IMF ने डोनाल्ड ट्रंप को दिखाया आईना, रिसर्च में अमेरिकी टैरिफ नीति की खोल दी पोल

IMF report 2025: आईएमएफ के रिसर्च पेपर के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ से अमेरिका को लाभ नहीं हुआ। विदेशी निर्यातकों ने कीमतें नहीं घटाईं और आयात की गुणवत्ता गिर गई।
Trump Tariff: IMF Report Shows US Tariffs Shifted Imports To Lower Quality Goods And Raised Prices 
आईएमएफ रिपोर्ट ट्रंप टैरिफ इम्पैक्ट (सोर्स-सोशल मीडिया)
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IMF Report Trump Tariff Impact: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों पर विस्तृत रिसर्च पेपर जारी किया है। इस रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष ट्रंप की आर्थिक चिंताओं को काफी ज्यादा बढ़ाने वाले हैं। अर्थशास्त्रियों के अनुसार अप्रैल 2025 में ट्रंप द्वारा दुनिया के कई देशों पर लगाए गए भारी टैरिफ बम का कोई सकारात्मक असर अमेरिका पर नहीं हुआ है। इस नीति से अमेरिका को विदेशी निर्यात की कीमतों में कमी लाने में कोई सफलता नहीं मिली है।

इस अहम रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि ट्रंप की नीतियों से अमेरिकी आयात काफी हद तक नकारात्मक रूप से प्रभावित हुआ है। विदेशी निर्यातकों ने अमेरिका को भेजे जाने वाले अपने सामान की कीमतों में कोई भी कटौती बिल्कुल नहीं की है। इसके उलट अमेरिका में अब उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की जगह सस्ते और निम्न गुणवत्ता वाले सामानों का आयात बहुत ज्यादा बढ़ गया है। यह पूरा घटनाक्रम ट्रंप प्रशासन के दावों के बिल्कुल विपरीत और हैरान करने वाला एक बड़ा आर्थिक बदलाव है।

विदेशी निर्यातकों ने नहीं घटाई कीमतें

आईएमएफ के इस वर्किंग पेपर के अनुसार, ट्रंप के भारी टैरिफ के बावजूद विदेशी निर्यातक अपनी कीमतें कम करने के लिए मजबूर नहीं हुए। अध्ययन में पाया गया है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्क का एक बहुत बड़ा हिस्सा सीधा आयात कीमतों में जुड़ गया। इससे विदेशी निर्यातकों को इस अतिरिक्त लागत का सिर्फ एक बहुत ही छोटा सा हिस्सा वहन करना पड़ा। यह बात स्पष्ट करती है कि टैरिफ का सारा आर्थिक बोझ अंततः अमेरिकी बाजार और वहां के उपभोक्ताओं पर ही पूरी तरह से आ गिरा है।

विदेशी आपूर्तिकर्ताओं ने बाजार की प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए अपनी पुरानी कीमतों को लगभग स्थिर बनाए रखा। उन्होंने टैरिफ लागू होने से पहले की अपनी कीमतों में कोई खास कटौती करने का विकल्प बिल्कुल नहीं चुना। इसके कारण मजबूरी में अमेरिकी आयातकों को महंगे सामानों के बजाय कम लागत वाले सस्ते विदेशी विकल्पों की तलाश करनी पड़ी। इसी बड़ी वजह से अमेरिकी बाजार में अच्छे सामानों की जगह सस्ते और खराब गुणवत्ता वाले सामानों ने तेजी से ले ली है।

आयात की गुणवत्ता में आई भारी गिरावट

रिसर्च पेपर में यह अहम बात सामने आई है कि अमेरिका के कुल आयात मूल्य में बहुत ही भारी गिरावट देखने को मिली है। यह बड़ी गिरावट विदेशी निर्यातकों द्वारा दी गई किसी भारी छूट के कारण बिल्कुल भी नहीं हुई है। बल्कि अमेरिकी आयातकों द्वारा सस्ते और कम कीमत वाले आपूर्तिकर्ताओं और उत्पादों की ओर ट्रांसफर होने के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है। यह बदलाव सीधे तौर पर अमेरिकी व्यापार और बाजार के लिए एक बहुत ही बड़ा और नकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

आईएमएफ के अर्थशास्त्रियों ने बताया कि यह पैटर्न 2018-19 के अमेरिका-चीन टैरिफ विवाद के दौरान भी बिल्कुल ऐसा ही देखा गया था। अर्थशास्त्रियों ने अमेरिकी सीमा शुल्क डेटा का सही उपयोग करते हुए 2025 में लागू इन नए टैरिफ के असर का विस्तृत अध्ययन किया है। भारी टैरिफ के चलते अमेरिका में आयातकों को कम गुणवत्ता वाले आयात की ओर अपना रुख पूरी तरह से करना पड़ा है। इस नई व्यवस्था ने अमेरिकी व्यापारिक ढांचे को काफी हद तक नुकसान पहुंचाने का काम तेजी से किया है।

कंपनियों की उत्पादकता पर नकारात्मक असर

आयात की गुणवत्ता में आई इस भारी गिरावट से अमेरिकी कंपनियों की कुल उत्पादकता पर बहुत ही नकारात्मक प्रभाव पड़ने की पूरी आशंका है। इसके साथ ही अमेरिकी उपभोक्ताओं को भी अब उत्पादों की घटिया गुणवत्ता का लगातार सामना करना पड़ रहा है। भले ही देश का औसत आयात मूल्य देखने में कम नजर आ रहा हो, लेकिन बाजार में अच्छे उत्पादों की भारी कमी हो गई है। यह स्थिति लंबी अवधि में अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकती है।

जेबीन आन, लोरेंजो रोटुनो और मिशेल रूटा द्वारा तैयार की गई यह रिपोर्ट स्पष्ट रूप से बताती है कि टैरिफ से कोई भी फायदा नहीं हुआ। आयातकों ने महंगे आपूर्तिकर्ताओं से हटकर अन्य सस्ते स्रोतों से अपना आयात करना अब बड़े पैमाने पर शुरू कर दिया है। इससे यह साबित होता है कि औसत आयात कीमतों में आई यह कमी प्रोडक्ट प्राइस के बजाय आयात बास्केट में बड़े बदलाव का ही नतीजा है। ट्रंप की नीतियां अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की बजाय कमजोर कर रही हैं।

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