Explainer: 5 देश, 140 घंटे और कई ऐतिहासिक समझौते, जानिए पीएम मोदी के इस मैराथन दौरे से भारत को क्या मिला?

PM Modi Foreign Tour: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच देशों के ऐतिहासिक दौरे के बाद भारत लौट आए हैं। 140 घंटे के इस मैराथन दौरे में ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और रक्षा क्षेत्र में कई बड़े समझौते हुए।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (सोर्स- सोशल मीडिया)
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PM Modi 5 Nation Tour Significant Explainer: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में पांच देशों की छह दिवसीय यात्रा पर जाए थे। जिसके बाद आज वो सुबह वो भारत लौए। प्रधानमंत्री की यह यात्रा देश के भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी आत्मनिर्भरता और रणनीतिक संबंधों के नजरिए से काफी अहम रही है। 140 घंटे के इस मैराथन दौरे में पीएम मोदी ने यूएई (UAE), नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा की और इस दैरान कई ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। 

प्रधानमंत्री की इस यात्रा का मकसद भारत को न सिर्फ एशिया बल्कि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना और भविष्य के लिए एक प्लेटफॉर्म तैयार करना था। खासकर  तकनीक के क्षेत्र में भारत की पहचान एक ऐसे उभरते हुए देश के तौर पर बनना जिस पर भविष्य को देखते हुए दांव लगाया जा सकता है। इसके साथ ही भारत की ऊर्जा के क्षेत्र में विदेशों पर निर्भरता कम करना था। आइए आपको बताते है कि प्रधानमंत्री मोदी की इस मैराथन दौरे से भारत को क्या हासिल हुआ।

यूएई के साथ 7 महत्वपूर्ण समझौतों पर बनी बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दौरे पहले चरण में सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) गए थे। पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात की। यूएई में पीएम मोदी केवल तीन घंटे ही रुके, लेकिन इस दौरान सात अहम समझौतों पर सहमति बनी। इसमें सबसे प्रमुख 'स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिजर्व एग्रीमेंट' था।

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यूएई-भारत के बीच हुए 7 महत्वपूर्ण समझौते (AI जनरेटेड फोटो)

इस समझौते के तहत यूएई की 'अबुधाबी नेशनल ऑइल कंपनी' (ADNOC) भारत के रणनीतिक तेल भंडारों में 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल स्टोर करेगी। इस समझौते की सबसे खास बात ये है कि युद्ध या आपूर्ति बाधित होने जैसी आपातकालीन स्थितियों में इस तेल पर पहला हक भारत का होगा।

अपनी जरूरत की 90% तेल आयात करता है भारत

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में एक है, भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% तेल विदेशों से आयात करता है। भारत के पास फिलहाल केवल 9 दिनों के तेल भंडार की क्षमता है, जो चीन और अमेरिका जैसे देशों के मुताबले काफी कम है। जबकि तेल उपयोग के मामले में भारत का नाम दुनिया के टॉप पांच देशों में आता है। यूएई के साथ हुए समझौते के बाद भारत का तेल रिजर्व 14-15 दिनों तक बढ़ जाएगा। इसके अलावा, यूएई गुजरात के वडीनार में एक जहाज मरम्मत केंद्र स्थापित करेगा और भारत के बैंकिंग और वित्त क्षेत्रों में 3 बिलियन डॉलर (लगभग 48 हजार करोड़ रुपये) का निवेश करेगा।

नीदरलैंड्स के साथ बड़ा सेमीकंडक्टर समझौता

पीएम मोदी यूएई के बाद नीदरलैंड पहुंचे। जहां दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे 17 समझौतों पर मुहर लगी। इसमें चिप-मेकिंग और क्रिटिकल मिनरल्स से जुड़ी डील सबसे महत्वपूर्ण हैं। नीदरलैंड्स की दिग्गज कंपनी ASML ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ साझेदारी की है, जो गुजरात के धोलेरा में भारत का पहला सेमीकंडक्टर प्लांट बना रही है। यह साझेदारी भारत की चीन पर निर्भरता को कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

INDIA NETHERLANDS DEAL
सेमीकंडक्टर चिप बनने में भारत की मदद करेगा नीदरलैंड (AI जनरेटेड फोटो)

इसके अलावा नीदरलैंड्स के साथ भारत को क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर भी एक बड़ा समझौता हुआ। जिसमें नीदरलैंड्स भारत को 30 क्रिटिकल मिनरल्स क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट, कॉपर) की खोज और खनन के लिए आधुनिक तकनीक प्रदान करेगा। ये सभी खनिज स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन और रक्षा उपकरणों के लिए बेहद जरूरी है। भारत वर्तमान में इनके लिए 70% से 100% तक आयात पर निर्भर है।इसके साथ ही, नीदरलैंड्स गुजरात के 'कल्पसार डैम प्रोजेक्ट' में इंजीनियरिंग मदद देगा।

स्वीडन के साथ मदर ऑफ ऑल डील्स

स्वीडन में प्रधानमंत्री मोदी को वहां के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार' से सम्मानित किया गया। स्वीडन में भारत के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यूरोपीय संघ (EU) की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ हुई बातचीत रही, जिसमें साल के अंत तक भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर करने का वादा किया गया।

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स्वीडन के साथ मदर ऑफ ऑल डील्स (AI जनरेटेड फोटो)

इस समझौते को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' का नाम दिया गया है। क्योंकि इसके तहत दोनों पक्षों के बीच व्यापार होने वाली लगभग 96-99% वस्तुओं पर टैरिफ या तो खत्म हो जाएगा या बहुत कम हो जाएगा।

43 साल बाद नॉर्वे का ऐतिहासिक दौरा

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नॉर्वे के साथ ग्रीन स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप पर जोर (AI जनरेटेड फोटो)

प्रधानमंत्री इस यात्रा में नॉर्वे एक अहम पड़ाव रहा। यह दौरा कई मायनों में अहम था, क्योंकि 43 से के लंबे इंतजार के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने नॉर्वे यात्रा थी। इस दौरे की मुख्य केंद्र 'ग्रीन स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप' रहा। नॉर्वे अपनी 98% बिजली स्वच्छ ऊर्जा से बनाता है, भारत के सौर, पवन और जलविद्युत परियोजनाओं में निवेश करेगा। भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का है, जिसमें नॉर्वे का तकनीकी और वित्तीय सहयोग मील का पत्थर साबित हो सकता है।

इटली के साथ रक्षा, तकनीक और व्यापार पर बनी बात

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इटली के साथ रक्षा, तकनीक और व्यापार पर हुए समझौते (AI जनरेटेड फोटो)

अपने दौरे अंतिम चरण में पीएम मोदी इटली पहुंचे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ रक्षा, तकनीक और व्यापार पर चर्चा की। दोनों देशों ने 'इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर' (IMEC) को तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। यह कॉरिडोर भारत को मध्य पूर्व के रास्ते यूरोप से जोड़ेगा, जिससे व्यापार की लागत और समय में 30-40% की कमी आएगी। रणनीतिक रूप से यह प्रोजेक्ट चीन के 'बेल्ट एंड रोड' पहल का एक मजबूत विकल्प माना जा रहा है।

इसके अलावा भारत और इटली ने अपने संबंधों को 'स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' का दर्जा दिया है और 2029 तक आपसी व्यापार को 20 अरब यूरो तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। साथ ही, दोनों देश एआई (AI), साइबर सुरक्षा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में एक साझा इनोवेशन इकोसिस्टम बनाने पर भी सहमत हुए हैं।

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