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नए सियासी ‘चक्रव्यूह’ में फंसे मोदी-शाह, सुप्रीम कोर्ट के सवाल ने उड़ाई BJP की नींद! दलित सियासत का क्या होगा?
- Written By: अभिषेक सिंह
Supreme Court Question to Modi Government: यूजीसी के नए नियमों पर शुरू हुए विवाद के 'चक्रव्यूह' से मोदी सरकार को मुक्ति मिली भी नहीं थी कि सर्वोच्च अदालत ने उसे एक और झटका दे दिया है।

कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)
Reservation Politics: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों पर शुरू हुए विवाद के फांस से मोदी सरकार को मुक्ति मिलने से पहले सर्वोच्च अदालत ने उसे एक और झटका दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार से रिपोर्ट मांगी है। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा सवाल पूछा है जिससे बीजेपी नए ‘सियासी चक्रव्यूह’ में फंसने वाली है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से सीधा सवाल पूछा है कि संवैधानिक पीठ के 2024 में दिए गए फैसले के बाद क्या कार्रवाई की गई है? गौरतलब है कि 2024 को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले में एससी और एसटी के आरक्षण का वर्गीकरण और क्रीमी लेयर को लागू करने की बात कही गई थी।
अगस्त 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सर्वोच्च अदालत ने पहली अगस्त 2024 को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के बीच समान प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों को एससी-एसटी के आरक्षण को कोटे के भीतर कोटा बनाने को स्वीकृति दी थी। कोर्ट ने कहा था ओबीसी की तरह एससी-एसटी आरक्षण में भी क्रीमी लेयर व्यवस्था लागू की जाए।
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सरकार से पूछ लिया सबसे बड़ा सवाल
सर्वोच्च अदालत के इसी फैसले को लागू करने की मांग को लेकर समता आंदोलन समिति और ओपी शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की। मामले की सुनवाई करते हुए देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने बीते कल यानी मंगलवार 10 फरवरी को केंद्र सरकार से पूछ है कि संवैधानिक पीठ के फैसले पर क्या कार्रवाई की गई है?
साल 2024 में आया था सियासी भूचाल
राज्यों को अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए रिजर्वेशन को सब-कैटेगराइज करने और क्रीमी लेयर सिस्टम लागू करने का अधिकार देने के फैसले ने 2024 में राजनीति गरमा दी। कांग्रेस से लेकर भाजपा के कई सहयोगी विपक्षी दल इस फैसले का विरोध करते दिखे। बसपा प्रमुख मायावती ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का खुलकर विरोध किया। दलित भी विरोध करने के लिए सड़कों पर उतर आए।
2024 में मोदी सरकार ने क्या किया था?
एससी और एसटी समुदायों के लगभग 100 NDA सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला किसी भी हालत में लागू नहीं होना चाहिए। इसके बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि NDA सरकार बीआर अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान से बंधी हुई है, जिसमें एससी और एसटी रिजर्वेशन में क्रीमी लेयर का प्रावधान नहीं है।
एससी एसटी आरक्षण और राजनीति (इन्फोग्राफिक- AI)
सरकार के इस भरोसे के बाद एससी और एससी समुदायों ने अपना विरोध खत्म कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अब केंद्र सरकार से 2024 के कॉन्स्टिट्यूशनल बेंच के फैसले पर जवाब देने को कहा है। डेढ़ साल पहले एससी/एसटी समुदाय के विरोध के कारण मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था, लेकिन अब उसे संवैधानिक पीठ के फैसले पर उठाए गए कदमों के बारे में कोर्ट को बताना होगा। ऐसी स्थिति में एससी और एसटी आरक्षण शुरू करना सरकार के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है।
फिर सड़कों पर उतरेगा दलित समुदाय?
एससी-एसटी आरक्षण के भीतर कोटा बनाने का भले ही कोई विरोध न हुआ हो, लेकिन अगर क्रीमी लेयर का प्रावधान लाया जाता है तो दलित समुदाय फिर से सड़कों पर उतर सकता है। दलितों का राजनीतिक आधार रखने वाली बीएसपी, आजाद समाज पार्टी और चिराग पासवान की एलजेपी भी विरोध कर सकती है। इसके अलावा बदले हुए राजनीतिक माहौल में कांग्रेस भी इसका विरोध कर सकती है।
क्या बोले अंबेडकर महासभा के चेयरमैन?
ऑल इंडिया अंबेडकर महासभा के चेयरमैन अशोक भारती ने कहा है कि भारतीय संविधान के तहत अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए आरक्षण की गारंटी है। अनुसूचित जातियों और जनजातियों के जो कुछ चेहरे और आवाजें आप सुन रहे हैं, वे आरक्षण की वजह से हैं। एससी-एसटी समुदायों को 22.5 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा है। आरक्षण गरीबी हटाने का प्रोग्राम नहीं है, बल्कि रिप्रेजेंटेशन का सिस्टम है।
क्रीमीलेयर पर क्या बोले अशोक भारती?
