

Mantralaya Canteen Food Quality: महाराष्ट्र सरकार ने अपने प्रशासकीय मुख्यालय मंत्रालय में उपहारगृहों की लगातार गिरती गुणवत्ता और भोजन को लेकर बढ़ती शिकायतों को गंभीरता से लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने मंत्रालय के उपाहारगृहों की निगरानी के लिए अवर सचिव स्तर के अधिकारी को प्रतिनियुक्ति पर महाप्रबंधक (ग्रुप-ए) नियुक्त करने का निर्णय लिया है। इसके लिए इच्छुक अवर सचिव स्तर के अधिकारियों से आवेदन भी मांगे गए हैं।
सामान्य प्रशासन विभाग ने उपाहारगृहों की व्यवस्था सुधारने के लिए प्रतिनियुक्ति के आधार पर महाप्रबंधक नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शासन के 17 जुलाई 2026 के आदेश के अनुसार आवेदन संबंधित विभागों के माध्यम से 7 अगस्त 2026 तक भेजे जाएंगे।
चयनित अधिकारी उपाहारगृहों की गुणवत्ता, प्रशासन और संचालन की निगरानी करेंगे। शिकायतों के बाद विभाग ने लिया संज्ञान मंत्रालय परिसर स्थित मुख्य भवनों, एनेक्स और विधान भवन की कैंटीनों में रोजाना लगभग दो से ढाई हजार अधिकारी, कर्मचारी और आगंतुक भोजन व नाश्ते का लाभ लेते हैं।
मंत्रालय के मुख्य भवन, एनेक्स भवन और विधान भवन स्थित कैंटीनों में प्रतिदिन करीब दो से ढाई हजार अधिकारी, कर्मचारी और आगंतुक भोजन एवं नाश्ता करते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से भोजन की गुणवत्ता में गिरावट और साफ-सफाई की कमी को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं।
पिछले कुछ समय से यहां मिलने वाले भोजन का स्तर लगातार गिर रहा है। खाने की खराब गुणवत्ता और अस्वच्छता के कारण स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि मंत्रिमंडल की बैठकों में परोसा जाने वाला समोसा, वड़ा और बिस्कुट जैसे अल्पोपहार को खुद मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी हाथ तक नहीं लगाते हैं।
इस खराब व्यवस्था के कारण अब लगभग 80 प्रतिशत कर्मचारियों ने कैंटीन से दूरी बना ली है और वे घर से टिफिन लाना या बाहर खाना पसंद कर रहे है। मंत्रालय कैंटीन में स्वच्छता के बुनियादी नियमों जैसे ग्लव्स पहनना, साफ वर्दी और स्वच्छ कपों का इस्तेमाल करने की पूरी तरह अनदेखी की जाती है।
शिकायतों में यह भी सामने आया है कि कैंटीनों में ग्लव्स पहनने, साफ वर्दी का उपयोग, स्वच्छ बर्तनों और कपों का इस्तेमाल जैसे बुनियादी स्वच्छता मानकों का कई बार पालन नहीं किया जाता। महाराष्ट्र सरकार का मानना है कि महाप्रबंधक की नियुक्ति के बाद इन सभी व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी होगी और भोजन की गुणवत्ता में सुधार लाने के साथ-साथ कर्मचारियों का भरोसा भी दोबारा कायम किया जा सकेगा।