Navabharat Nishanebaaz: तमिलनाडु CM का नया ड्रामा, विजय क्यों बन रहे हैं मामा !
Vijay Thalapathy Youth Leader: तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री थलापति विजय के ‘युवाओं का मामा’ वाले बयान पर रिश्तों, संस्कृति और राजनीति को जोड़ते हुए दिलचस्प टिप्पणी सामने आई।
- Written By: अंकिता पटेल
थलापति विजय, नवभारत डिजाइन फोटो
Vijay Thalapathy Calls Himself Uncle: पडोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री थलापति विजय ने अपने पहले संबोधन में खुद को राज्य के युवाओं का मामा बताया। इस पर आपकी क्या राय है?’
हमने कहा, ‘संस्कृत में मामा को ‘मातुल’ कहते हैं। यह बड़ा प्रेमपूर्ण या वात्सल्य भरा रिश्ता है। बच्चे गर्मी की छुट्टियों में मामा के घर जाते हैं। मां में एक बार ‘म’ अक्षर आता है तो मामा में 2 बार। महाराष्ट्र में आपको ‘मामासाहेब’ कहलाने वाले कितने ही लोग मिल जाएंगे। मामा वरेरकर नामक मराठी साहित्यकार का नाम आपने सुना होगा। राजकपूर और महमूद की पुरानी फिल्म परवरिश का गाना था मामा ओ मामा, घरवाले खाएं चक्कर, ऐसा है अपना चक्कर, चक्कर में तुम नहीं आना प्यारे मामा! बचपन में आपने चंदामामा मैगजीन पढ़ी होगी जो मराठी में ‘चांदोबा’ नाम से निकलती थी। आपने वह बालगीत भी सुना होगा-चंदा मामा दूर के, पुए पकाएं बूर के, आप खाएं थाली में, सरकार मुन्ने को दें प्याली में!’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, मामा का रिश्ता कभी-कभी खतरनाक भी होता है। कंस मामा ने अपने भांजे कृष्ण को मारने के कितने उपाय किए थे लेकिन अंत में 10,000 हाथियों के बल वाला कंस खुद ही मारा गया। महाभारत में कौरवों के मामा शकुनि का छल-कपट कौन नहीं जानता। नकुल-सहदेव के मामा मद्र नरेश शल्य कौरवों को ओर से युद्ध में उतरे थे। वह कर्ण के सारथी बने थे और उसे यह कहकर हतोत्साहित करते रहते थे कि अर्जुन के मुकाबले तुम कुछ भी नहीं हो।’
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हमने कहा, ‘आपको मालूम ही होगा कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ‘मामा’ कहलाते थे जिन्होंने लाड़ली बहन योजना शुरू की थी और प्रदेश की सभी 29 सीटों पर बीजेपी को निर्वाचित कराने में सफल हुए थे। ऐसे लोकप्रिय मामा को प्रधानमंत्री मोदी ने तुरंत दिल्ली बुलवाकर केंद्रीय कृषि मंत्री बना दिया। उनकी जगह मध्य प्रदेश में मोहन यादव की मुरलिया बजने लगी। मध्य प्रदेश के भेड़ाघाट में यदि नर्मदा नदी में नाव डगमगाने लगी तो मांझी पूछता है कि नाव में एक साथ मामा-भांजे तो सवार नहीं हैं? एक अंधविश्वास के तहत मामा-भांजे का एक साथ नाव में बैठना या सफर करना उचित नहीं माना जाता।”
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
