पीएम मोदी व जवारलाल नेहरू (डिजाइन फोटो)
PM Modi Somnath Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी को गुजरात के मशहूर सोमनाथ मंदिर जाएंगे। वह ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में हिस्सा लेंगे, जो 1026 में मंदिर पर हुए पहले बड़े हमले की 1000वीं सालगिरह की याद में मनाया जा रहा है। यह साल भर चलने वाला कार्यक्रम 8 से 11 जनवरी तक खास कार्यक्रमों के साथ शुरू होगा।
सोमवार को एक ब्लॉग पोस्ट में पीएम मोदी ने सोमनाथ की 1000 साल की यात्रा पर बात की। उन्होंने लिखा कि 1026 में महमूद गजनवी के हमले से शुरू हुई तबाही की श्रृंखला के बावजूद, मंदिर को बार-बार बनाया गया। यह भारत की आत्मा की एक शाश्वत घोषणा है।
पीएम ने इसे ‘विकसित भारत’ के सपने से जोड़ा और कहा कि नफरत खत्म कर सकती है, लेकिन आस्था निर्माण करती है। पीएम मोदी श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं, उन्होंने जनवरी 2021 से यह पद संभाला है। उनसे पहले मोरारजी देसाई पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने अध्यक्ष के रूप में काम किया था।
पीएम मोदी का सोमनाथ से गहरा जुड़ाव है। वह ट्रस्ट के नेतृत्व में मंदिर के विकास कार्यों में शामिल हैं। इनमें सोमनाथ प्रोमेनेड, प्रदर्शनी केंद्र और पुराने (जूना) सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार शामिल है। वह नियमित रूप से दर्शन के लिए जाते हैं। उनकी पिछली यात्रा मार्च 2025 में थी जहां उन्होंने रुद्राभिषेक किया और देश की समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
सोमनाथ मंदिर का इतिहास विनाश और पुनर्निर्माण की एक लंबी गाथा है। महमूद गजनवी ने 1026 में पहला बड़ा हमला किया था। मंदिर कई बार नष्ट हुआ, लेकिन हर बार उसे फिर से बनाया गया। आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने पुनर्निर्माण शुरू किया। 1947 में दिवाली पर उनकी यात्रा से प्रेरित होकर इसके पुनर्निर्माण की घोषणा की गई। 1950 में सरदार पटेल के निधन के चलते राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 1951 में इसका अभिषेक किया।
दिलचस्प बात यह है कि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने खुद को मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम से दूर रखा। वह नहीं चाहते थे कि राष्ट्रपति या संवैधानिक पद पर बैठा कोई भी व्यक्ति किसी धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हो। नेहरू का मानना था कि इससे एक धर्मनिरपेक्ष राज्य की छवि खराब होगी। उन्होंने राष्ट्रपति को एक पत्र लिखकर ऐसी भव्य उद्घाटन समारोह से दूर रहने की सलाह दी।
सोमनाथ मंदिर में राजेन्द्र प्रसाद (सोर्स- सोशल मीडिया)
नेहरू ने मुख्यमंत्रियों को भी लिखा, जिसमें कहा गया कि यह कोई सरकारी कार्यक्रम नहीं है। हालांकि, राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने नेहरू की सलाह को नज़रअंदाज़ कर दिया और समारोह में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि वह मस्जिद या चर्च के लिए भी ऐसा ही करेंगे। उन्होंने कहा था कि यही भारतीय धर्मनिरपेक्षता है।
बहुत कम प्रधानमंत्रियों ने अपने कार्यकाल के दौरान सोमनाथ का दौरा किया है। मोरारजी देसाई पहले थे जो ट्रस्ट के चेयरमैन थे। पी.वी. नरसिम्हा राव ने 1995 में नए मुख्य मंदिर के समर्पण के लिए दौरा किया था। नरेंद्र मोदी सबसे ज्यादा बार दौरा करने वाले हैं, उन्होंने कई बार दौरा किया है। नेहरू ने 1951 के उद्घाटन से खुद को दूर रखा और कभी दौरा नहीं किया। सरदार पटेल उप प्रधानमंत्री थे।
2026 सोमनाथ के लिए एक खास साल है। यह 1000 साल पहले हुए हमले और 1951 के पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे होने की याद दिलाता है। पीएम मोदी इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण से जोड़ते हैं। स्वाभिमान पर्व में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। 11 जनवरी को पीएम का दौरा इसकी शुरुआत को खास बनाएगा।
सोमनाथ मंदिर को बार-बार नष्ट किया गया है, लेकिन यह भारतीय आस्था की तरह यह अटूट रहा है। पीएम मोदी के मुताबिक यह मां भारती के करोड़ों बच्चों के अटूट साहस का प्रतीक है। यही वजह है कि पीएम मोदी का यह दौरा देश में राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत करेगा। सोमनाथ मंदिर का निर्माण और विकास सिर्फ एक मंदिर बनाने के बारे में नहीं है, बल्कि यह लाखों भारतीयों की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है।
इस साल मार्च-अप्रैल में पांच राज्यों, खासकर पश्चिम बंगाल और असम में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीजेपी दोनों राज्यों में सत्ता के लिए एक मजबूत दावेदार है। असम में उसकी सरकार है, जबकि पश्चिम बंगाल में वह मुख्य विपक्षी पार्टी है।
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राजनीतिक विशेषज्ञ पीएम मोदी के दौरे को राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत करने वाले कदम के तौर पर बता रहे हैं। यह आने वाले वक्त में दोनों राज्यों के चुनावों में एक नैरेटिव बनाने में मदद करेगा। ऐसा हुआ तो विपक्ष इस वार से बेदम हो जाएगा। इस लिहाज से देखें तो यह एक जरूरी दौरा साबित होने वाला है।
Ans: 11 जनवरी को सोमनाथ मंदिर पर हुए सबसे बड़े हमले की 1000वीं सालगिरह है और जीर्णोद्धार की वर्षगांठ है। यही वजह है कि पीएम मोदी 11 जनवरी को सोमनाथ मंदिर दर्शन के लिए जा रहे हैं।
Ans: प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने खुद को मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम से दूर रखा। वह नहीं चाहते थे कि राष्ट्रपति या संवैधानिक पद पर बैठा कोई भी व्यक्ति किसी धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हो। नेहरू का मानना था कि इससे एक धर्मनिरपेक्ष राज्य की छवि खराब होगी।
Ans: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष बनने वाले दूसरे पीएम हैं। इससे पहले मोरारजी देसाई यह जिम्मेदारी निभा चुके हैं।