
खुशवंत सिंह, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Khushwant Singh News In Hindi: भारतीय साहित्य और मीडिया जगत में खुशवंत सिंह एक ऐसी शख्सियत थे जिन्हें उनके तीखे कटाक्ष, बेबाक लेखन और सिखों के इतिहास पर उनकी गहरी पकड़ के लिए हमेशा याद किया जाएगा। 2 फरवरी 1915 को हदाली (अब पाकिस्तान) में जन्मे खुशवंत सिंह ने न केवल पत्रकारिता के नए मानक स्थापित किए बल्कि सिखों के गौरवशाली इतिहास को दुनिया के सामने प्रमाणिकता के साथ रखा।
खुशवंत सिंह द्वारा लिखित ‘ए हिस्ट्री ऑफ द सिख्स’ को आज भी इस विषय पर सबसे व्यापक और आधिकारिक पुस्तक माना जाता है। दो खंडों में विभाजित यह कृति गुरु नानक देव जी (1469) से लेकर महाराजा रणजीत सिंह और उसके बाद के कालखंड का विस्तृत विवरण देती है। उन्होंने इस पुस्तक के लिए फारसी, गुरमुखी और अंग्रेजी के मूल दस्तावेजों का गहन शोध किया।
रिपोर्ट के अनुसार, उनकी लेखन शैली ऐसी थी कि एक आम पाठक भी सिख धर्म के जटिल सामाजिक और राजनीतिक पहलुओं को आसानी से समझ सकता था। उन्होंने गुरु नानक देव जी के ‘सत्य’ के सिद्धांत और ‘लंगर’ के माध्यम से जाति प्रथा को तोड़ने के प्रयासों को प्रमुखता से रेखांकित किया।
पत्रकारिता के क्षेत्र में खुशवंत सिंह का सबसे बड़ा योगदान ‘द इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया’ का संपादन माना जाता है। 1969 से 1978 के बीच उनके नेतृत्व में इस पत्रिका का प्रसार 65,000 से बढ़कर 4 लाख तक पहुंच गया था। उन्होंने ‘फर्स्ट पर्सन’ पत्रकारिता का चलन शुरू किया और एम.जे. अकबर जैसे कई दिग्गज पत्रकारों को निखारा। उनका साप्ताहिक कॉलम ‘विथ मैलिस टुवर्ड्स वन एंड ऑल’ देश के सबसे लोकप्रिय कॉलमों में से एक था।
खुशवंत सिंह ने राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई और 1980-86 तक राज्यसभा के सदस्य रहे। हालांकि, उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उन्होंने 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पर हुई सैन्य कार्रवाई (ऑपरेशन ब्लू स्टार) के विरोध में अपना पद्म भूषण सम्मान लौटा दिया। यह उनके अपने धर्म और सिद्धांतों के प्रति अटूट निष्ठा का प्रमाण था।
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99 वर्ष की आयु में 20 मार्च 2014 को दुनिया को अलविदा कहने वाले खुशवंत सिंह अपनी सादगी और अनुशासन के लिए जाने जाते थे। दिल्ली के सुजान सिंह पार्क स्थित अपने घर में वे अक्सर लेखकों और प्रशंसकों से मिलते थे। उन्होंने अपनी वसीयत में अपनी राख को पाकिस्तान स्थित अपने पैतृक गांव में बिखेरने की इच्छा जताई थी जिसे पूरा किया गया। वे एक घोषित अज्ञेयवादी थे, लेकिन सिख धर्म के सांस्कृतिक मूल्यों से हमेशा जुड़े रहे।
Ans: उनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियों में 'ट्रेन टू पाकिस्तान' (उपन्यास) और 'ए हिस्ट्री ऑफ द सिख्स' (इतिहास) शामिल हैं।
Ans: 1984 में स्वर्ण मंदिर में भारतीय सेना के प्रवेश (ऑपरेशन ब्लू स्टार) के विरोध में उन्होंने अपना सम्मान लौटा दिया था।
Ans: उनका जन्म 2 फरवरी 1915 को पंजाब के हदाली (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था।






