- Hindi News »
- India »
- Dr Rajendra Prasad Death Anniversary 2026 First President Simple Life India
डॉ राजेंद्र प्रसाद पुण्यतिथि: मेधावी छात्र, सादगी की वह मिसाल जिन्होंने राष्ट्रपति रहते हुए ठुकराई आधी सैलरी
Dr. Rajendra Prasad Death Anniversary: प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की पुण्यतिथि पर उनकी देश सेवा के बारे में जानिए और पढ़िए कैसे वह देश के सर्वोच्च पद पर रहते हुए भी सादगी की एक मिसाल बने रहे।
- Written By: प्रिया सिंह

भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद पुण्यतिथि (डिजाइन फोटो)
First President Of India Dr. Rajendra Prasad: भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की आज पुण्यतिथि पर पूरा देश उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। सादगी और विद्वता के संगम राजेंद्र बाबू ने अपनी सेवा से भारतीय लोकतंत्र की नींव को बेहद मजबूत बनाने का काम किया। बिहार की माटी से निकले इस ‘देशरत्न’ ने 70 रूपये की नौकरी से लेकर राष्ट्रपति भवन के शिखर तक का सफर तय किया। आज हम भारत के पहले राष्ट्रपति के जीवन के उन अनछुए पहलुओं को गहराई से जानेंगे जो आज भी प्रेरणा देते हैं।
विलक्षण प्रतिभा और वकालत
राजेंद्र बाबू बचपन से ही पढ़ाई में इतने मेधावी थे कि उनकी परीक्षा कॉपी पर शिक्षक ने एक बहुत ही शानदार टिप्पणी लिखी थी। उस समय के परीक्षक ने लिखा था कि यह परीक्षार्थी कॉपी जांचने वाले शिक्षक से भी अधिक ज्ञानी और वास्तव में बेहतर है। वकालत के पेशे में वे ऊंचाइयों पर थे लेकिन गांधीजी के आह्वान पर उन्होंने सब त्याग कर देश सेवा के कठिन मार्ग को चुना।
नेहरू का विरोध और राष्ट्रपति पद
इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि नेहरू जी चक्रवर्ती राजगोपालाचारी को देश का पहला राष्ट्रपति बनाना चाहते थे लेकिन सहमति नहीं बनी। हालांकि सरदार पटेल और कांग्रेस के अन्य नेताओं ने राजेंद्र बाबू की योग्यता और उनकी सादगी पर अपना पूरा अटूट भरोसा जताया था। अंततः 24 जनवरी 1950 को उन्हें निर्विरोध रूप से स्वतंत्र भारत का प्रथम राष्ट्रपति चुनकर एक नया लोकतांत्रिक इतिहास रचा गया।
सम्बंधित ख़बरें
आज की ताजा खबर 28 फरवरी LIVE: PM मोदी आज राजस्थान और गुजरात के दौरे पर जाएंगे
Canada PM Mark Carney India Visit: व्यापार, निवेश और कूटनीतिक रिश्तों को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद
4 दशक, 300 फिल्में और 1000 से ज्यादा गीतों का सुनहरा सफर, संघर्ष से शुरू हुआ था इंदीवर का सफर
भारतीय डेफ टीम ने रचा इतिहास, ADCA टी20 एशिया कप का खिताब किया अपने नाम
सादगी की अनूठी मिसाल
राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रपति भवन में रहते हुए भी विलासिता को त्यागकर केवल तीन कमरों का ही बहुत साधारण उपयोग किया। जब उन्हें 10,000 वेतन और 2,500 भत्ता मिलता था तो उन्होंने इसे बहुत अधिक मानकर अपना वेतन स्वयं ही घटा लिया। वे केवल 2,500 वेतन लेते थे और साबरमती की तर्ज पर सदाकत आश्रम को अपनी कर्मभूमि मानकर सादा जीवन जीते रहे।
पोती के लिए खुद बुनी साड़ी
खादी के प्रति उनका समर्पण इतना गहरा था कि वे राष्ट्रपति भवन में प्रतिदिन नियम से चरखा चलाना कभी नहीं भूलते थे। उन्होंने अपनी पौत्री शशि के कन्यादान के लिए अपने हाथों से सूत कातकर एक बहुत ही सुंदर खादी की साड़ी तैयार की थी। यह घटना दर्शाती है कि सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर होकर भी उनके भीतर एक साधारण और बेहद भावुक हृदय था।
