नवभारत निशानेबाज: परीक्षा हॉल में ब्राह्मण छात्रों को जनेऊ की अनुमति नहीं, आखिर यह रवैया कितना सही!
Navabharat Nishanebaaz: बेंगलुरु के कृपानिधि कॉलेज में CET परीक्षा के दौरान अधिकारियों द्वारा ब्राह्मण छात्रों के जनेऊ उतरवाने पर विवाद छिड़ गया है। धार्मिक आस्था और परीक्षा नियमों के बीच बहस तेज।
- Written By: आकाश मसने
(डिजाइन फोटो)
Bengaluru CET Controversy: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, बेंगलुरु के कृपानिधि कॉलेज में सीईटी परीक्षा के दौरान वहां के अधिकारियों ने 5 ब्राह्मण छात्रों के जनेऊ उतरवा लिए। क्या किसी की धार्मिक-सांस्कृतिक आस्था को इस तरह आघात पहुंचाया जाना चाहिए?’
हमने कहा, ‘परीक्षा किसी युद्ध से कम नहीं होती। जनेऊ पहनकर रणसंग्राम में नहीं जाते। यह पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान तक ठीक है। मिलिट्री ट्रेनिंग में भी जनेऊ नहीं चलता।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, जनेऊ का मुद्दा परंपरा और वैदिक आस्था से जुड़ा हुआ है। शास्त्रों में ब्राह्मण, क्षत्रिय व वैश्य को जनेऊ पहनने का अधिकार दिया गया है। जब बच्चा 5 वर्ष की आयु में गुरुकुल पढ़ने जाता था तो उसका उपनयन संस्कार कर जनेऊ पहनाया जाता था और गुरु उसके कान में गायत्री मंत्र फूंकता था। उसे संध्यावंदन करना सिखाया जाता था और 25 वर्ष की आयु तक ब्रम्हचर्य का पालन करने को कहा जाता था।’
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हमने कहा, ‘समय बदल गया है। अब बच्चे गुरुकुल में नहीं, कॉन्वेंट में जाते हैं और इंग्लिश मीडियम से पढ़ते हैं। खानपान भी बिगड़ गया है। जनेऊधारी भी होटल में जूता पहनकर खाना खाते हैं। प्रतिदिन गायत्री मंत्र जपने की उन्हें फुरसत नहीं है। श्मशान से लौटकर आने के बाद जनेऊ बदलना भूल जाते हैं। टॉयलेट जाते समय कान पर जनेऊ नहीं चढ़ाते। टूटा जनेऊ नहीं बदलते। बताइए, ऐसे में यज्ञोपवीत की शुद्धता कैसे रहेगी? जनेऊ पहनना शौक या दिखावे की चीज नहीं है। जनेऊ के 3 धागे या सूत्र सत्य, शील व सदाचरण के प्रतीक हैं। बात-बात पर झूठ बोलना, दुश्चरित्र होना और भ्रष्टाचार, चोरी या दुराचार करना है तो जनेऊ बिल्कुल नहीं पहनना चाहिए।’
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पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, परीक्षा केंद्र के अधिकारियों का कहना था कि छात्र जनेऊ के धागे से खुद को नुकसान पहुंचा सकता है। कहीं पेपर बिगड़ने पर गले में फांसी न लगा ले!’
हमने कहा, ‘यह बेवकूफी की बात है। फांसी रस्सी से लगती है। कच्चे धागे से बने जनेऊ से नहीं! वैसे छात्र चाहें तो परीक्षा केंद्र में जनेऊ उत्तरवाए जाने के बाद घर लौटकर स्नान ध्यान कर नया जनेऊ धारण कर सकते हैं। हिंदू धर्म में कर्मबंधन से मुक्त होने के लिए संन्यासी को शिखा (चोटी) और सूत्र (जनेऊ) त्याग देना पड़ता है।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