अशोक भारती का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट दलित और आदिवासी आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की जमीन तैयार कर रहा है। सरकार ने अभी तक अनुसूचित जातियों और जनजातियों को पूरा दूध नहीं दिया है और मलाई निकालने की बात शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट का इरादा एसस-एसी कैटेगरी को क्रीमी लेयर के तहत लागू करना है और यह आरक्षण खत्म करने की साजिश का हिस्सा है।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मोदी सरकार को एससी-एसटी आरक्षण के क्लासिफिकेशन और क्रीमी लेयर सिस्टम पर अपनी रिपोर्ट देनी होगी। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि केंद्र सरकार क्या फैसला करती है। क्या वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक अपना स्टैंड बनाए रखेगी या क्रीमी लेयर सिस्टम लागू करने से पीछे हटेगी।
‘दलित पॉलिटिक्स’ का अब क्या होगा?
अनुसूचित जातियों और जनजातियों की राजनीतिक ताकत को देखते हुए सिर्फ भाजपा ही नहीं, बल्कि दूसरी राजनीतिक पार्टियां भी इसमें शामिल होने से बचती रही हैं। जब 2024 में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया तो दलित-आधारित पॉलिटिकल पार्टियों का ध्यान रिजर्वेशन खत्म करने को साजिश बताने पर ज्यादा था, बजाय इसके कि इससे दलित कम्युनिटी को होने वाले पॉलिटिकल नुकसान को हाईलाइट किया जाए।
राज्य दर राज्य दलित सियासत की बात
बीएसपी का कोर वोट बैंक जाटव कम्युनिटी है, जिससे मायावती खुद आती हैं। उत्तर प्रदेश में जाटव सबसे बड़ी दलित आबादी हैं जो क्रीमी लेयर पर समझौता करने को तैयार नहीं हैं। इसी तरह, बिहार में दुसाध कम्युनिटी सबसे बड़ी दलित कम्युनिटी है, जिसे चिराग पासवान की पार्टी का कोर वोट बैंक माना जाता है। चिराग पासवान खुद दुसाध जाति से हैं। बिहार में एससी रिजर्वेशन का ज्यादातर फायदा दुसाधों को ही मिला है।
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महाराष्ट्र में महार जाति एससी रिजर्वेशन को क्रीमी लेयर में कैटेगरी में डालने का विरोध कर रही है। मोदी सरकार में मंत्री रामदास अठावले महार जाति से हैं और उनका पॉलिटिकल बेस भी इसी जाति में है। इसीलिए अठावले भी इसका विरोध करते रहे हैं। राजस्थान में आदिवासी समुदाय मीणा एक बड़ी पॉलिटिकल ताकत है और उन्हें एसटी रिजर्वेशन सिस्टम से काफी फायदा हुआ है। वे न तो एससी रिजर्वेशन की कैटेगरी बनाने का सपोर्ट करते हैं और न ही क्रीमी लेयर सिस्टम लागू करने का।
साल 2024 में क्यों पीछे हटी सरकार?
एससी और एसटी में रिजर्वेशन का फायदा उठाने वाली जातियों की आबादी दूसरी जातियों से कहीं ज्यादा है। इसलिए पॉलिटिकल पार्टियां अपने फायदे और नुकसान के कारण न तो रिजर्वेशन को कैटेगरी बनाने के लिए कदम उठाती हैं और न ही एससी और एसटी रिजर्वेशन में क्रीमी लेयर लागू करने का सपोर्ट करती हैं। यही वजह है कि मोदी सरकार 2024 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी एससी और एसटी रिजर्वेशन में क्रीमी लेयर लागू करने से पीछे हट गई।
Frequently Asked Questions
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Que: सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार से क्या सवाल पूछा है?
Ans: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि 2024 में संवैधानिक पीठ द्वारा दिए गए जिस फैसले में एससी-एसटी आरक्षण में वर्गीकरण (कोटे के भीतर कोटा) और क्रीमी लेयर लागू करने की बात कही गई थी, उस पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है और सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
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Que: एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने पर इतना विरोध क्यों हो रहा है?
Ans: एससी-एसटी समुदायों और दलित-आधारित राजनीतिक दलों का मानना है कि आरक्षण गरीबी हटाने का नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का माध्यम है। क्रीमी लेयर लागू होने से उन्हें डर है कि आरक्षण धीरे-धीरे कमजोर या खत्म किया जा सकता है, इसलिए बसपा, आजाद समाज पार्टी, एलजेपी और अन्य दल इसका विरोध कर रहे हैं।
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Que: सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मोदी सरकार के सामने राजनीतिक चुनौती क्यों बढ़ गई है?
Ans: एससी-एसटी समुदायों की बड़ी राजनीतिक ताकत और उनके कोर वोट बैंक के कारण क्रीमी लेयर लागू करना सरकार के लिए जोखिम भरा है। फैसले को लागू करने पर दलित विरोध भड़क सकता है, जबकि लागू न करने पर सुप्रीम कोर्ट के सवालों का जवाब देना मुश्किल होगा। इसी वजह से मोदी सरकार एक नए ‘सियासी चक्रव्यूह’ में फंसी नजर आ रही है।
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