Explainer: भारत पर मंडरा रहा है आर्थिक संकट? PM मोदी को क्यों करनी पड़ी जनता से अपील, समझिए पूरा गणित

PM Modi Appeal: पीएम मोदी ने आर्थिक स्थिरता के लिए देशवासियों से सोना न खरीदने और विदेशी यात्रा टालने जैसी 7 अपील की हैं। जानिए कैसे आपकी छोटी सी बचत देश को बड़े Economic Crisis से बचा सकती है।
PM Narendra Modi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया)
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Indian Economic Crisis 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देश की आर्थिक स्थिति, बढ़ते आयात बिल, वैश्विक अस्थिरता और विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट को देखते हुए देशवासियों से सात बड़ी अपील की है। इसमें अगले एक साल तक सोना न खरीदना, विदेश यात्रा न करना, खाने के तेल की खपत को कम करना और केमिकल की जगह जैविक खाद के उपयोग जैसी बात कही गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि सरकार को अचानक ये अपील क्यों करनी पड़ रही है। क्या भारत पर कोई बड़ा आर्थिक संकट आने वाला है? और सरकार की अपील का आम जनता की जेब पर क्या असर पड़ने वाला है? आइए आपको सरकार की अपील की पीछे की वजह और इसके उद्देश्य के बारे में बताते हैं।

एक साल तक सोना न खरीदने की अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई अपील में सबसे ज्यादा चर्चा सोना न खरीदने के आग्रह को लेकर हो रही है। पीएम मोदी ने लोगों से सोने न खरीदने की अपील करते हुए कहा कि एक समय था जब संकट के समय में देशवासी अपना सोना चांदी दान करते थे। उन्होंने कहा कि आज देश के लोगों को दान करने की जरूरत नहीं है। वो  देशहित में अगले एक साल तक सोना न खरीदकर भी अपना योगदान दे सकते हैं।

अपील का कारण: भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में से एक है। भारत में कुछ सोने की खदानें हैं लेकिन देश अपनी जरूरत का लगभग 99 प्रतिशत सोना विदेशों से डॉलर के जरिए आयात करता है। साल 2025-26 में सोने के आयात पर लगभग 6.4 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए। रूस-यूक्रेन और ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। भारत में जनवरी 2026 में सोने की कीमत 2.5 लाख रुपये तक पहुंच गई थी।

PM Modi appeals to save economy
जरूरत का अधिकतर सोना विदेश आयात करता है भारत (AI जनरेडेट फोटो)

पीएम मोदी ने जिस समय जनता से अपील की उस समय भी सोने की कीमत 1.5 लाख रुपये के आसपास बनी हुई थी। ऐसे में अधिक सोना खरीदने का मतलब है कि देश को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ेंगे, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ेगा और रुपया कमजोर हो सकता है। सरकार का मानना है कि अगर लोग कुछ समय के लिए  सोना खरीदना कम कर दें, तो डॉलर की बचत होगी और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

देश को वर्क फ्रॉम होम मॉडल अपनाने की जरूरत

प्रधानमंत्री ने दूसरी बड़ी अपील ईंधन की बचत और वर्क फ्रॉम होम को लेकर की है। उन्होंने कहा कि, सरकार लंबे समय से कोशिश कर रही है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के असर के जनता को बचाए रखा जाए। इसके लिए सरकार लंबे समय से भारी घाटा भी उठा रही है। लोगों को जरूरत है कि वो ईंधन की बचत करें और ऑफिस की जगह वर्क फ्रॉम होम मॉडल को अपनाएं।

fuel consumption in india
भारत में ईंधन का आयात और खपत (AI जनरेडेट फोटो)

अपील का कारण: ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण पूरी दुनिया में ईंधन की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसके अलावा युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 70 प्रतिशत तेल आयात करता है। ऐसे में सरकार ने लोगों से निजी वाहनों की जगह मेट्रो, बस और अन्य सार्वजनिक परिवाहनों के उपयोग की सलाह दी है।

सरकार ने इसके अलावा कंपनियों और संस्थानों से अपील की है कि वो जहां संभव हो सके, वहां वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस और वर्चुअल मीटिंग्स जैसी चीजों को अपनाए। सरकार का तर्क है कि इस तरह पेट्रोल और डीजल की खपत कम होगी और तेल कंपनियों पर पड़ रहा आर्थिक दबाव भी कम घटेगा। मौजूदा हालात में भारतीय तेल कंपनियों को प्रतिदिन लगभग 2,400 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।

केमिकल की जगह जैविक खाद उपयोग को बढ़ावा

पीएम मोदी ने कृषि और उर्वरकों को लेकर तीसरी बड़ी अपील की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से दुनिया संकट से गुजर रही है। जब दुनियाभर में उर्वरकों की कीमत आसमान छू रही थी तब सरकार ने सब्सिडी देकर किसानों को उर्वरक सस्ती कीमतों पर उपलब्ध कराया। लेकिन अब समय आ गया है कि देश के किसान रासायनिक-युक्त उर्वरकों की जगह जैविक खाद का उपयोग करें।

अपील का कारण: उर्वरक को लेकर देश की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशी आयात पर निर्भर है। उदाहरण के तौर पर देश 100 प्रतिशत पोटाश और लगभग 90 प्रतिशत डीएपी आयात करता है। कच्चे तेल और गैस की कीमतें बढ़ने से उर्वरक उत्पादन और आयात दोनों महंगे हो गए हैं। इसके अलावा भारत जिन देशों से उर्वरक आयात करता है, उनमें यूक्रेन और रूस बड़े नाम हैं। जो पिछले लंबे वक्त से युद्ध लड़ रहे हैं, जिसके चलते उनकी उत्पादन क्षमता पर असर पड़ा है।

