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देश के 18 राज्यों के भूजल में यूरेनियम का खतरा: स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए नई चेतावनी, देखें पूरी रिपोर्ट
- Written By: अक्षय साहू
Groundwater Quality Report India: देश के 18 राज्यों के 151 जिलों में भूजल में यूरेनियम की खतरनाक मात्रा पाई गई है। WHO की सीमा से 96 गुना अधिक यूरेनियम का स्तर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।

भारत में पीने के पानी में यूरेनियम की मिलावट बढ़ रही है (सोर्स- सोशल मीडिया)
High Uranium Levels in India: भारत के स्वास्थ्य और पर्यावरण क्षेत्र से जुड़ी एक अत्यंत चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। देश के विभिन्न हिस्सों में भूजल (Groundwater) के नमूनों में यूरेनियम की भारी मात्रा पाई गई है, जो न केवल सरकारी दावों पर सवाल खड़े करती है, बल्कि करोड़ों लोगों की सेहत के लिए एक बड़ा खतरा भी बन गई है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड द्वारा पहली बार की गई राष्ट्रीय स्तर की निगरानी में यह खुलासा हुआ है कि देश के 18 राज्यों के 151 जिलों में यूरेनियम की सांद्रता सुरक्षित मानकों से कहीं अधिक है।
क्या कहती है सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की रिपोर्ट?
यह रिपोर्ट वर्ष 2019-20 के दौरान किए गए व्यापक सर्वेक्षण पर आधारित है। बोर्ड ने देश भर से कुल 14,377 भूजल नमूनों का परीक्षण किया। इन नमूनों के परिणाम बेहद चौंकाने वाले रहे। भूजल में यूरेनियम की सांद्रता 0 से 2,876 माइक्रोग्राम प्रति लीटर तक दर्ज की गई।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पीने के पानी में यूरेनियम की अधिकतम स्वीकार्य सीमा 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर निर्धारित की है। भारत में मिले कुछ नमूनों में यूरेनियम की मात्रा इस सीमा से 96 गुना अधिक पाई गई, जो यह स्पष्ट करता है कि भारत के एक बड़े हिस्से में लोग धीमा जहर पीने को मजबूर हैं।
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पंजाब सबसे अधिक प्रभावित
इस रिपोर्ट में पंजाब को सबसे अधिक प्रभावित राज्य के रूप में चिह्नित किया गया है। परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) ने यूरेनियम के लिए 60 माइक्रोग्राम प्रति लीटर की सीमा तय की है। रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के 6 प्रतिशत कुओं में यूरेनियम की मात्रा इस सीमा से भी अधिक पाई गई है। राज्य में भूजल की गुणवत्ता में गिरावट का यह स्तर न केवल स्थानीय निवासियों के लिए, बल्कि कृषि क्षेत्र के लिए भी चिंता का विषय है।
अन्य राज्यों की स्थिति
यूरेनियम का खतरा केवल पंजाब तक सीमित नहीं है। AERB के 60 पीपीबी (ppb) मानकों के आधार पर अन्य राज्यों की स्थिति इस प्रकार है:
दिल्ली: 5% नमूने मानकों से अधिक खराब
हरियाणा: 4.4% नमूने प्रभावित
तेलंगाना: 2.6% नमूने
आंध्र प्रदेश: 2% नमूने
राजस्थान: 1.2% नमूने
छत्तीसगढ़: 1.1% नमूने
तमिलनाडु: 0.9% नमूने
मध्य प्रदेश: 0.6% नमूने
उत्तर प्रदेश: 0.4% नमूने
झारखंड: 0.25% नमूने
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि देश के लगभग हर कोने में भूजल धीरे-धीरे जहरीला होता जा रहा है।
स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव
यूरेनियम युक्त पानी का लंबे समय तक सेवन करना मानव शरीर के लिए अत्यंत घातक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यूरेनियम एक रासायनिक रूप से विषैला तत्व है। इसके सेवन से कई बीमारियां हो सकती हैं और हमारे शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं…
- किडनी फेल हो सकती है: यूरेनियम का सबसे अधिक प्रभाव गुर्दे (किडनी) पर पड़ता है। यह किडनी की कार्यक्षमता को धीरे-धीरे नष्ट कर देता है, जिससे क्रोनिक किडनी रोग की संभावना बढ़ जाती है।
- हड्डियां कमजोर हो सकती हैं: यह हड्डियों के स्वास्थ्य को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है, जिससे फ्रैक्चर और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- कैंसर का खतरा बढ़ेगा: लंबे समय तक यूरेनियम युक्त जल का उपयोग करने से कैंसर होने की आशंका भी जताई गई है।
इन लोगों के लिए अधिक खतरा
ऐसा कहा जाता है कि गांवों व आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों, गर्भवती महिलाओं पर भी अधिक खतरा है, क्योंकि ग्रामीण आबादी या वन क्षेत्रों के लोग तो पूरी तरह से भूजल पर निर्भर रहते हैं। यह खतरा कम करने के लिए सरकार व स्थानीय लोगों को मिलकर काम करना होगा।
भारत में पीने के पानी में यूरेनियम की भारी मात्रा मिली (AI डिजाइन फोटो)
नियामक मानकों का अभाव
यह रिपोर्ट एक महत्वपूर्ण नीतिगत कमी की ओर भी इशारा करती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर की मानक सीमा निर्धारित की है, लेकिन भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने अभी तक यूरेनियम के लिए कोई विशिष्ट मानक तय नहीं किया है।
यह नियामक शून्यता देश में सुरक्षित पेयजल आपूर्ति को और अधिक कठिन बना देती है। हालांकि AERB ने 60 माइक्रोग्राम प्रति लीटर का एक मानक दिया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसे WHO के मानकों के अनुरूप सख्त किए जाने की आवश्यकता है।
भूजल सुरक्षा की आवश्यकता
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि देश में पेयजल सुरक्षा को लेकर एक गंभीर चिंता पैदा हुई है। ग्रामीण इलाकों में, जहां लोग सीधे कुओं या हैंडपंपों का पानी पीते हैं, वहां स्थिति अधिक नाजुक है। सरकार को न केवल इस स्थिति की निगरानी बढ़ानी चाहिए, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में जल शुद्धिकरण के प्लांट लगाने और सुरक्षित पेयजल के विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में तत्काल कदम उठाने चाहिए।
यह भी पढ़ें- इंडिया-न्यूजीलैंड FTA: रोजगार के अवसरों और निवेश का नया अध्याय, जानें समझौते की 5 बड़ी बातें
यूरेनियम का बढ़ता स्तर भारत के लिए एक गंभीर ‘साइलेंट क्राइसिस’ है। यदि समय रहते इसे नियंत्रित नहीं किया गया और जल स्रोतों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ कई गुना बढ़ सकता है। यह रिपोर्ट सरकार, नीति निर्माताओं और आम जनता के लिए एक चेतावनी है कि हमें अपने जल स्रोतों की गुणवत्ता को लेकर अब और अधिक सतर्क रहना होगा। जल ही जीवन है, लेकिन अगर वही जल विषैला हो, तो वह जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा बन जाता है।
Uranium contamination in groundwater india 18 states report
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