'समय तेजी से फिसल रहा, मोदी सरकार हाथ पर हाथ...' दिल्ली की मांओं का दर्द सुन भावुक हुए राहुल गांधी

नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने Delhi की महिलाओं से मुलाकात करते हुए लिखा प्रदूषण के खिलाफ लड़ रहीं ऐसी ही कुछ साहसी मांओं से मिला वे अपने ही नहीं, पूरे देश के बच्चों के भविष्य को लेकर डरी हुई हैं।
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दिल्ली की मांओं का दर्द सुन भावुक हुए राहुल गांधी (फोटो- सोशल मीडिया)
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Rahul Gandhi Metting on Delhi Air Pollution: दिल्ली की जहरीली हवा में हर सांस एक संघर्ष बन गई है। हाल ही में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली की उन साहसी मांओं से मुलाकात की जो अपने बच्चों के स्वास्थ और उनके स्वस्थ भविष्य को बचाने के लिए प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई लड़ रही हैं। यह मुलाकात केवल एक राजनीतिक चर्चा नहीं थी बल्कि एक भावनात्मक संवाद भी था जिसमें मांओं का गुस्सा और बेबसी साफ झलक रही थी। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर इस वीडियो को साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं और इसे एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल बताया है।

बातचीत के दौरान सामने आया सच बेहद डरावना है। एक मां ने बताया कि उनका 15 साल का बेटा पिछले 10 सालों से नेब्युलाइजर के सहारे है और वह बाहर खेलने से भी डरता है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चे अब स्टेरॉयड लेने को मजबूर हैं। राहुल गांधी ने इस चर्चा में स्पष्ट किया कि यह संकट अमीर और गरीब का भेद नहीं करता यह सबके लिए ही है लेकिन गरीब के पास इससे बचने का कोई रास्ता नहीं है। जहां अमीर लोग एयर प्यूरीफायर लगा सकते हैं वहीं आम जनता और घरेलू काम करने वाली महिलाएं जहरीली हवा में जीने को मजबूर हैं।

सन्नाटे में सरकार, हाथ पर हाथ धरे बैठी

मांओं ने राहुल गांधी को बताया कि भारत में हर दिन पांच साल से कम उम्र के करीब 500 बच्चे वायु प्रदूषण के कारण जान गंवा देते हैं। इसके बावजूद सरकार की तरफ से कोई स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी नहीं की गई है। चर्चा में यह बात उभरकर आई कि सरकार समस्या की जड़ पर काम करने के बजाय केवल दिखावे के लिए स्मॉग टावर जैसे कदम उठा रही है। मांओं का कहना था कि प्रदूषण फैलाने वाले लोग आम जनता से ज्यादा ताकतवर हैं इसलिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी दिखाई देती है। यह केवल फेफड़ों का ही नहीं बल्कि मानसिक बीमारियों और बुजुर्गों में डिमेंशिया का भी बड़ा कारण बन रहा है।

प्रदूषण के संकट की पहल अब संसद में गूंजेगी

इस गंभीर संकट पर राहुल गांधी ने मांओं को भरोसा दिलाया है कि वह इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे। उन्होंने स्वीकार किया कि आज तक संसद में वायु प्रदूषण पर कभी भी विशेष बहस नहीं हुई है लेकिन इस बार वह इसे प्राथमिकता देंगे। राहुल गांधी ने कहा कि अगर हमारे बच्चे ही स्वस्थ नहीं रहेंगे तो 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें बच्चों के लिए बहाने नहीं बल्कि साफ हवा और निर्णायक कार्रवाई चाहिए। यह मुलाकात एक उम्मीद के साथ खत्म हुई कि अब यह लड़ाई सड़क से संसद तक लड़ी जाएगी।

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