...तो गोडसे नहीं कर पाता महात्मा गांधी की हत्या! बापू की वो जिद जिसके आगे झुके सरदार पटेल

Mahatma Gandhi Death Anniversary: महात्मा गांधी ने प्रार्थना सभा में तलाशी का विरोध किया था। इसी कारण कड़ी सुरक्षा नहीं हो सकी और 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी।
Mahatma Gandhi Death Anniversary Special
महात्मा गांधी, सरदार पटेल (Image- Social Media)
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Mahatma Gandhi Story: महात्मा गांधी ने तत्कालीन उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार बल्लभभाई पटेल को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी थी कि यदि प्रार्थना सभा में आने वाले किसी भी व्यक्ति की तलाशी ली गई, तो वे उसी क्षण से आमरण अनशन पर बैठ जाएंगे। गांधी जी की इस सख्त चेतावनी से पटेल समेत पूरी नेहरू सरकार चिंतित हो गई थी। एक वरिष्ठ पत्रकार बताते हैं कि केंद्र सरकार भली-भांति जानती थी कि बापू जो कहते थे, उसे कर के दिखाते थे। उस उम्र में अनशन करना उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता था। इसी कारण गांधी जी की इच्छा के विरुद्ध जाकर उनकी सुरक्षा के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं की गई।

गौरतलब है कि 20 जनवरी 1948 को बिड़ला हाउस के पास एक बम विस्फोट हो चुका था। इसके बावजूद 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने प्रार्थना सभा के दौरान गोली मारकर महात्मा गांधी की हत्या कर दी। इस घटना के बाद जयप्रकाश नारायण और डॉ. राम मनोहर लोहिया जैसे समाजवादी नेताओं ने सरदार पटेल की कड़ी आलोचना की थी। उनका कहना था कि यदि सरकार चाहती, तो गांधी जी की जान बचाई जा सकती थी।

...तो गोडसे पिस्तौल लेकर नहीं जा पाता

दरअसल, सरदार पटेल गांधी जी के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के पक्षधर थे। लेकिन बिड़ला हाउस में होने वाली प्रार्थना सभा में सरकारी सुरक्षा की पहल को गांधी जी ने ठुकरा दिया। वे निजी सुरक्षा के लिए सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल के सख्त खिलाफ थे। पटेल ने कई बार उनसे अनुरोध किया कि कम से कम बिड़ला भवन के आसपास हल्की सुरक्षा व्यवस्था स्वीकार कर लें, लेकिन गांधी जी नहीं माने। यदि तलाशी की अनुमति होती, तो गोडसे पिस्तौल लेकर प्रार्थना सभा में प्रवेश नहीं कर पाता।

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महात्मा गांधी (Image- Social Media)

सरदार पटेल ने बाद में कहा था, “20 जनवरी 1948 को बम विस्फोट से पहले बिड़ला हाउस की सशस्त्र सैनिकों द्वारा घेराबंदी की गई थी। विस्फोट के बाद हर कमरे में एक पुलिस अधिकारी तैनात किया गया। मैं जानता था कि यह व्यवस्था महात्मा को पसंद नहीं थी और इस विषय पर उन्होंने मुझसे कई बार बहस भी की। अंततः वे सुरक्षा पर तो सहमत हो गए, लेकिन उन्होंने सख्ती से कहा कि प्रार्थना सभा में आने वाले किसी भी व्यक्ति की तलाशी नहीं ली जाएगी।”

गांधी जी को अपनी मृत्यु का हो गया था पूर्वाभास

गांधी जी की हत्या के बाद समाजवादियों द्वारा सरदार पटेल पर दिए गए लंबे और तीखे भाषणों से उन्हें गहरा आघात पहुंचा। 4 फरवरी 1948 को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में पटेल ने इन आरोपों का जवाब देना शुरू किया, लेकिन वे इतने भावुक हो गए कि भाषण अधूरा छोड़कर ही बैठक से निकल गए। बाद में पटेल ने कहा कि गांधी जी को अपनी मृत्यु का पूर्वाभास हो गया था। उन्होंने कहा था कि यदि कोई उनकी हत्या करना चाहेगा, तो वह प्रार्थना सभा में ही करेगा। पटेल के अनुसार, गांधी जी मानते थे कि उनका जीवन ईश्वर के हाथ में है और यदि मृत्यु निश्चित है, तो कोई सावधानी उन्हें नहीं बचा सकती। फिर भी 30 पुलिस अधिकारी सादे कपड़ों में प्रार्थना सभा की भीड़ में मौजूद थे। हत्यारा गांधी जी के सामने झुका, पिस्तौल निकाली और इससे पहले कि कोई उसे पकड़ पाता, गोलियां चला दीं। यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी, जिसे रोका नहीं जा सका।

गांधी जी की जिद के आगे झुकी सरकार

5 फरवरी 1948 को संविधान सभा में सरदार पटेल ने कहा कि हत्यारे ने उसी स्थिति का फायदा उठाया, जिस पर गांधी जी के आग्रह के कारण सरकार कार्रवाई नहीं कर सकी। उन्होंने सदन में उन पुलिस और सुरक्षा कर्मियों का पूरा विवरण भी रखा, जो प्रार्थना सभा के आसपास तैनात थे। पटेल ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए आगंतुकों की तलाशी आवश्यक थी।

The Death of Mahatma Gandhi
महात्मा गांधी की अंतिम यात्रा (Image- Social Media)

गांधी जी के कई समर्थक भी चाहते थे कि वे अपनी जिद छोड़कर तलाशी व्यवस्था स्वीकार कर लें। सरदार पटेल भी इसी मत के थे, लेकिन गांधी जी के सामने उनकी एक न चली। हत्या के बाद पटेल को पूरे देश में अनावश्यक आलोचना झेलनी पड़ी।

छोटे सरकारी बंगले में रहते थे नेहरू

वरिष्ठ पत्रकार बताते हैं कि गांधी जी की हत्या के बाद सरदार पटेल को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सुरक्षा की चिंता सताने लगी। उस समय नेहरू जी एक छोटे सरकारी बंगले में रहते थे और बड़े आवास में जाने को तैयार नहीं थे। पटेल ने उनसे आग्रह किया कि वे सुरक्षा कारणों से बड़े मकान में स्थानांतरित हों, लेकिन नेहरू जी लोकलाज के कारण अड़े रहे।

Mahatma Gandhi Death Story
सरदार पटेल और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू (Image- Social Media)

अंततः सरदार पटेल ने भावुक होकर कहा कि गांधी जी को न बचा पाने का दर्द वे अभी तक झेल रहे हैं। यदि नेहरू जी को कुछ हो गया, तो वह स्वयं को कभी माफ नहीं कर पाएंगे। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर नेहरू जी बड़े मकान में नहीं गए, तो वे गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। इस पर जाकर जवाहरलाल नेहरू को अपनी जिद छोड़नी पड़ी।

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