Agriculture and fertilizer consumption in India
कृषि उर्वरकों के लिए विदेशों पर निर्भर है भारत (AI जनरेडेट फोटो)

इसलिए पीएम मोदी ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों का उपयोग 25 से 50 प्रतिशत तक कम करने और प्राकृतिक खेती को अपनाने की अपील की है। सरकार कहना है कि इससे न केवल आयात बिल कम होगा, बल्कि सरकार को खाद सब्सिडी पर होने वाले भारी खर्च से भी राहत मिलेगी। वर्तमान में सरकार उर्वरक सब्सिडी पर लगभग 1.71 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रही है।

विदेशी यात्राओं से बचने की अपील

सरकार ने चौथी अपील विदेशी यात्राओं और भव्य शादियों को लेकर की है। पीएम मोदी ने देशवासियों से अपील की है कि वो डेस्टिनेशन वेडिंग और पर्यटन के लिए विदेश की देश को ही वरीयता दें।

Expenses on foreign travel and destination weddings in Indians
भारतीयों में बढ़ा विदेश यात्रा और डेस्टिनेशन वेडिंग का चलन (AI जनरेटेड फोटो)

अपील का कारण: पिछले कुछ समय से मिडिल क्लास के बीच डेस्टिनेशन वेडिंग और विदेशों में छुट्टियां मनाने का चलन तेजी से बढ़ा है। साल 2025-26 में भारतीय नागरिकों ने विदेश यात्रा और पर्यटन पर करीब 3.65 लाख करोड़ रुपये खर्च किए।  सरकार का मानना है कि अगर देश के लोग कुछ समय के लिए विदेश यात्राएं कम कर दें और भारत के भीतर ही पर्यटन को बढ़ावा दें, तो बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा बचाई जा सकती है।

खाने के तेल की खपत कम करना

प्रधानमंत्री मोदी की पांचवीं अपील खाद्य तेल की खपत कम करने को लेकर है। प्रधानमंत्री ने प्रत्येक परिवार से अपील की है कि वे खाने के तेल के उपयोग में कम से कम 10 प्रतिशत की कटौती करें। इसे उन्होंने केवल स्वास्थ्य से नहीं, बल्कि देशहित और आर्थिक जिम्मेदारी से भी जोड़ा है।

अपील का कारण: खाने के तेल की खपत को कम करने की अपील की सबसे बड़ी वजह उसके आयात से जुड़ी है। भारत अपनी जरूरत का करीब 60 से 65 प्रतिशत खाद्य तेल विदेशों से आयात करता है। इस पर हर साल लगभग 1.61 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यदि देशभर में तेल की खपत थोड़ी भी कम होती है, तो आयात बिल में बड़ी कमी लाई जा सकती है। इसके अलावा भारत खाने का तेल जैसे सूरजमुखी का तेल यूक्रेन और रूस से खरीदता है।

India's dependence on edible oil
खाने के तेल को लेकर भारत की निर्भरता (AI जनरेटेड फोटो)

युद्ध के चलते इन दोनों देशों में सूरजमुखी की खेती बुरी तरह से प्रभावित हुई है। जिससे खाने के तेल की कीमतें बढ़ी हैं। सरकार की अपील एक वजह ये भी है कि साफतौर नहीं कहा जा सकता है कि यूक्रेन और रूस में स्थिति कब सामान्य होगी? जिससे फिलहाल खाने के तेल की कीमतों में इजाफा देखने को मिल सकता है। सरकार ने इसी स्थिति से निपटने के लिए अपील की है।

विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट बड़ा कारण

सरकार की इन सभी अपीलों के पीछे सबसे बड़ा कारण विदेशी मुद्रा भंडार में आई गिरावट है। पिछले ढाई महीनों में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 37.8 बिलियन डॉलर घटकर 690.69 बिलियन डॉलर रह गया है। इसमें चार प्रमुख चीजों सोना, तेल, उर्वरक और खाद्य तेल के उपयोग में कमी की बात कही गई है, वे भारत के कुल आयात बिल का लगभग 31 प्रतिशत हिस्सा हैं। इन पर कुल मिलाकर लगभग 22 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यही कारण है कि सरकार चाहती है कि नागरिक खुद ही इन क्षेत्रों में बचत करें ताकि आर्थिक दबाव कम हो सके।

सोना खरीद रही है भारतीय रिजर्व बैंक

सरकार ने जहां एक तरफ आम जनता से सोना न खरीदने की अपील की है। वहींं भारतीय रिजर्व बैंक खुद लगातार सोना खरीद रही है। RBI के पास वर्तमान में  लगभग 880 टन सोना है। जानकारों का मानना है कि, वैश्विक अनिश्चितता और डॉलर पर घटती निर्भरता के कारण दुनिया के कई केंद्रीय बैंक सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में जमा कर रहे हैं। इसका मकसद आने वाले समय में किसी बड़े आर्थिक संकट की स्थिति में वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

किन परेशानियों का करना पड़ सकता है सामना

प्रधानमंत्री की ये अपीलें केवल अस्थायी बचत उपाय नहीं हैं, बल्कि आर्थिक अनुशासन और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सामूहिक प्रयास हैं। सरकार इसमें आम नागरिकों की भागीदारी चाहती है। समय रहते इन्हें नहीं अपनाया गया तो आने वाले वक्त में देश को महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। जिसका सीधा असर जनता पर पड़ना तय है।

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