दुनिया में ईंधन की कीमतों में आग, भारत में 3 रुपये की वृद्धि, जानें ग्लोबल आंकड़ों के मुकाबले कहां खड़ा है देश
Global Fuel Crisis 2026: आज यानी 15 मई को भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई, जो पिछले चार साल में पहली बढ़ोत्तरी है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
प्रतीकात्मक फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
Petrol Diesel Price Hike: आज यानी 15 मई को भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई, जो पिछले चार साल में पहली बढ़ोत्तरी है। वैश्विक स्तर पर ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट के कारण ईंधन की कीमतों में आए भारी उछाल के मुकाबले भारत में यह बढ़ोतरी सबसे कम है।
ईरान युद्ध के कारण वैश्विक तेल सप्लाई सीरीज, खास तौर से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में आए व्यवधान ने पूरी दुनिया में ईंधन की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। जहां कई विकसित देशों ने इस बोझ को तुरंत जनता पर डाल दिया, वहीं भारत ने एक अलग रणनीति अपनाई है।
वैश्विक आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत में हुई 3 की वृद्धि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम है। तुलनात्मक रूप से यूएई में ईंधन की कीमतों में 52% का भारी इजाफा हुआ है। अमेरिका में कीमतें 44% तक बढ़ गई हैं। दुनिया के लगभग 82 देशों ने अब तक ईंधन की राशनिंग या इमरजेंसी बैन लागू कर दिए हैं, जबकि भारत ने अबतक ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है।
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76 दिनों तक भारत ने सहा 1000 करोड़ का रोजाना घाटा
जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल को पार कर गई थीं, तब भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने लगातार 76 दिनों तक कीमतें स्थिर रखीं। इस दौरान तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा और अंडर-रिकवरी का आंकड़ा 1,000 करोड़ प्रतिदिन तक पहुंच गया। यदि सरकार वैश्विक कीमतों का पूरा बोझ जनता पर डालती, तो भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम 200-300% तक बढ़ सकते थे, जिससे सबसे गरीब आबादी बुरी तरह प्रभावित होती।
विदेशी मुद्रा पर ‘ट्विन ड्रेन’ का खतरा
भारत अपनी जरूरत का 80-85% कच्चा तेल आयात करता है और कच्चे तेल की कीमत में हर $10 की बढ़ोतरी से आयात बिल में $13-14 बिलियन का इजाफा होता है। भारत का वार्षिक तेल आयात बिल 12-15 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इसके साथ ही सोने का आयात भी 6 लाख करोड़ ($72 बिलियन) तक पहुंच गया है। तेल और सोना मिलकर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव डाल रहे हैं, जिसे अधिकारी “मैसिव ट्विन ड्रेन” कह रहे हैं।
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‘स्वैच्छिक बचत’ अपनाएं नागरिक: पीएम मोदी
संकट की इस स्थिति में सरकार ने राशनिंग या दंडात्मक नियंत्रण के बजाय नागरिकों से ‘स्वैच्छिक संयम’ बरतने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से तीन खास आग्रह किए हैं:
- ईंधन की खपत कम करें।
- कम से कम एक साल तक सोना खरीदने से बचें।
- गैर-जरूरी विदेश यात्राओं में कटौती करें।
अधिकारियों का मानना है कि केवल सोने के आयात को आधा करने से ही ‘करेंट अकाउंट डेफिसिट’ पर दबाव काफी कम हो सकता है। भारत सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि कीमतों में 3 रुपये की वृद्धि केवल एक छोटा सा ‘कॉस्ट सिग्नल’ है, जबकि सरकार और तेल कंपनियां अब भी पेट्रोल पर 26 रुपये और डीजल पर 82 रुपये प्रति लीटर का घाटा सह रही हैं।
