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लीबिया-सीरिया में लड़ी जंग…अब रच रहा था भारत को दहलाने की साजिश! आखिर कौन है खूंखार अमेरिकी मैथ्यू वैन डाइक?
- Written By: अभिषेक सिंह
NIA Arrest Matthew VanDykk: राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अमेरिकी मैथ्यू वैनडाइक सहित 6 यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। वैनडाइक इससे पहले लीबिया, सीरिया ईराक और वेनेजुएला में कांड कर चुका है...

अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक (डिजाइन फोटो)
US Mercenary Matthew VanDyke: भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने एक बेहद गुप्त और बड़े खुफिया ऑपरेशन को अंजाम देते हुए सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई देश की आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद रोधी अभियान के तहत 13 मार्च को की गई। पकड़े गए लोगों में एक चर्चित अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं।
इन सभी सात विदेशी आरोपियों को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट स्थित विशेष एनआईए अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए के तहत ग्यारह दिन की हिरासत में भेज दिया गया है। ये सभी आरोपी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे और देश के संवेदनशील सीमाई इलाकों में सक्रिय थे।
बड़ी साजिश के तहत हुई भारत में एट्री
राष्ट्रीय जांच एजेंसी की एफआईआर और शुरुआती जांच से यह पूरी तरह साफ हो गया है कि यह मामला सीधे तौर पर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमावर्ती इलाकों की संवेदनशीलता से जुड़ा हुआ है। जांच में यह बात सामने आई है कि ये विदेशी नागरिक एक सोची समझी साजिश के तहत भारत की धरती का इस्तेमाल कर रहे थे।
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तीन एयरपोर्ट से अरेस्ट हुए सात लोग
गिरफ्तारियों को अंजाम देने के लिए देश के तीन अलग अलग हवाई अड्डों पर एक साथ छापेमारी की गई। इस दौरान कोलकाता के हवाई अड्डे से अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक को धर दबोचा गया। वहीं, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के हवाई अड्डों से तीन-तीन यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया।
वैनडाइक के नाम ने मचाया हड़कंप
इन यूक्रेनी नागरिकों की पहचान पेट्रो हुरबा, तारास स्लिवियाक, इवान सुकमानोव्स्की, मारियन स्टेफनकिव, मैक्सिम होंचारुक और विक्टर कामिंस्की के रूप में की गई है। हालांकि इन छह लोगों के बारे में बहुत अधिक जानकारी सार्वजनिक पटल पर नहीं रखी गई है, लेकिन जैसे ही इस मामले में मुख्य आरोपी मैथ्यू आरोन वैनडाइक का नाम सामने आया, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मच गई। वैनडाइक एक जाना पहचाना चेहरा है और दुनिया भर के कई हिंसक संघर्षों से उसका पुराना नाता रहा है। जांच एजेंसियों ने उसकी पहचान सोशल मीडिया और अन्य जगहों पर मौजूद उसकी तस्वीरों के जरिए भी पुख्ता की है।
प्रतिबंधित इलाकों में बिना परमिट एंट्री
राष्ट्रीय जांच एजेंसी के विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, कुल चौदह यूक्रेनी नागरिक अलग अलग तारीखों में टूरिस्ट वीजा लेकर भारत आए थे। भारत पहुंचने के बाद उन्होंने सबसे पहले असम के गुवाहाटी का रुख किया और वहां से वे मिजोरम चले गए। चौंकाने वाली बात यह है कि मिजोरम जैसे संवेदनशील राज्य में जाने के लिए रिस्ट्रिक्टेड एरिया परमिट और इनर लाइन परमिट जैसे जरूरी दस्तावेजों की आवश्यकता होती है।
उत्तर पूर्व में NIA की गिरफ्तारी इन्फोग्राफिक (AI जनरेटेड)
मैथ्यू वैनडाइक और इन लोगों ने बिना किसी अनुमति के वहां प्रवेश किया। जांच एजेंसियों के आरोपों के अनुसार, मिजोरम पहुंचकर इन विदेशी नागरिकों ने म्यांमार में सक्रिय जातीय सशस्त्र संगठनों से संपर्क स्थापित किया। भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि म्यांमार के इन सशस्त्र संगठनों के संबंध भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय विभिन्न उग्रवादी गुटों से भी जुड़े हुए हैं।
