नेवी को मिलेगी नई ताकत… 60 मिमी सॉलिड रॉकेट मोटर तैयार, भारत को कितना होगा फायदा?
160mm Rocket Motor: हॉट फायर ट्रायल में रॉकेट मोटर की क्षमता की जांच होती है। थ्रस्ट, दबाव-दहन स्थिरता जैसे मानकों का परीक्षण होता है। इससे पता चलता है कि यह मोटर सुरक्षा मानकों पर खरा उतरा है।
- Written By: रंजन कुमार
नौसेना के लिए बना हथियार। इमेज-एआई
160mm Rocket Motor: बेंगलुरू स्थित डिफेंस टेक स्टार्टअप SpaceFields ने भारतीय नौसेना के नेवल आर्मामेंट इंस्पेक्ट्रेट के लिए 160 मिमी वर्ग का सॉलिड रॉकेट मोटर सफलतापूर्वक डिजाइन और विकसित कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह न केवल तकनीक की जीत है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में निजी क्षेत्र की बढ़ती ताकत का प्रमाण भी है।
इस रॉकेट मोटर का हाल में भारतीय नौसेना की कड़ी निगरानी में हॉट फायर ट्रायल किया गया। किसी भी रॉकेट इंजन के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा होती है। इस दौरान मोटर को जमीन पर स्थिर रखकर जलाया जाता है, ताकि इसके थ्रस्ट (धकेलने की शक्ति), आंतरिक दबाव और दहन स्थिरता का सटीक विश्लेषण किया जा सके। परीक्षण के परिणाम बताते हैं कि यह मोटर युद्धक परिस्थितियों में परिचालन के लिए पूरी तरह सुरक्षित और सक्षम है।
नौसेना के लिए क्यों है गेम-चेंजर?
सैन्य अभियानों में और विशेषकर समुद्र के बीच समय और सटीकता का बड़ा महत्व होता है। सॉलिड प्रोपल्शन तकनीक के कई फायदे हैं। इसे तरल ईंधन की तरह भरने में समय बर्बाद नहीं होता, यह हमेशा लॉन्च रेडी मोड में रहता है। इसे लंबी अवधि तक बिना किसी विशेष मरम्मत के सुरक्षित रखा जा सकता है। नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों पर जगह कम होती है, जहां इसकी सरल संरचना बहुत काम आती है।
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भविष्य की युद्ध प्रणाली में भूमिका
160 मिमी की यह मोटर मुख्य रूप से बूस्टर स्टेज या कम दूरी की मारक क्षमता वाली मिसाइलों और गोला-बारूद प्रणालियों में इस्तेमाल की जाएगी। सटीक थ्रस्ट कंट्रोल के कारण यह मिसाइल को सही दिशा और गति देने में सहायक होगी। वैसे, सुरक्षा कारणों से इसके विशिष्ट उपयोग वाले हथियार का नाम गुप्त रखा गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य के कई सामरिक प्रोजेक्ट्स का आधार बनेगी।
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निजी क्षेत्र का बढ़ता कद
SpaceFields की यह सफलता बताती है कि अब भारतीय स्टार्टअप केवल सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे जटिल हार्डवेयर और रक्षा तकनीक में भी वैश्विक मानकों को टक्कर दे रहे हैं। यह उपलब्धि रक्षा उत्पादन में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच बढ़ते तालमेल का शानदार उदाहरण है।
