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Explainer: अगर भारत ने रोक दी सप्लाई तो नेपाल में आ जाएगा भूचाल! फिर बालेंद्र शाह ने क्यों की भंसार वाली गलती?
- Written By: अक्षय साहू
India-Nepal Relations: नेपाल की नई बालेंद्र शाह सरकार द्वारा भारतीय सामानों पर 'भंसार' (कस्टम टैक्स) लगाने से दोनों देशों के रोटी-बेटी के रिश्तों और व्यापारिक निर्भरता पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

भारत और नेपाल के बीच भंसार टैक्स को लेकर विवाद (सोर्स- सोशल मीडिया)
India Nepal Bhansar Tax Row: भारत और नेपाल सिर्फ दो पड़ोसी देश नहीं हैं। दोनोंं के इतिहास, संस्कृति, व्यापार और रोजमर्रा की जिंदगी इतनी मिलती जुलती है कि अगर किसी को मैप में ने दिखाया जाए तो यह पहचान करना मुश्किल है कि कौन सा हिस्सा भारत है और कौन सा नेपाल। इसके अलावा भारत और नेपाल में रोटी-बेटी का नाता भी है। लेकिन हाल के दिनों में नेपाल का नई बालेंद्र शाह सरकार के कुछ प्रशासनिक फैसलों, खासकर ‘भंसार’ यानी कस्टम टैक्स को लेकर उठे विवादों ने दोनों देशों के रिश्तों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नेपाल द्वारा भारतीय सामानों और वाहनों पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने से एक ओर जहां दोनों देशों के रिश्तों में खटास आई है। वहीं दूसरी ओर इस बात को लेकर भी बहस तेज हो गई है कि आखिर नेपाल ने यह कदम क्यों उठाया? नेपाल भारत पर कितना निर्भर है? बालेंद्र शाह सरकार के ऐसे फैसलों का क्या असर पड़ेगा?
भारत पर कितना निर्भर है नेपाल?
नेपाल एक लैंडलॉक देश है, यानी उसके पास समुद्र तक सीधी पहुंच नहीं है। नेपाल अपनी लगभग हर बड़ी जरूरत के लिए भारत पर निर्भर है, गाड़ियां चलने के लिए पेट्रोल-डीजल से लेकर दवाइयों, अनाज और रोजमर्रा में उपयोद होने वाली हर चीज भारत के रास्ते ही नेपाल पहुंचती है। सच कहा जाए तो नेपाल के बाजार भारतीय सप्लाई चेन पर टिका हुआ है। इसके चलते ही भारत और नेपाल के आर्थिक रिश्ते को नेपाल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।
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भारत से कई जरूरी चीजों का व्यापार करता है नेपाल (AI जनरेटेड फोटो)
व्यापारिक आंकड़ों को देखा जाए तो नेपाल के कुल विदेशी व्यापार का सबसे बड़ा हिस्सा भारत के साथ होता है। नेपाली वित्तीय वर्ष 2023-24 के मुताबिक, नेपाल के कुल व्यापार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 63 प्रतिशत रही। इसके अलावा नेपाल जो भी सामान दुनिया को निर्यात करता है, उसका एक बड़ा हिस्सा भारत ही खरीदता है। भारतीय बाजारों में नेपाल की इलायची, जूट, प्लाईवुड, खाने का तेल, जूस और रोल्ड आयरन शीट जैसी वस्तुएं बड़े पैमाने पर बिकती हैं। नेपाल की कमाई का बड़ा हिस्सा भारत से आता है।
भारत नेपाल में क्या-क्या निर्यात करता है?
