क्या आप जानते हैं? बड़े मंगल पर शिवलिंग की पूजा से प्रसन्न होते हैं हनुमान जी, जानें क्या चढ़ाना है शुभ।

Bade Mangal Puja Vidhi: बड़े मंगल पर शिवलिंग की पूजा करने से हनुमान जी अत्यंत प्रसन्न होते हैं। मान्यता है कि इस दिन सही विधि से जल, बेलपत्र अन्य शुभ सामग्री अर्पित करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
Bade Mangal Shivling Puja
शिवलिंग की पूजा (सौ.AI)
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Bade Mangal Shivling Puja:  5 मई 2026 को ज्येष्ठ महीने के पहला बड़ा मंगल है। ज्येष्ठ महीने के मंगलवार का हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व हैं, जिन्हें 'बड़े मंगल' या 'बुढ़वा मंगल' के नाम से जाना जाता है। यह दिन संकटमोचन हनुमान जी की विशेष उपासना के लिए समर्पित है।

हनुमान जी भगवान शिव के ही 11वें रुद्रावतार

हनुमान जी भगवान शिव के ही 11वें रुद्रावतार माने जाते हैं, इसलिए बड़े मंगल (Bade Mangal) के शुभ अवसर पर शिवलिंग की पूजा करना न केवल महादेव को प्रसन्न करता है, बल्कि बजरंगबली की भी कृपा दिलाता है।

पहले बड़े मंगल पर शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए?

  • लाल चंदन और लाल पुष्प

हनुमान जी भगवान शिव के ही 11वें रुद्रावतार माने जाते हैं।भगवान शिव को वैसे तो सफेद चीजें प्रिय हैं, लेकिन हनुमान जी के दिन यानी बड़े मंगल पर शिवलिंग पर लाल चंदन का लेप लगाना और लाल गुलाब या गुड़हल के फूल चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है। यह मंगल ग्रह के नकारात्मक प्रभाव को कम करता है।

  • तांबे के लोटे से जल और अक्षत चढ़ाएं

तांबे के पात्र में गंगाजल भरकर उसमें थोड़े से अक्षत मिलाएं और 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करते हुए शिवलिंग पर चढ़ाएं

  • बिल्व पत्र और बेसन के लड्डू

महादेव को बिल्व पत्र अर्पित करें और साथ ही हनुमान जी के प्रिय बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। इस भोग को बाद में प्रसाद के रूप में बांटने से घर में सुख-शांति आती है।

पहले बड़े मंगल पूजन के नियम

  • स्नान के बाद लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
  • ध्यान रखें कि हनुमान जी को तुलसी प्रिय है, लेकिन शिवलिंग पर तुलसी दल कभी न चढ़ाएं, क्योंकि यह वर्जित माना गया है।
  • शिवलिंग के सामने बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करना और अंत में शिव जी व हनुमान जी की आरती करना बहुत फलदायी होता है।
  • पूजा के बाद सभी गलतियों के लिए माफी मांगे।

शिव पूजा मंत्र

ॐ नमः शिवाय॥ ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात॥ वंदे देव उमापतिं सुरगुरुं वंदे जगत्कारणं, वंदे पन्नगभूषणं मृधरं वंदे पशूनां पतिम्॥ ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

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