उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष करेगा 'खेला' या NDA की एकतरफा जीत? जानें क्या है वोटों का समीकरण

Vice President Election 2025: देश में उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए मुकाबला तय हो गया है, जिसमें एनडीए के सीपी राधाकृष्णन और इंडिया गठबंधन के बी. सुदर्शन रेड्डी आमने-सामने हैं।
Vice President Election 2025
एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी
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Vice President Election: देश में उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए के बाद इंडिया गठबंधन ने भी अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। इंडिया ब्लॉक ने एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारा है। ऐसे में अब 9 सितंबर को सीपी राधाकृष्णन बनाम बी. सुदर्शन रेड्डी के बीच मुकालबा तय हो गया है। इसके बाद अब सवाल यह है कि क्या एनडीए उम्मीदवार उपराष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव में एकतरफा जीत हासिल करेंगे या फिर इंडिया गठबंधन से उन्हें चुनौती मिलेगी।

क्या है वोटों का समीकरण?

बता दें कि लोकसभा में सांसदों की कुल संख्या 543 है। इसमें से एक बशीरहाट की सीट फिलहाल खाली है। वहीं, राज्यसभा में कुल 245 सीट हैं। हालांकि, इनमें से अभी 6 सीट खाली है। इस तरह दोनों सदनों में कुल मिलाकर निर्वाचित सदस्यों की संख्या 781 है। ऐसे में उपराष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिए किसी भी पक्ष को 391 सांसदों की जरूरत होगी। आंकड़ों के अनुसार सरकार के समर्थन में इस वक्त लगभग 427 सांसद हैं। इनमें 293 लोकसभा तथा 134 राज्यसभा के हैं। वहीं, विपक्षी धड़े इंडिया गठबंधन के पास 355 सांसदों का समर्थन है। इनमें से 249 लोकसभा तथा 106 राज्यसभा सांसद शामिल हैं।

130 से अधिक सांसद किसी भी धड़े के हिस्सा नहीं

बता दें कि लगभग 130 से अधिक सांसद किसी भी धड़े के हिस्सा नहीं हैं। ऐसे में इन सांसदों का वोट महत्वपूर्ण होगा। वैसे, आंकड़ों की बात करें तो एनडीए गठबंधन के पास स्पष्ट तौर पर बहुमत है।

मालूम हो कि इस चुनाव में व्हिप प्रभावी नहीं होता है। ऐसे में कुछ सांसद क्रॉस वोटिंग भी कर सकते हैं, जिससे चुनाव रोमांचक हो सकता है।

कौन हैं बी. सुदर्शन रेड्डी?

बता दें कि बी. सुदर्शन रेड्डी सुप्रीम कोर्ट के जज भी रह चुके हैं। रेड्डी 2005 में गुवाहाटी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बनने से पहले 1995 में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में जज के तौर पर सेवा दे रहे थे। 2007 से 2011 तक वो सुप्रीम कोर्ट के जज रहे। इसके बाद वह रिटायर हुए। वहीं, रिटायरमेंट के बाद रेड्डी ने 2013 में गोवा के पहले लोकायुक्त या भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल के रूप में भी काम किया।

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