भारत से नेपाल जाने वाले सामानों की बात करें तो इसमें सभी जरूरी चीजें शामिल है। भारत नेपाल को खाद्यान्न, दवाइयां, पेट्रोलियम पदार्थ, वाहन, मशीनरी और निर्माण सामग्री के अलावा और भी कई चीजें निर्यात करता है। नेपाल भारत पर इतनी निर्भर है कि अगर किसी वजह से भारतीय सप्लाई धीमी पड़ जाए, तो इसका असर तुरंत ही नेपाल के बाजारों में दिखाई देने लगता है। भारत ने हाल ही में जह घरेलू जरूरतों के पूरा करने के लिए चीनी या कुछ खाद्यान्नों के निर्यात पर सीमित रोक लगाई थी, तो नेपाल में तुरंत महंगाई बढ़ गई थी और बाजारों में माहौल बिगड़ गए थे।
इसके अलावा नेपाल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से भारत पर निर्भर है। नेपाल के पास कोई बड़ी तेल रिफाइनरी नहीं है। उसकी लगभर पूरी पेट्रोलियम जरूरत भारत से पूरी होती है।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन के बीच समझौतों के जरिए पेट्रोल और डीजल की सप्लाई होती है। दोनों देशों ने मिलकर रक्सौल-अमलेखगंज पेट्रोलियम पाइपलाइन भी बनाई, जो दक्षिण एशिया की पहली सीमा-पार पाइपलाइन मानी जाती है। इस पाइपलाइन से नेपाल को हर महीने करोड़ों नेपाली रुपये की बचत होती है और ईंधन आपूर्ति भी तेज हुई है।
बिजली और जलविद्युत क्षेत्र में नेपाल की सहायता
बिजली और जलविद्युत क्षेत्र में भी भारत नेपाल का सबसे बड़ा सहयोगी और साझेदार है। नेपाल के पास एक बड़ा जल संसाधन है, लेकिन उसके पास बिजली उत्पादन के लिए जरूरी तकनीक और धन नहीं है। भारत की कई सरकारी और निजी कंपनियां नेपाल में बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं। भारत की सरकारी कंपनी सतलुज जल विद्युत निगम (SJVN) द्वारा विकसित अरुण-3 परियोजना, जीएमआर का अपर कर्णाली प्रोजेक्ट और एनएचपीसी का वेस्ट सेती प्रोजेक्ट इसके उदाहरण हैं। इनसे नेपाल भविष्य में न सिर्फ बिजली उत्पादन के क्षेत्र में खुद को आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि भारत को बिजली बेचकर राजस्व भी कमा सकता है।
भारत नेपाल की मदद सिर्फ व्यापार और ऊर्जा में ही नहीं, बल्कि विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी करता है। कई भारतीय वैज्ञानिक संस्थाएं और नेपाल की रिसर्च एजेंसियां मिलकर शोध परियोजनाओं पर काम कर रही हैं। इसके अलावा अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी भारत नेपाल की मदद कर रहा है। नेपाल के सैटेलाइट प्रजेक्ट में भारतीय अंतरिक्ष एजेंसियों की भागीदारी दोनों देशों के तकनीकी सहयोग को दिखाती है।
क्या है 1950 भारत-नेपाल शांति?
1950 में भारत और नेपाल के बीच शांति और मैत्री समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत नेपाली नागरिकों को भारत में रहने, काम करने, व्यापार करने, संपत्ति खरीदने जैसी कई जरूरी अधिकार मिले हुए हैं। नेपाल को लाखों लोग सालों से भारत में रहकर रोजगार कर रहे हैं और यहां से भेजा गया पैसा नेपाल की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहा है। इसके अलावा व्यापार और ट्रांजिट संधियों के जरिए भारत नेपाल को अपना बंदरगाहों और सड़कों का इस्तेमाल करने के बदले कोई शुल्क नहीं लेगा है।
भंसार से नेपाल को कितना फायदा-नुकसान
ऐसे में जब नेपाल की ओर से भारतीय सामानों या व्यापारियों पर अतिरिक्त ‘भंसार’ नियम लागू किया गया तो इसने एक नए विवाद को जन्म देने का काम किया। आलोचक मानते हैं कि, नेपाल जिस प्रकार से भारत ने निर्भर है भंसार कर से उसका ही नुकसान अधिक होगा। हालांकि दूसरी ओर नेपाल में कई लोग इसे अपनी संप्रभुता और राजस्व बढ़ाने से जोड़कर देखते हैं।
यह भी पढ़ें- Explainer: क्या है DME तकनीक? जिससे भारत में खत्म हो जाएगी LPG की समस्या, साथ ही होगा अरबों का मुनाफा
भारत और नेपाल के रिश्ते सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं हैं। यह रिश्ता संस्कृति, धर्म, परिवार और साझा इतिहास से जुड़ा हुआ है। इसलिए किसी भी छोटे प्रशासनिक फैसले को ऐसा रूप नहीं देना चाहिए, जिससे दोनों देशों के बीच अविश्वास बढ़े। नेपाल को यह समझना होगा कि भारत उसके लिए सिर्फ पड़ोसी देश नहीं, बल्कि सबसे बड़ा आर्थिक और रणनीतिक सहयोगी है। वहीं भारत को भी नेपाल की संवेदनशीलताओं और उसकी आंतरिक राजनीति को समझते हुए रिश्तों को संतुलित बनाए रखना होगा।
India nepal bilateral cooperation in trade energy tech amid bhansar tax row
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