‘सनातन का समूल नाश होना चाहिए’, उदयनिधि स्टालिन के बिगड़े बोल, विधानसभा में सीएम विजय के सामने दिया बयान
Udhayanidhi Stalin Sanatan Controversy: तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री थलपति विजय की मौजूदगी में सनातन धर्म को खत्म करने का अपना विवादित बयान फिर दोहराया है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
उदयनिधि स्टालिन, फोटो- सोशल मीडिया
Udhayanidhi Stalin Sanatan Dharm Statement: तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर ‘सनातन’ धर्म को लेकर वैचारिक युद्ध छिड़ गया है। राज्य के नए मुख्यमंत्री थलपति विजय की मौजूदगी में विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्ष के नेता और डीएमके विधायक उदयनिधि स्टालिन ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव को तेज कर दिया है।
भाषा की मर्यादा पार करने की घटना उस समय हुई जब मुख्यमंत्री विजय सदन में उनके ठीक सामने बैठे थे। उदयनिधि के इस कदम ने न केवल सदन के भीतर बल्कि पूरे देश में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
उदयनिधि का विवादित बयान: ‘सनातन का समूल नाश होना चाहिए’
विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने एक बार फिर अपने पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि ‘सनातनम, जो लोगों को बांटता है, उसे खत्म होना चाहिए’। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय के खिलाफ बताते हुए इसके समूल नाश की बात कही।
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CM VIJAY LOOKS ON AS UDAYANIDHI STALIN SAYS:
“SANATANA MUST BE ERADICATED.” Interesting to see whether TN CM responds at any point criticizing the LoP for hurting Sanatani sentiments. pic.twitter.com/XL3PjfZ57I — Rahul Shivshankar (@RShivshankar) May 12, 2026
गौर करने वाली बात यह है कि उदयनिधि ने यह बयान उस समय दिया जब वे सदन में मुख्यमंत्री विजय के सामने बोल रहे थे। सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद लोग यह देखने को उत्सुक हैं कि मुख्यमंत्री विजय विपक्ष की इस ‘सनातनी भावनाओं’ को ठेस पहुँचाने वाली टिप्पणी पर क्या रुख अपनाते हैं।
पहले भी मच्छर, डेंगू और कोरोना से की थी तुलना
यह पहली बार नहीं है जब उदयनिधि ने ऐसी टिप्पणी की है। इससे पहले सितंबर 2023 में एक सम्मेलन के दौरान उन्होंने सनातन धर्म की तुलना मच्छर, डेंगू, मलेरिया और कोरोना जैसी बीमारियों से की थी और कहा था कि इसे केवल विरोध नहीं बल्कि पूरी तरह खत्म करना होगा।
उस समय भी उनके इस बयान पर देशभर में भारी बवाल हुआ था और मामला अदालत तक पहुंच गया था। हाल ही में मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने भी उनके पिछले बयानों को ‘हेट स्पीच’ की श्रेणी में रखे जाने की बात कही थी। बावजूद इसके, उदयनिधि ने अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगने से इनकार करते हुए इसे दोहराने की बात कही है।
बीजेपी ने क्या कहा?
उदयनिधि के इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी प्रवक्ता सीआर केसवन ने इसे ‘विभाजनकारी राजनीति’ और ‘जहरीला बयान’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणियां करोड़ों लोगों की आस्था और भावनाओं का अपमान हैं और जनता इसे कभी स्वीकार नहीं करेगी। बीजेपी ने उदयनिधि पर हमला बोलते हुए कहा कि हार के बाद भी डीएमके अपनी नफरत भरी राजनीति को छोड़ नहीं पा रही है। बता दें कि हालिया विधानसभा चुनाव में डीएमके को करारी हार का सामना करना पड़ा है और थलपति विजय की पार्टी टीवीके ने सरकार बनाई है।
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‘वंदे मातरम्’ पर आपत्ति और राज्य गीत का मुद्दा
सनातन के अलावा उदयनिधि स्टालिन ने शपथ ग्रहण समारोह में ‘वंदे मातरम्‘ बजाए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के राज्य गीत को कभी पीछे नहीं रखा जाना चाहिए। हालांकि, अपने भाषण के दौरान उन्होंने राजनीतिक शालीनता की बात करते हुए मुख्यमंत्री विजय के साथ राज्य के विकास के लिए सहयोग की इच्छा भी जताई। लेकिन उनके विवादित बयानों ने सहयोग की इस संभावना पर विवादों का साया डाल दिया है।
