खतरे में मोदी सरकार, NDA से समर्थन वापस लेंगे चंद्रबाबू नायडू? ‘INDIA’ ने खड़ा कर दिया धर्मसंकट!
NDA vs INDIA: विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' ब्लॉक के उपराष्ट्रपति कैंडिडेट बी. सुदर्शन रेड्डी आंध्र प्रदेश से आते हैं। जिसके चलते एनडीए में शामिल टीडीपी के मुखिया चंद्रबाबू नायडू धर्मसंकट खड़ा हो गया है।
- Written By: अभिषेक सिंह
पीएम मोदी व चंद्रबाबू नायडू (डिजाइन फोटो)
Vice President Election: उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक ने बी सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाकर बड़ा ‘खेला’ कर दिया है। अब केन्द्र की मोदी सरकार और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल टीडीपी और उसके मुखिया चंद्रबाबू नायडू के सामने बड़ा धर्मसंकट खड़ा हो गया है।
दरअसल, इस बार उपराष्ट्रपति पद का चुनाव क्षेत्रीय और राजनीतिक समीकरणों के चलते बेहद दिलचस्प हो गया है। विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है, जो तेलंगाना के रंगारेड्डी ज़िले से ताल्लुक रखते हैं। ‘इंडिया’ के इस दांव से सियासी हलचल बढ़ गई है।
दिलचस्प सियासी मोड़ पर VP चुनाव
दूसरी ओर, एनडीए ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को तमिलनाडु से मैदान में उतारा है। दोनों उम्मीदवारों के क्षेत्रीय मूल ने इस चुनाव को एक दिलचस्प मोड़ दे दिया है। इससे एनडीए गठबंधन के सहयोगियों खासकर तेलगु देशम पार्टी (टीडीपी) के लिए दुविधा की स्थिति पैदा हो गई है।
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धर्मसंकट में फंसे एन. चंद्रबाबू नायडू!
टीडीपी एनडीए की एक प्रमुख सहयोगी है। इसके प्रमुख और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू अब क्षेत्रीय गौरव और गठबंधन की निष्ठा के बीच फंस गए हैं। चूंकि सुदर्शन रेड्डी तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले से हैं। यह जिला अब भले तेलंगाना में है लेकिन क्षेत्रीयता के लिहाज से आंध्र के करीब है। इसलिए टीडीपी पर अपने राज्य के नेता का समर्थन करने का दबाव बढ़ गया है। अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो जनता के बीच ग़लत मैसेज भी जा सकता है।
किसका समर्थन करेंगे चंद्रबाबू नायडू?
राजनैतिक जानकारों का मानना है कि अगर चंद्रबाबू नायडू एनडीए के उम्मीदवार यानी सीपी राधाकृष्णन का समर्थन करते हैं तो उनकी क्षेत्रीय राजनीति को भारी नुकसान पहुंच सकता है। जबकि टीडीपी और चंद्रबाबू नायडू के लिए प्रदेश की राजनीति केन्द्र की सियासत से कहीं ज्यादा अहम है।
मोदी सरकार पर आ सकता है ख़तरा?
वहीं, दूसरी तरफ यदि वह ‘इंडिया ब्लॉक’ के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी का सपोर्ट करते हैं तो यह सीधे तौर पर केन्द्र की मोदी सरकार से बगावत मानी जाएगी। वहीं, चंद्रबाबू के ऐसा करने पर केन्द्र की मोदी सरकार को कमजोर होते देख एनडीए में शामिल अन्य दल भी अपना रुख बदल सकते हैं।
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एनडीए के पास मौजूदा वक्त में 293 लोकसभा सांसद हैं। अगर चंद्रबाबू नायडू पाला बदलते हैं तो यह संख्या 277 रह जाएगी। बहुमत में बने रहने के लिए 272 सांसद जरूरी हैं। ऐसे में टीडीपी के टूटने के बाद मोदी सरकार पर ख़तरा बढ़ जाएगा। फिलहाल यह सियासी विश्लेषकों और राजनैतिक चर्चाओं का हिस्सा है। आगे क्या कुछ होता है यह देखना काफी दिलचस्प होगा।
