West Bengal Assembly: ममता गुट को बड़ा झटका, विधानसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी से बाहर, बागी गुट का दबदबा
West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल विधानसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में ममता बनर्जी गुट को जगह नहीं मिली। समिति में अब ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट का दबदबा है, जो बड़े बदलाव का संकेत है।
- Written By: करुणा नंद शाहवाल
ममता बनर्जी (सोर्स -सोशल मीडिया)
Mamata Banerjee’s Faction Out Business Advisory Committee: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी अंदरूनी खींचतान के बीच ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी समर्थक गुट को एक और बड़ा झटका लगा है। पश्चिम बंगाल विधानसभा की नवगठित बिजनेस एडवाइजरी (बीए) कमेटी में ममता गुट के किसी भी विधायक को शामिल नहीं किया गया है। विधानसभा की यह समिति सदन की कार्यवाही, विधेयकों की सूची और चर्चा के समय निर्धारण जैसे अहम फैसले लेती है।
जानकारी के अनुसार, समिति में विपक्ष के हिस्से में शामिल सभी स्थायी सदस्य ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले ‘बागी’ गुट से हैं। राजनीतिक जानकार इसे विधानसभा के भीतर बदलते राजनीतिक समीकरणों का संकेत मान रहे हैं। हाल के दिनों में टीएमसी के भीतर बढ़ी गुटबाजी और विधानसभा में बागी विधायकों की बढ़ती भूमिका ने राज्य की राजनीति को नई दिशा दे दी है।
सदन की कार्यवाही तय करती है बीए कमेटी
दरअसल बिजनेस एडवाइजरी कमेटी विधानसभा की सबसे महत्वपूर्ण वैधानिक समितियों में से एक मानी जाती है। यह समिति प्रत्येक सत्र से पहले बैठक कर सदन की कार्यवाही का खाका तय करती है। सत्र की अवधि, कार्यसूची, पेश किए जाने वाले विधेयकों और विभिन्न विषयों पर चर्चा के समय निर्धारण जैसे अहम फैसले इसी समिति में लिए जाते हैं। सरल शब्दों में कहें तो विधानसभा की पूरी कार्यवाही के संचालन में इस समिति की केंद्रीय भूमिका होती है।
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ऋतब्रत बनर्जी गुट का समिति में दबदबा
जानकारी के मुताबिक नवगठित बीए कमेटी की सूची के अनुसार, समिति में कुल 19 स्थायी सदस्य हैं। जबकी 14 सदस्य सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से और पांच सदस्य विपक्षी तृणमूल कांग्रेस से हैं। हालांकि, विपक्ष के हिस्से में आए सभी पांच स्थायी सदस्य तृणमूल कांग्रेस के उस ‘बागी लेकिन बहुमत’ वाले गुट से हैं, जिसका नेतृत्व निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। वर्तमान में वही विधानसभा में विपक्ष के नेता भी हैं। ऋतब्रत बनर्जी स्वयं भी बीए कमेटी के स्थायी सदस्य बनाए गए हैं।
10 नए सदस्यों को आमंत्रित किया गया
आपको बता दें कि स्थायी सदस्यों के अलावा समिति में 10 आमंत्रित सदस्य भी शामिल किए गए हैं। इनमें चार सदस्य भाजपा से और दो सदस्य तृणमूल कांग्रेस से हैं, जिनमें से एक ऋतब्रत बनर्जी गुट का प्रतिनिधि है। वहीं, विधानसभा में कांग्रेस के दो विधायकों में से एक मोहताब शेख को भी आमंत्रित सदस्य बनाया गया है।
इसके अलावा, माकपा के एकमात्र विधायक, नौशाद सिद्दीकी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट (एआईएसएफ) के एकमात्र प्रतिनिधि तथा आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के अकेले विधायक को भी समिति में आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
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कमेटी गठन पर उठ सकते हैं राजनीतिक सवाल
तो वहीं संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में दोनों गुटों के विधायक अब भी तृणमूल कांग्रेस के सदस्य दर्ज हैं। ऐसे में तकनीकी रूप से बीए कमेटी के गठन और सदस्यों के चयन पर सवाल उठाना आसान नहीं होगा।
