
कवि प्रदीप-लता मंगेशकर (डिजाइन फोटो )
नई दिल्ली: यूं तो देश भक्ति (Patriotism) के सैकड़ों गाने देश का बच्चा-बच्चा गुनगुनाता है लेकिन इन गानों की पंक्तियों को लिखने वाले किसी कवि का एहसास हम जानते भी हैं? ज्यादातर देशभक्ति की पुरानी कविताओं को ऐसे समय में लिखा गया है जब देश आजादी के लिए संघर्ष कर रहा था ऐसे में लोगों और जवानों के बीच प्रेरणा, ऊर्जा और ताकत भरने काम कवियों ने अपनी रचनाओं से किया। ऐसे ही मुश्किल समय में अपनी अनेक रचनाओं से देश के लोगों को प्रेरित करने वाले महान ‘कवि प्रदीप का आज जन्मदिन (Kavi Pradeep Birth Anniversary) है।
कवि प्रदीप को आप किसी एक गीत या एक रचना के फ्रेम में फिट करके उनके व्यक्तित्व और कृतित्व का आकलन नहीं कर सकते। यह वो गीतकार, गायक और कवि था जिसने जो रचा वो कालजयी हो गया। उनकी लगभग तमाम रचनाएं समय और देशकाल की सीमाओं को तोड़कर इस ब्रह्माण्ड में अमर हो गईं। प्रदीप की रचनाओं में देशभक्ति उछाल मारती है तो प्रेम में समर्पण दिखलाई देता है। यहां टूटते रिश्ते और बिगड़ते माहौल का भी दर्द छलकता है।
दादा साहब फाल्के पुरस्कार और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित, साधारण व्यक्तित्व, लेकिन ओजस्वी लेखन के धनी कवि प्रदीप का आज जन्मदिन है। तो आइए उनके जन्मदिन पर आपको याद दिलाते हैं कुछ ऐसे देशभक्ति के गाने जिन्हें आप सुनते तो हैं लेकिन ये नहीं जानते की इसे लिखा भी कवी प्रदीप ने ही है।
‘ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में भर लो पानी’ इस गीत की ये पंक्तियां हकीकत में लोगों के दिलों में ऊर्जा और आंखों में शहीदों और उनके बलिदान का आंसू बिखेर देती है। ऐसे ही इस गीत से जुड़ा वाकया मशहूर है की इसे गाते हुए लता मंगेशकर रो पड़ी थीं। साठ के दशक में जब चीन ने भारत पर हमला कर दिया था, देश एक प्रकार से अघोषित युद्ध से जूझ रहा था। सीमा पर हमारे सैनिक शहीद हो रहे थे। तब उनकी याद में लता मंगेशकर ने गाया था।
मौका था 26 जनवरी, 1963 का दिन। चीन के साथ युद्ध में मिली हार के बाद देश के सैनिकों और नौजवानों में फिर से उत्साह का संचार करने के लिए गणतंत्र दिवस के अवसर पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मुंबई में एक कार्यक्रम आयोजित किया था। इस कार्यक्रम के लिए उन्होंने कवि प्रदीप को एक गीत लिखने के लिए कहा। इस कार्यक्रम के लिए प्रदीप ने लिखा था- ‘ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी’। बताया जाता है कि इस गीत को गाते हुए खुद लता मंगेशकर रो पड़ी थीं। इस गीत की बदौलत कवि प्रदीप को ‘राष्ट्रकवि’ की उपाधि से सम्मानित भी किया गया था।
‘आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की’ यह संगीत देश के हर बच्चे के बीच लोकप्रिय है पर है की इस संगीत की प्यारी-प्यारी पंक्तियां कवि प्रदीप ने ही लिखी थीं?
आजादी के बाद 1954 में आई फिल्म जागृति में कवि प्रदीप ने इस गीत के माध्यम से ना केवल पूरे हिंदुस्तान की सैर करवाई है, बल्कि किस-किस जगह पर किन-किन वीरों ने अंग्रेजों को टक्कर दी, इसका भी उल्लेख किया है।
इस संगीत में कवि प्रदीप ने महात्मा गांधी के व्यक्तित्व का वर्णन किया है. इस गीत को पाकिस्तान ने भी अपने शब्दों में इस्तेमाल किया है।
पाकिस्तान ने इस गीत में साबरमती के संत की जगह कायदे आजम जिन्ना के नाम का इस्तेमाल किया गया। इसके बोल इस प्रकार हैं- ‘यूं दी हमें आज़ादी कि दुनिया हुई हैरान, ऐ क़ायदे आज़म तेरा एहसान है एहसान।’
‘चल चल रे नौजवान’
कवि प्रदीप का यह गीत ‘चल चल रे नौजवान’ आजादी की लड़ाई में नौजवानों में ऊर्जा का संचार करने का काम करता था। यह गीत 1940 में आई फिल्म ‘बंधन’ के लिए कवि प्रदीप ने लिखा था। उस समय आजादी की लड़ाई भी चरम पर थी।
‘चल चल रे नौजवान’ गीत आजादी के मतवालों में नया जोश भरने का काम करता था। आलम ये था कि प्रभात फेरियों में यह गीत गाया जाने लगा। सिंध और पंजाब की विधान सभाओं में यह गीत गाया जाने लगा। बलराज साहनी ने इस गीत को बीबीसी लंदन से प्रसारित करवाने का काम किया। यह गीत 1946 के ‘नासिक विद्रोह’ के दौरान सैनिकों का अभियान गीत बन गया था। ।
कवि प्रदीप द्वारा लिखे गए इस गाने को साल 1954 में रिलीज हुई फिल्म ‘जागृति’ में आशा भोंसले ने गाया है।
कवि प्रदीप द्वारा लिखे गए इस गाने को साल 1943 में रिलीज हुई फिल्म ‘किस्मत’ में अमीरबाई कर्नाटकी और खान मस्ताना ने गाया है।
कवि प्रदीप द्वारा लिखे गए इस गाने को साल 1959 में रिलीज हुई फिल्म ‘पैगाम’ में गायक मन्ना डे ने गाया है।