नॉर्थ-ईस्ट के उग्रवादियों से साठ-गांठ
इस पूरे विदेशी नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य म्यांमार में सक्रिय इन जातीय सशस्त्र समूहों को आधुनिक युद्ध तकनीक, विशेषकर ड्रोन वॉरफेयर की पहले से तय ट्रेनिंग देना था। हालांकि एनआईए ने आधिकारिक तौर पर केवल सात विदेशी नागरिकों की ही गिरफ्तारी की पुष्टि की है। इन सातों विदेशियों ने न सिर्फ म्यांमार के विद्रोही समूहों से संपर्क किया बल्कि वे कई प्रशिक्षण गतिविधियों में भी सीधे तौर पर शामिल हुए। एफआईआर में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि ये समूह पूर्वोत्तर के उग्रवादियों से साठगांठ कर रहे थे। जांच में यह खतरनाक खुलासा भी हुआ है कि यह अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क यूरोप से बहुत बड़ी मात्रा में ड्रोन खरीदकर उन्हें भारत के सुरक्षित रास्तों से म्यांमार पहुंचा रहा था।
पूर्वोत्तर को दहलाने का खतरनाक प्लान
एनआईए ने आरोप लगाया है कि यह पूरा समूह हथियारों की अवैध आपूर्ति करने, उग्रवादियों को सैन्य प्रशिक्षण देने और यूरोप से आयातित ड्रोन का इस्तेमाल करके म्यांमार के भीतर चल रहे ट्रेनिंग कैंप्स को लॉजिस्टिक और तकनीकी समर्थन देने की एक बड़ी योजना पर काम कर रहा था। इस ट्रेनिंग में मुख्य रूप से ड्रोन वॉरफेयर, ड्रोन ऑपरेशन, ड्रोन को असेंबल करने और जैमिंग तकनीक जैसी आधुनिक युद्ध कलाओं पर फोकस किया जा रहा था। वैनडाइक और उसके यूक्रेनी साथियों पर यह गंभीर आरोप है कि वे म्यांमार के विद्रोही गुटों को हथियारों के सटीक इस्तेमाल और खतरनाक ड्रोन संचालन की उच्च स्तरीय ट्रेनिंग दे रहे थे।
उग्रवादियों से जुड़े हैं म्यामांर के विद्रोही
एनआईए के मुताबिक म्यांमार में सक्रिय कई सशस्त्र विद्रोही समूहों के भारत में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से बहुत पुराने और गहरे संबंध हैं। इन विदेशी समूहों पर भारतीय उग्रवादी संगठनों को हथियार, संचार उपकरण और प्रशिक्षण देने का कड़ा संदेह है जो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक सीधा और बहुत बड़ा खतरा है। इस खुलासे के बाद अब भारतीय जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में पूरी मुस्तैदी से जुटी हुई हैं कि इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के भारत के अंदर कोई स्थानीय मददगार या कनेक्शन मौजूद हैं या नहीं।
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एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि भारी मात्रा में यूरोप से लाए गए ड्रोन को भारतीय क्षेत्र के जरिए बिना किसी की नजर में आए म्यांमार तक कैसे भेजा गया। गिरफ्तारी के दौरान इन विदेशी नागरिकों के पास से जब्त किए गए सभी मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच की जा रही है और आगे की पूछताछ व सबूत जुटाने के लिए आरोपियों को देश के विभिन्न स्थानों पर ले जाया जाएगा।
मिजोरम के CM ने जारी की थी चेतावनी
इस घटना की गंभीरता को इस बात से भी समझा जा सकता है कि मार्च 2025 में ही मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने एक गंभीर चेतावनी जारी की थी। उन्होंने कहा था कि अमेरिका और ब्रिटेन के कई भाड़े के सैनिक और वहां के पूर्व विशेष बलों के प्रशिक्षित सदस्य मिजोरम के रास्ते म्यांमार में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि वे वहां की मौजूदा सैन्य सरकार के खिलाफ हथियार उठा रहे स्थानीय विद्रोही समूहों को सैन्य प्रशिक्षण दे सकें।
शेख हसीना ने लगाया था बड़ा आरोप
इसके अलावा पड़ोसी देश बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भी अपनी सरकार गिरने से ठीक पहले अमेरिका पर एक बहुत बड़ा आरोप लगाया था। शेख हसीना का कहना था कि अमेरिका भारत से सटे हुए सीमाई इलाकों में एक स्वतंत्र ईसाई राज्य की स्थापना करना चाहता है। इन तमाम भू राजनीतिक घटनाक्रमों और पूर्व में दी गई चेतावनियों को देखते हुए भारत सरकार और उसकी जांच एजेंसियां इस वर्तमान घटना को कतई हल्के में नहीं लेना चाहेंगी।
कौन है ख़तरनाक मैथ्यू ओरान वैनडाइक?