जनता के राष्ट्रपति और रेल यात्रा
वे देश के ऐसे पहले राष्ट्रपति थे जिन्होंने सुदूर राज्यों के गरीबों से मिलने के लिए बहुत लंबी रेल यात्राएं की थीं। पांच महीने की इस यात्रा के दौरान वे छोटे स्टेशनों पर रुककर किसानों और गरीबों की समस्याओं को बहुत ध्यान से सुनते थे। उनकी यही संवेदनशीलता उन्हें जनता का सच्चा प्रतिनिधि और ‘देशरत्न’ की महान उपाधि का असल और सच्चा हकदार बनाती है।
यह भी पढ़ें: 27 फरवरी का इतिहास : गोधरा कांड की वो खौफनाक आग जिसने देश को झकझोर दिया, जानें आज के दिन और क्या-क्या हुआ
अंतिम समय और सदाकत आश्रम
रिटायरमेंट के बाद वे पटना के सदाकत आश्रम में एक साधारण खपरैल के मकान में रहने चले गए और अपनी सेवा जारी रखी। 28 फरवरी 1963 को रात 10 बजकर 10 मिनट पर इस महान विभूति ने पटना की पावन धरती पर अपनी अंतिम सांस ली। उनके निधन के दिन ही उन्हें पटना विश्वविद्यालय में भाषण देना था जो बाद में उनकी अंतिम वसीयत के रूप में पढ़ा गया।
Dr rajendra prasad death anniversary 2026 first president simple life india
Get Latest Hindi News , Maharashtra News , Entertainment News , Election News , Business News , Tech , Auto , Career and Religion News only on Navbharatlive.com
लेटेस्ट न्यूज़
इस्लामाबाद तक पहुंची जंग की आग! TTP ने कई इलाकों में किया विस्फोट, हर तरफ हुआ धुंआ ही धुंआ, 40 की मौत
Feb 28, 2026 | 08:17 AMपाकिस्तान-अफगानिस्तान जंग के बीच बोले डोनाल्ड ट्रंप- ‘जरूरत पड़ी तो मैं करूंगा बीच-बचाव’
Feb 28, 2026 | 08:08 AMरिलीज से पहले यामी गौतम ने देखी ‘धुरंधर 2’, आदित्य धर के डायरेक्शन की तारीफ, फैंस हुए एक्साइटेड
Feb 28, 2026 | 08:02 AMजलगांव में 15 वर्षीय छात्र ने मां की डांट से आहत होकर दी जान, परिवार सदमे में
Feb 28, 2026 | 07:50 AMशहबाज को सता रहा डर! तालिबान से जंग के बीच अचानक पहुंचे आर्मी हेडक्वार्टर, अधिकारियों से की सीक्रेट मींटिंग
Feb 28, 2026 | 07:44 AMChagos Islands Dispute: मॉरीशस ने मालदीव से तोड़े कूटनीतिक रिश्ते, हिंद महासागर में गहराया नया संकट
Feb 28, 2026 | 07:43 AMममता बनर्जी का बड़ा दांव: कोयल मल्लिक और राजीव कुमार समेत 4 दिग्गज जाएंगे राज्यसभा, जानें पूरा समीकरण
Feb 28, 2026 | 07:38 AMवीडियो गैलरी

मुलताई में 50 मुस्लिम किन्नरों की ‘घर वापसी’; ताप्ती के जल से शुद्धिकरण, लगाए कई गंभीर आरोप
Feb 27, 2026 | 02:07 PM
शराब घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल को राहत, कोर्ट ने किया रिहा, CBI को लगाई फटकार
Feb 27, 2026 | 02:00 PM
लंबी बीमारी के बाद क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता का निधन…बचपन के कोच ने बताया अधूरी रह गई एक ख्वाहिश?
Feb 27, 2026 | 01:52 PM
PM मोदी का इजराइल दौरा: एयरपोर्ट पर ‘केसरिया’ पर हुई दिलचस्प चर्चा, नेसेट में आतंकवाद पर कड़ा प्रहार
Feb 26, 2026 | 01:54 PM
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार: ‘हिस्ट्रीशीटर’ शिकायतकर्ता और AI के खेल का पर्दाफाश! क्या ये साजिश है?
Feb 26, 2026 | 01:43 PM
वाराणसी मणिकर्णिका घाट पर मसान होली पर विवाद: डोम राजा परिवार ने दी दाह संस्कार रोकने की चेतावनी
Feb 26, 2026 | 01:28 PM














