शृंगेरी सीट पर बड़ा उलटफेर: 3 साल बाद हुई री-काउंटिंग में BJP 56 वोट से आगे, कांग्रेस विधायक की कुर्सी पर संकट
Karnataka की शृंगेरी विधानसभा सीट पर हाई कोर्ट के आदेश के बाद हुई पोस्टल बैलेट की री-काउंटिंग ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी। भाजपा उम्मीदवार ने बढ़त का दावा किया तो कांग्रेस ने इसे साजिश बताया।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
भाजपा कार्यकर्ताओं ने आईडीएसजी कॉलेज में विरोध प्रदर्शन किया, फोटो- सोशल मीडिया
Sringeri Recounting Latest Update: कर्नाटक की शृंगेरी विधानसभा सीट पर चुनाव के तीन साल बाद हुए एक बड़े घटनाक्रम में सियासी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। हाई कोर्ट के निर्देश पर कराई गई पोस्टल बैलेट की री-काउंटिंग के बाद भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार डी.एन. जीवाराज ने मौजूदा कांग्रेस विधायक टी.डी. राजेगौड़ा पर 56 वोटों की बढ़त हासिल करने का दावा किया है। इस परिणाम ने राज्य में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है, जहाँ भाजपा इसे सत्य की जीत बता रही है, वहीं सत्ताधारी कांग्रेस इसे एक सुनियोजित अपराध मान रही है।
हाई कोर्ट के हस्तक्षेप से शुरू हुई री-काउंटिंग
इस पूरे विवाद की जड़ें पिछले विधानसभा चुनाव में छिपी हैं, जहां कांग्रेस के टी.डी. राजेगौड़ा ने मात्र 201 मतों के मामूली अंतर से जीत दर्ज की थी। भाजपा नेता जीवाराज ने इस परिणाम को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका आरोप था कि लगभग 300 पोस्टल बैलेट को अधिकारियों ने गलत तरीके से खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट के जस्टिस आर नटराज ने याचिका पर सुनवाई करते हुए रिटर्निंग ऑफिसर को निर्देश दिया कि खारिज किए गए 279 पोस्टल बैलेट की दोबारा जांच की जाए और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से संपन्न किया जाए।
आंकड़ों का खेल: कैसे बदली वोटों की गणित
अदालत के आदेशानुसार, चुनाव अधिकारियों ने शृंगेरी सीट पर पड़े कुल 1,822 पोस्टल बैलेट की जांच की। इस प्रक्रिया में 1,543 वोटों की री-काउंटिंग की गई, जिसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। गणना के बाद कांग्रेस उम्मीदवार टी.डी. राजेगौड़ा के वोट 569 से घटकर केवल 314 रह गए, जो कि 255 वोटों की भारी गिरावट है। वहीं, भाजपा के जीवाराज के वोट 692 से मामूली रूप से घटकर 690 रह गए। इस तरह भाजपा प्रत्याशी ने 56 वोटों की निर्णायक बढ़त बना ली है।
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कांग्रेस का कड़ा विरोध और साजिश का आरोप
इस नए परिणाम पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने इसे ‘सिस्टमैटिक क्राइम’ और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ एक बड़ी साजिश करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बैलेट बॉक्स खोलने से लेकर हस्ताक्षरों के सत्यापन तक की पूरी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं बरती गई हैं। कांग्रेस नेता सुधीर कुमार मुरली ने चिक्कमगलूर टाउन पुलिस स्टेशन में इस मामले को लेकर जीवाराज और तत्कालीन चुनाव अधिकारी के खिलाफ वोटों में हेरफेर की शिकायत भी दर्ज कराई है।
भाजपा ने बताया लोकतंत्र की जीत
दूसरी तरफ, भाजपा खेमे में उत्साह का माहौल है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र और वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया है। उनका कहना है कि यह री-काउंटिंग कांग्रेस के ‘काले चेहरे’ को उजागर करती है और जीवाराज को अब जनता का स्पष्ट जनादेश मिल चुका है। जीवाराज ने स्वयं कहा कि उन्होंने तीन वर्षों तक इसके लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है और अब सच सबके सामने है।
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अब निर्वाचन आयोग के पाले में है गेंद हालांकि भाजपा जीत का दावा कर रही है, लेकिन आधिकारिक तौर पर नतीजे की घोषणा अभी नहीं की गई है। चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि हाई कोर्ट का निर्देश केवल री-काउंटिंग करने और उसकी रिपोर्ट निर्वाचन आयोग को सौंपने का था। अब इस पूरे विवाद का अंतिम फैसला निर्वाचन आयोग के हाथ में है। अब चुनाव आयोग रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद ही यह तय करेगा कि क्या विधायक की सदस्यता को लेकर कोई नया नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा या मामला दोबारा अदालत की दहलीज पर जाएगा।
