसीमन से संबंधित विधेयकों पर चर्चा की तैयारी की है। सरकार का एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव यह भी है कि लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 कर दी जाए ताकि पुरुषों की मौजूदा सीटों को कम किए बिना महिलाओं को उनका हक दिया जा सके।

इस अधिनियम का दूरगामी लक्ष्य विकसित भारत के सपने को साकार करना है, जिसका मुख्य आधार नारी शक्ति को माना गया है। सरकार का मानना है कि जब महिलाएं नीति निर्धारण और नेतृत्व की भूमिका में आएंगी, तभी समाज का वास्तविक उत्थान संभव होगा। हालांकि विपक्ष द्वारा ओबीसी कोटे की मांग और जनगणना की टाइमिंग को लेकर कुछ सवाल भी उठाए जा रहे हैं।

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