छियालीस वर्षीय मैथ्यू आरोन वैनडाइक खुद को एक डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर, रक्षा विशेषज्ञ, वॉर रिपोर्टर और यहां तक कि एक फ्रीडम फाइटर बताता है। लेकिन दूसरी तरफ, दुनिया के कई जाने माने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ और खुफिया एजेंसियां उसे एक पेशेवर भाड़े का सैनिक मानते हैं। वैनडाइक का जन्म अमेरिका के मैरीलैंड राज्य के बाल्टीमोर शहर में हुआ था।
मैथ्यू वैनडाइक (सोर्स- सोशल मीडिया)
उसने प्रतिष्ठित जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से सिक्योरिटी स्टडीज जैसे गंभीर विषय में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है। उसका अब तक का अधिकांश जीवन दुनिया के अलग अलग खतरनाक युद्ध क्षेत्रों और संघर्ष वाले इलाकों में ही बीता है। वह अपने नाम से एक सक्रिय सोशल मीडिया अकाउंट भी चलाता है, जिसमें उसने अपने अब तक के सारे सैन्य कारनामों के बारे में बहुत ही विस्तार से और गर्व के साथ बताया है।
पहली बार कब चर्चा में आया वैनडाइक?
वैनडाइक का नाम दुनिया के सामने पहली बार साल 2011 में तब सबसे ज्यादा चर्चा में आया था, जब उसने लीबिया के तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी के खिलाफ हथियार उठा रहे विद्रोहियों के साथ एक विदेशी लड़ाके के रूप में हिस्सा लिया था। उस खूनी संघर्ष के दौरान उसे गद्दाफी की सेना ने पकड़ लिया था और उसे कुख्यात अबू सलीम जेल में पांच महीने से भी अधिक समय तक बंदी बनाकर रखा गया था।
लीबिया की जेल से भागने में कामयाब
बाद में जब विद्रोहियों ने राजधानी त्रिपोली पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया तो उस अफरातफरी के बीच वह जेल से भाग निकलने में कामयाब रहा। उस लीबियाई लड़ाई के दौरान हथियार चलाते हुए और बाद में हिरासत में लिए जाने की उसकी कई तस्वीरें आज भी सोशल मीडिया और इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध हैं। यह माना जाता है कि वह किसी तरह लीबिया से सुरक्षित बच निकला था।
सीरिया-इराक में ISIS के खिलाफ जंग
इसके बाद वैनडाइक ने मिडल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका में चल रही विभिन्न क्रांतियों का खुलकर और सक्रिय रूप से समर्थन किया। सीरिया के भयानक गृह युद्ध के दौरान उसने खुद को एक फिल्ममेकर के रूप में पेश करते हुए काम किया, लेकिन साथ ही उसने वहां एक सशस्त्र लड़ाके के रूप में भी विद्रोही गतिविधियों में हिस्सा लिया। सीरिया के बाद उसने इराक का रुख किया और वहां कुख्यात आतंकी संगठन आईएसआईएस के खिलाफ भी हथियारों के साथ लड़ाई लड़ी।
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अपने इन युद्ध अभियानों को एक संस्थागत रूप देने के लिए साल 2014 में उसने संस ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल नाम का एक संगठन बनाया। इस संगठन को बनाने का मुख्य मकसद दुनिया भर में मौजूद अधिनायकवादी सरकारों और आतंकवाद के खिलाफ लड़ने वाली विभिन्न ताकतों व विद्रोही गुटों को मुफ्त सैन्य प्रशिक्षण, रणनीतिक सलाह, सामरिक मदद और अन्य जरूरी रिसोर्सेज उपलब्ध कराना था। जब 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुआ तो वैनडाइक पूरी तरह से यूक्रेन में सक्रिय हो गया।
यूक्रेन में रूसी सेना के खिलाफ लड़ाई
उसने वहां दावा किया कि वह यूक्रेनी नागरिकों और सेना के जवानों को आधुनिक युद्ध कौशल और विशेषकर काउंटर ड्रोन तकनीक की अहम ट्रेनिंग दे रहा है। उसने यह भी बताया कि वह खुद भी रूसी सेना के खिलाफ सीधी लड़ाई में शामिल रहा है। इस दौरान उसने लविव और राजधानी कीव जैसे प्रमुख शहरों में यूक्रेनी नागरिकों और सैनिकों के लिए कई बड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए।
वेनेजुएला में मादुरो के खिलाफ काम
