'पंख तुम्हारे हैं, मगर बाज भी उड़ते हैं', थरूर के बयान पर कांग्रेस MP का हमला

शशि थरूर की 'फ्री बर्ड' पोस्ट पर कांग्रेस में लगातार मतभेद निकलकर सामने आ रहे है, अब इस पर मणिकम टैगोर ने तंज कसते हुए कहा- आजाद पक्षी भी शिकारी से सतर्क रहे, पोस्ट से बढ़ी अंदरूनी खींचतान जारी है।
'पंख तुम्हारे हैं, मगर बाज़ भी उड़ते हैं': शशि थरूर के बयान पर कांग्रेस सांसद का तीखा पलटवार
शशि थरूर के बयान पर मणिकम टैगोर का पलटवार (फोटो- सोशल मीडिया)
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नई दिल्ली: कांग्रेस नेता शशि थरूर के "फ्री बर्ड" यानी 'आजाद चिड़िया' वाले सोशल मीडिया पोस्ट ने एक बार फिर पार्टी में मतभेद की अटकलों को हवा दे दी है। इस पर कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि आजाद पक्षी को भी आसमान में नजरें गड़ाए शिकारी से बचकर रहना चाहिए। दोनों नेताओं के बयानों से एक बार फिर पार्टी के भीतर अनुशासन और वैचारिक भिन्नता को लेकर बहस छिड़ गई है।

शशि थरूर ने हाल ही में एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक उड़ती हुई चिड़िया की तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, उड़ने की इजाजत मत मांगो, पंख तुम्हारे हैं और आसमान किसी का नहीं। इस पोस्ट को कुछ ने स्वतंत्र सोच की अभिव्यक्ति माना, तो कुछ ने इसे पार्टी नेतृत्व को संदेश देने वाला कदम बताया। इसके जवाब में मणिकम टैगोर ने लिखा, आज के दौर में आजाद पक्षी को भी आसमान पर नजर रखनी चाहिए। शिकारी बाज, गिद्ध और गरुड़ हर वक्त शिकार की तलाश में रहते हैं। आजादी मुफ्त नहीं मिलती, खासकर जब शिकारी देशभक्ति के पंख लगाकर उड़ते हों।

मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा- पार्टी इन बातों में नहीं उलझती

जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से इस बयानबाजी पर सवाल किया गया, तो उन्होंने साफ कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने में समय नहीं बर्बाद करेगी। उन्होंने कहा, हर कोई कुछ भी लिख सकता है, लेकिन हमारा ध्यान राष्ट्र की एकता और संविधान की रक्षा पर है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी डरने या घबराने वाली नहीं है, बल्कि सार्थक मकसद के लिए काम कर रही है।

पीएम मोदी की तारीफ पर भी मचा था विवाद

थरूर पहले भी पार्टी के भीतर चर्चा में रह चुके हैं, जब उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और 'ऑपरेशन सिंदूर' के लिए सार्वजनिक तौर पर सराहना की थी। इस पर कई कांग्रेस नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उदित राज ने उन्हें बीजेपी का सुपर प्रवक्ता कहा, जबकि रणदीप सुरजेवाला ने उनकी बातों को तथ्यों के खिलाफ बताया।

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इन घटनाओं के बाद शशि थरूर की पार्टी के भीतर स्थिति को लेकर अटकलें फिर तेज हो गई हैं। कुछ जानकार इसे एक बड़े वैचारिक टकराव की शुरुआत मानते हैं, तो कुछ का मानना है कि यह सिर्फ व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का मामला है।

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