रतन टाटा के सपनों का जब रोड़ा बनीं थीं ममता बनर्जी, बंगाल से समेटना पड़ा था महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट
दिग्गज उद्योगपति रतन नवल टाटा को एक कसक ताउम्र रही। इसका जिक्र भी वे कई बार कर भी चुके हैं। उनके इस सपने पर पानी ममता बनर्जी ने फेर दिया था। दरअसल, रतन टाटा ने 2006 को बंगाल के हुगली जिले के सिंगुर में नैनो कार प्रोजेक्ट लगाने का एलान किया था।
- Written By: साक्षी सिंह
कोलकाता: दिग्गज उद्योगपति रतन नवल टाटा को एक कसक ताउम्र रही। इसका जिक्र भी वे कई बार कर भी चुके हैं। उनके इस सपने पर पानी ममता बनर्जी ने फेर दिया था। दरअसल, रतन टाटा ने 2006 को बंगाल के हुगली जिले के सिंगुर में नैनो कार प्रोजेक्ट लगाने का एलान किया था। इस पर तत्कालीन विपक्ष की नेता ममता बनर्जी के कड़ा विरोध किया था। जिसके कारण उन्हें वहां से अपना प्रोजेक्ट समेटना पड़ा था।
रतन टाटा को ताउम्र बंगाल के सिंगुर की कसक रही। यहां से अपनी इस महत्वाकांक्षी नैनो कार प्रोजेक्ट को उन्हें समेटना पड़ा था। यही नहीं इसका दुख उन्हें इतना रहा कि कई मौकों पर उन्हें इसके बारे में चर्चा करते सुना गया है।
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18 मई 2006 को बंगाल के हुगली जिले के सिंगुर में रतन टाटा ने नैनो कार परियोजना लगाने का एलान किया था। उस समय राज्य के के मुख्यमंत्री थे बुद्धदेव भट्टाचार्य थे। उस समय तत्कालीन वाममोर्चा सरकार ने इस परियोजना से राज्य में औद्योगीकरण की तस्वीर बदलने का दावा किया था। ममता बनर्जी के नेतृत्व में इसका कड़ा विरोध किया गया था।
अमरण अनशन पर थीं ममता बनर्जी
इस परियोजना को लाने के लिए करीब एक हजार एकड़ जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई थी, उस समय विपक्ष की नेता के रूप में ममता बनर्जी ने तीन दिसंबर 2006 से कोलकाता में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आमरण अनशन शुरू कर दिया था। यही नहीं 24 अगस्त 2008 को उन्होंने अधिगृहत जमीन में से 400 एकड़ जमीन वापसी की मांग करते हुए दुर्गापुर एक्सप्रेस हाईवे पर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया था।
ममता बनर्जी को रतन टाटा ने ठहराया जिम्मेदार
अंतत: 3 अक्टूबर 2008 को दुर्गा पूजा पर्व से ठीक दो दिन पहले रतन टाटा ने कोलकाता में अपनी प्रेस कांफ्रेंस में किया। और अपनी नैनौ कार परियोजना को दुखी मन से सिंगुर से बाहर ले जाने का ऐलान किया। उन्होंने इसके लिए सीधा जिम्मेदार ममता बनर्जी के नेतृत्व में जारी आंदोलन को जिम्मेदार ठहराया था।
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लंबी चली थी अदालती कार्यवाही
ये बात यहीं तक नहीं रही। अदालत तक भी पहुंची। लंबे समय तक चली अदालती कार्यवाही के बाद 31 अगस्त, 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने जमी लौटाने का निर्देश दिया। जिसके बाद जमीन किसानों को लौटा दी गई थी। इसके बाद सिंगुर में रतन टाटा के नैनो कार परियोजना की शुरूआत करने का सपना टूट गया। परियोजना ठप होने पर नुकसान के लिए टाटा मोटर्स को मुआवजे के तौर पर करीब 766 करोड़ रुपये देने का निर्देश दिया गया।