इन सब के अलावा उसने सार्वजनिक रूप से यह भी स्वीकार किया है कि वह साल 2019 से लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार के खिलाफ काम कर रहे विद्रोहियों के साथ कई गुप्त अभियानों में शामिल रहा है और उन्हें लगातार भारी फंडिंग भी करता रहा है। साल 2025 की अपनी एक लंबी सोशल मीडिया पोस्ट में उसने बड़ा दावा करते हुए कहा था कि वह 2019 से ही एक वेनेजुएलाई विद्रोही कमांडर के साथ मिलकर एक गुप्त सैन्य अभियान चला रहा है।
NIA की हिरासत में मैथ्यू वैनडाइक (सोर्स- सोशल मीडिया)
उसने अपनी पोस्ट में लिखा कि जिन वेनेजुएलाई लोगों के साथ मैं काम करता हूं वे सच्चे देशभक्त हैं जो अपने देश को तानाशाह से आजाद कराने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। उनके कमांडर और मैं मिलकर सभी गुप्त मिशनों की रूपरेखा और योजना बनाते हैं, जबकि उन मिशनों को पूरा करने के लिए जरूरी फंडिंग मैं उपलब्ध कराता हूं।
ईरान की जंग पर की बड़ी टिप्पणी
हाल ही में 10 मार्च को वैनडाइक ने ईरान युद्ध के संदर्भ में भी एक बहुत ही भड़काऊ टिप्पणी की थी। उसने इस युद्ध पर अपनी राय रखते हुए अमेरिका द्वारा ईरान और वेनेजुएला में किए गए मौजूदा सैन्य ऑपरेशन को बेहद कमजोर और नाकाफी बताया। इसी दौरान उसने खुद की ईरान में खींची गई कुछ तस्वीरें भी पोस्ट कीं। अपनी पोस्ट में उसने दावा किया कि अब इन देशों में पहले से भी अधिक कुशल और खतरनाक नेतृत्व आ गया है। अयातुल्ला खामेनेई की जगह अब ईरान में उनके अधिक कठोर रुख वाले बेटे ने ले ली है।
वेनेजुएला सत्ता परिवर्तन पर बड़ा बयान
इसी तरह वेनेजुएला में भी निकोलस मादुरो की जगह उनके ज्यादा सक्षम और चालाक उपराष्ट्रपति ने ले ली है। उसने अपनी बात को सही ठहराने के लिए एक उदाहरण देते हुए लिखा कि जैसे कोई कमजोर एंटीबायोटिक दवा शरीर में एक मजबूत बैक्टीरिया पैदा कर देती है, ठीक वैसे ही किसी देश पर की गई कमजोर सैन्य कार्रवाई वहां एक मजबूत और ज्यादा प्रतिरोधी शासन पैदा करती है। उसका साफ तौर पर मानना था कि जब आप किसी शासन पर हमला करें तो उसे आधा अधूरा छोड़ने के बजाय उसे पूरी तरह से जड़ से खत्म कर देना चाहिए।
फिल्ममेकिंग की आड़ में लड़ाके जैसा काम
मैथ्यू वैनडाइक की असल पहचान और उसके काम करने के तरीकों को लेकर हमेशा से ही एक बड़ा विवाद रहा है। उसकी जिंदगी और उसके युद्ध अभियानों पर बनी डॉक्यूमेंट्री पॉइंट एंड शूट को साल 2014 में प्रसिद्ध ट्रिबेका फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार मिला था। हालांकि, दुनिया भर के कई आलोचकों और पत्रकारों का यह स्पष्ट कहना है कि वैनडाइक पत्रकारिता और फिल्ममेकिंग की आड़ में युद्ध में एक लड़ाके के तौर पर सक्रिय भूमिका निभाता है।
CIA से जुड़ते हैं मैथ्यू वैनडाइक के तार
वैनडाइक पर कई बार अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए से गुप्त रूप से जुड़े होने के गंभीर आरोप भी लगे हैं। हालांकि, उसने इन तमाम दावों को हमेशा सिरे से खारिज किया है। उसका अपना तर्क है कि उसने अतीत में सीआईए की भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा जरूर लिया था, लेकिन पॉलीग्राफ टेस्ट में असफल हो जाने के कारण वह कभी भी इस एजेंसी में शामिल नहीं हो सका।
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मैथ्यू वैनडाइक और उसके छह यूक्रेनी साथियों की गिरफ्तारी के जरिए भारत सरकार ने पूरी दुनिया और खास तौर पर विदेशी ताकतों को एक बहुत ही साफ और कड़ा संकेत दिया है कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमाओं और देश की संप्रभुता को लेकर बेहद गंभीर है। साल 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद से ही पड़ोसी देश म्यांमार में जारी भारी अस्थिरता का सीधा असर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा पर भी पड़ता है।
Nia arrests matthew vandyke and ukrainian nationals for myanmar drone warfare training in mizoram
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