‘हम ऐसे सूत्रों को मूत्र समझते है…’, ECI मतदाता सूची के दावों पर तेजस्वी यादव
Tejashwi Yadav ने कहा कि EC स्वयं सामने आने की बजाय सूत्रों के हवाले से खबर प्लांट करवा रहा है ताकि इसकी आड़ में असली खेला कर सके। ये वही सूत्र है जो ऑपरेशन सिंदूर पर फेक न्यूज की दुकान बन गए थे।
- Written By: सौरभ शर्मा
राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव (फोटो- सोशल मीडिया)
RJD Leader Tejashwi Yadav ने रविवार को उन दावों को खारिज किया जिसमें बिहार चुनाव के लिए मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार के लोगों के नाम सामने आए हैं। उन्होंने ऐसे दावों वाले सूत्रों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया और इनकी तुलना इस्लामाबाद, कराची और लाहौर पर कब्जा होने की अफवाहों से करते हुए सिरे से नकार किया। उन्होंने आगे कहा कि ये सूत्र कौन हैं? ये वही सूत्र हैं जिन्होंने कहा था कि इस्लामाबाद, कराची और लाहौर पर कब्ज़ा कर लिया गया है।” यादव ने कहा, “ये सूत्र हमें बकवास लगते हैं।”
तेजस्वी ने जोर देकर कहा कि SIR आखिरी बार 2003 में UPA सरकार के तहत आयोजित किया गया था और तब से 2014, 2019 और 2024 सहित कई चुनाव हुए हैं, जहाँ विपक्ष तीन से चार लाख के अंतर से हारा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या इसका मतलब यह है कि विदेशियों ने PM मोदी को वोट दिया। SIR आखिरी बार 2003 में UPI सरकार के तहत आयोजित किया गया था। तब से हमने कई चुनाव देखे हैं, जिनमें 2014, 2019 और 2024 के चुनाव शामिल हैं। उन चुनावों में हम तीन से चार लाख के अंतर से हारे थे। क्या इसका मतलब है कि विदेशियों ने पीएम मोदी को वोट दिया।
चुनाव आयोग स्वयं सामने आने की बजाय सूत्रों के हवाले से खबर प्लांट करवा रहा है ताकि इसकी आड़ में खेला कर सके। ये वही सूत्र है जो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्लामाबाद, लाहौर और कराची पर कब्जा कर चुके थे। इसलिए हम ऐसे सूत्र को मूत्र समझते है। मूत्र यानि ऐसा अपशिष्ट पदार्थ जो दुर्गंध… pic.twitter.com/ACwApxQwVr — Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) July 13, 2025
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विदेशियों ने PM मोदी को वोट किया
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में किसी भी संदिग्ध तत्व के नाम जुड़ने के लिए एनडीए ज़िम्मेदार है, जिसका अर्थ है कि उनकी चुनावी जीत धोखाधड़ी से प्रभावित हो सकती है। उन्होंने चुनाव आयोग पर एक राजनीतिक दल के एक सेल के रूप में काम करने का आरोप लगाया और SIR प्रक्रिया को “पूरी तरह से दिखावा” बताया। इसका मतलब है कि मतदाता सूची में किसी भी संदिग्ध तत्व के नाम जुड़ने के लिए NDA जिम्मेदार है।
पूरी गड़बड़ी के लिए NDA को जिम्मेदार ठहराया
केंद्र और नीतीश कुमार दोनों पर निशाना साधते हुए, कहा कि अगर मतदाता सूची में कोई भी ‘संदिग्ध नाम’ जोड़ा गया है, तो इसकी ज़िम्मेदारी उस सरकार की है जो 2005 से सत्ता में है। 2005 से बिहार में किसकी सरकार रही है? एनडीए की सरकार, भाजपा की, नीतीश कुमार की सरकार है। 11 साल तक केंद्रीय गृह मंत्री कौन रहा, पिछले 11 सालों से प्रधानमंत्री कौन है? मोदी और अमित शाह। इसका मतलब है कि मतदाता सूची में किसी भी संदिग्ध व्यक्ति का नाम जुड़ने के लिए एनडीए ज़िम्मेदार है।
यह भी पढ़ें: बिहार SIR में बहुत बड़ा खुलासा, नेपाल-बांग्लादेश के लोगों के पास मिले आधार कार्ड
इससे पहले, चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया था कि SIR के तहत घर-घर जाकर बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) को नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार के बड़ी संख्या में लोग आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र और राशन कार्ड के साथ मिले हैं।
