भारत-न्यूजीलैंड FTA: कीवी और वाइन होंगे सस्ते, किसानों के लिए डेयरी और दालों पर मोदी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

India-New Zealand Deal: भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता गेम चेंजर साबित होगा। 5,000 भारतीय पेशेवरों को हर साल अस्थायी वीजा, छात्रों को काम की आजादी और 5 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य रखा गया है।
India-New Zealand FTA Deal
भारत-न्यूजीलैंड के बीच आज मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होंगे(कांसेप्ट फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया)
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India-New Zealand FTA Deal: भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए हालिया मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को एक नई दिशा प्रदान की है। यह समझौता न केवल व्यापार के आंकड़ों को बढ़ाने का एक जरिया है, बल्कि यह पेशेवरों, छात्रों और उद्योगों के लिए संभावनाओं के नए द्वार भी खोलता है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का व्यापार लगभग 1.3 अरब डॉलर रहा था, जिसे अब अगले पांच वर्षों में 5 अरब डॉलर तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।

पेशेवरों के लिए अवसरों की नई राह खुली

इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू भारतीय पेशेवरों के लिए 'अस्थायी वीजा' का प्रावधान है। अब हर साल 5,000 भारतीय पेशेवर न्यूजीलैंड जाकर काम कर सकेंगे। यह विशेष रूप से आईटी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, निर्माण, योग और शेफ जैसे क्षेत्रों से जुड़े युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है। इस कदम से न केवल भारत की 'स्किल पावर' को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी, बल्कि न्यूजीलैंड की श्रम शक्ति की जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।

भारतीय छात्रों के लिए बड़ी राहत की खबर

समझौते के तहत भारतीय छात्रों के लिए नियमों को काफी सरल बनाया गया है। अब छात्रों के लिए वीजा कोटा प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है, जिसका सीधा मतलब है कि अधिक संख्या में भारतीय छात्र न्यूजीलैंड के शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश ले सकेंगे। इसके अलावा, छात्रों को पढ़ाई के दौरान हर हफ्ते कम से कम 20 घंटे काम करने की अनुमति दी गई है। यह प्रावधान भारतीय छात्रों को पढ़ाई के दौरान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद करेगा और उनके विदेश में रहने के खर्च को कम करेगा।

व्यापार का 'गिव एंड टेक' संतुलन

मुक्त व्यापार समझौते का अर्थ अक्सर बाजार खोलना होता है, लेकिन भारत ने अपने घरेलू हितों की रक्षा करते हुए इसे बहुत सावधानी से लागू किया है। न्यूजीलैंड के 95 प्रतिशत निर्यात उत्पादों पर भारत ने शुल्क कम या समाप्त किया है, जिससे ऊन, लकड़ी, वाइन, कीवी, सेब, चेरी, एवोकाडो और मणुका शहद जैसे उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते होंगे। हालांकि, भारत ने अपने किसानों की आजीविका की रक्षा के लिए डेयरी, चीनी, प्याज, दाल, मसाले, खाद्य तेल और रबर जैसे संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को इस समझौते के दायरे से बाहर रखा है या उन पर कोई विशेष रियायत नहीं दी है। कीवी और सेब जैसे कुछ चुनिंदा फलों पर भी सीमित कोटा के तहत ही टैरिफ में राहत दी गई है, ताकि स्थानीय उत्पादकों को कोई बड़ा नुकसान न हो।

आयुष और योग का वैश्विक विस्तार करने की पहल

इस समझौते के एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू में भारत ने अपनी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों आयुष और योग को विशेष स्थान दिलाया है। इसके तहत भारतीय पारंपरिक चिकित्सा और उससे जुड़ी दवाओं को न्यूजीलैंड के बाजार में आधिकारिक तौर पर मान्यता और पहुंच मिलेगी। यह न केवल भारतीय फार्मास्युटिकल और वेलनेस कंपनियों के लिए व्यापार के नए अवसर पैदा करेगा, बल्कि 'सॉफ्ट पावर' के रूप में भारतीय संस्कृति का प्रसार भी करेगा।

दीर्घकालिक निवेश को लेकर बनी रणनीति

अनुमान है कि इस समझौते के बाद अगले 15 वर्षों के भीतर भारत में लगभग 20 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आएगा। यह निवेश न केवल बुनियादी ढांचे में सुधार करेगा, बल्कि तकनीक और गुणवत्ता मानकों को भी वैश्विक स्तर पर लाने में मदद करेगा। सरकार का मानना है कि यह समझौता वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय निर्यातकों के लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद बाजार प्रदान करेगा।

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी 'मार्केट डायवर्सिफिकेशन' (बाजार विविधीकरण) नीति के तहत ऑस्ट्रेलिया, यूएई, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ भी कई समझौते किए हैं। न्यूजीलैंड के साथ यह समझौता उसी रणनीति का एक विस्तार है। यह न केवल द्विपक्षीय व्यापार को गति देगा, बल्कि भारत को दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में और अधिक मजबूती से स्थापित करेगा।

एक समावेशी भविष्य की ओर देख रहे दोनों देश

इस तरह से देखा जाए तो भारत और न्यूजीलैंड के बीच यह व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए 'विन-विन' स्थिति है। जहाँ एक ओर भारत ने अपने कृषि और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की है, वहीं दूसरी ओर युवाओं के लिए रोजगार और शिक्षा के अवसर बढ़ाकर भविष्य की नींव भी मजबूत की है। यह समझौता केवल डॉलर के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दो देशों के बीच विश्वास, सहयोग और साझा विकास का एक रोडमैप है। आने वाले समय में, यह देखना दिलचस्प होगा कि यह समझौता किस प्रकार भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में भागीदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाता है।

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