

Vice President Election Cross Voting Truth: उपराष्ट्रपति चुनाव के परिणाम ने देश की राजनीति में एक नई बहस पैदा कर दी है। एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने बड़ी बढ़त के साथ जीत दर्ज की, लेकिन उनकी जीत में सबसे बड़ी चर्चा क्रॉस वोटिंग की बन गई है। इसके लिए भाजपा की तरफ से कुछ विपक्षी सांसदों को विशेष धन्यवाद कहा गया है, जबकि विपक्ष में इस क्रॉस वोटिंग को लेकर असमंजस और नामों के कयासों पर अटकले लगाई जा रही है। वाइस प्रेसिडेंट के इलेक्शन में आये इन चुनावी आंकड़ों और नेताओं के बयानों ने एक नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया है। लोगों में इसको लेकर लगातार बहस हो रही है कि किसने ये क्रॉस वोटिंग की है।
नतीजों में एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को 452 वोट मिले। भाजपा के मुख्य सचेतक संजय जायसवाल ने उन सांसदों का आभार जताया जिन्होंने समर्थन दिया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि एनडीए को 25 ज्यादा वोट मिले। किरेन रिजिजू ने भी कुछ INDIA अलायंस के सांसदों को धन्यवाद कहा। एनडीए की शक्ति 427 थी, वाईएसआर के 11 जुड़ने से 438 हुए, इसलिए राधाकृष्णन को अतिरिक्त 14 वोट मिले। विपक्षी उम्मीद थी 324, उन्हें 300 और 15 वोट अवैध रहे।
लोकसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक संजय जायसवाल ने कहा कि NDA उम्मीदवार ने 452 वोट हासिल किए और कुछ विपक्षी सांसदों ने समर्थन दिया। उन्होंने कहा करीब 40 विपक्षी सांसदों ने 'अपनी अंतरात्मा की आवाज' सुनकर मतदान किया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी ट्वीट में INDIA गठबंधन के कुछ सांसदों का विशेष धन्यवाद दिया और कहा कि एनडीए व उसके मित्र सांसद एकजुट हैं। साथ ही पीयूष गोयल ने बताया कि एनडीए को 25 अतिरिक्त वोट मिले, जो नेतृत्व की लोकप्रियता दर्शाते हैं।
अब तक किसी नेता या पार्टी का नाम आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है, फिर भी नतीजों ने विपक्ष की एकता पर सवाल उठा दिए हैं। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ नेता आम आदमी पार्टी और 'महाराष्ट्र फ्रंट' के सदस्यों पर संदेह जता रहे हैं, जबकि अन्य नेता शिवसेना (यूबीटी) और राजस्थान के एक सांसद की ओर इशारा कर रहे हैं। इन दावों पर आप और शिवसेना (यूबीटी) ने स्पष्ट रूप से इनकार किया है।
परिणामों में यह भी आया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के प्रतिद्वंद्वी सुदर्शन रेड्डी को अपेक्षित 324 वोटों के बजाय 300 वोट मिले और 15 वोट अवैध थे। कुल मिलाकर राधाकृष्णन ने 150 से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की। इस घटना ने राजनीतिक नजरिए से कई सवाल खड़े कर दिए हैं और आगे की राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है। कुल मिलाकर चुनाव परिणाम और क्रॉस वोटिंग के आरोप संसद में नई राजनीतिक बहस को जन्म तो दे दिया है।