विपक्षी राज्यों से भेदभाव पर जस्टिस नागरत्ना सख्त? बोलीं- पार्टी देखकर नहीं, संविधान देखकर चलेगा देश

Justice BV Nagarathna की केंद्र को दो-टूक: राज्य 'अधीनस्थ' नहीं, 'समकक्ष' हैं। संघीय ढांचा दलगत राजनीति से ऊपर है। 7 अप्रैल से शबरिमला मामले पर 9 जजों की पीठ करेगी सुनवाई।
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जस्टिस नागरत्ना (Image- Social media)
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Justice BV Nagarathna on Center-State Relations: सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.वी. नागरत्ना(Justice BV Nagarathna) ने शनिवार को केंद्र-राज्य संबंधों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि संघीय ढांचा संविधान पर आधारित होता है, न कि इस आधार पर कि केंद्र और राज्यों में किस राजनीतिक दल की सरकार है। पटना में आयोजित प्रथम डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्मृति व्याख्यान में उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र को राज्यों को 'अधीनस्थ' नहीं, बल्कि 'समकक्ष इकाइयों' के रूप में देखना चाहिए।

चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में 'कॉन्स्टिट्यूशनलिज्म बियॉन्ड राइट्स: व्हाई स्ट्रक्चर मैटर्स' विषय पर बोलते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि राज्य सरकारें संविधान में निर्धारित सीमाओं के भीतर स्वतंत्र हैं और वे केंद्र के अधीन नहीं हैं। इसलिए सत्ता में मौजूद राजनीतिक दलों के आधार पर उनके साथ अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता।

केंद्र-राज्य संबंध दलगत राजनीति नहीं

जस्टिस नागरत्ना(Justice BV Nagarathna) ने कहा कि राज्यों को अधीनस्थ नहीं, बल्कि समकक्ष इकाइयों के रूप में देखा जाना चाहिए और किसी राज्य के नागरिकों से विकास और शासन में भेदभाव नहीं किया जा सकता।

प्रशासनिक फैसलों में भेदभाव नहीं हो सकता

उन्होंने आगे कहा कि केंद्र-राज्य संबंध संवैधानिक शासन के दायरे में आते हैं और इनमें दलगत मतभेद या वैचारिक असहमति को अलग रखा जाना चाहिए। किसी भी राज्य के नागरिकों के साथ विकास योजनाओं या प्रशासनिक फैसलों में भेदभाव करना संघीय व्यवस्था की भावना के खिलाफ है।

राजनीतिक शक्ति किसी एक केंद्र में केंद्रित नहीं हो सकती

जस्टिस नागरत्ना(Justice BV Nagarathna) ने संविधान में शक्तियों के बंटवारे का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीतिक शक्ति किसी एक केंद्र में केंद्रित नहीं हो सकती। संघीय ढांचा केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों का संतुलन बनाता है, जिससे जवाबदेही और संवेदनशील शासन सुनिश्चित होता है।

शबरिमला मंदिर मामले में संविधान पीठ करेगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट की नौ-सदस्यीय संविधान पीठ सात अप्रैल से शबरिमला मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों में महिलाओं के साथ भेदभाव से संबंधित याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई करेगी।सुप्रीम कोर्ट की 7 अप्रैल की वाद सूची के अनुसार, इस नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ में शामिल होंगे: CJI सूर्यकांत, न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना, न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश, न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले, न्यायमूर्ति आर. महादेवन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची।

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