Middle East तनाव के बीच भारत का डंका, इस साल 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी अर्थव्यवस्था

Economic Growth Forecast: IMF ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में अनुमान जताया है कि Middle East में जारी भारी तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था इस साल 6.5 प्रतिशत की शानदार दर से बढ़ेगी और सबसे तेज रहेगी।
IMF Predicts India Economy To Grow At 6.5 Percent Despite Middle East Tension
भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ोत्तरी (सोर्स-सोशल मीडिया)
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India Fastest Growing Economy: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर एक बेहद सकारात्मक और शानदार अनुमान दुनिया के सामने जारी किया है। अपनी हालिया रिपोर्ट में उसने बताया है कि Middle East में चल रहे भारी तनाव के बावजूद भारत बहुत तेजी से आगे बढ़ेगा। इस रिपोर्ट के माध्यम से स्पष्ट रूप से भारत सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनने का एक बेहद मजबूत और पक्का दावा किया गया है। दुनिया की अन्य सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच केवल भारतीय अर्थव्यवस्था अपना डंका बजाने में पूरी तरह से सफल रहने वाली है।

आईएमएफ का बड़ा अनुमान

आईएमएफ ने मंगलवार को अपनी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट जारी करते हुए भारत के लिए बड़ी भविष्यवाणी की है। इस खास रिपोर्ट के अनुसार इस साल भारत की अर्थव्यवस्था 6.5 प्रतिशत की बहुत ही शानदार दर से आगे बढ़ने वाली है। इस मजबूत वृद्धि दर के साथ भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला एकमात्र देश बना रहेगा।

अनुमान में हुई बढ़ोतरी

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने साल 2026 के लिए भारत के वृद्धि अनुमान में 0.3 प्रतिशत अंक की बड़ी बढ़ोतरी भी की है। यह अहम बढ़ोतरी मुख्य रूप से साल 2025 के बहुत ही शानदार और मजबूत आर्थिक प्रदर्शन का सीधा असर मानी जा रही है। इसके अलावा भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करना भी इस तेज वृद्धि का एक बहुत बड़ा कारण है।

तनाव का नहीं होगा असर

Middle East में लगातार चल रहे भारी तनाव और संघर्ष का भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोई बहुत बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। अमेरिका द्वारा टैरिफ कम किए जाने जैसे प्रमुख और सकारात्मक कारकों ने इन नकारात्मक प्रभावों को अब काफी हद तक संतुलित कर दिया है। अगर यह संघर्ष अल्पकालिक रहता है तो इससे केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर में बहुत ही हल्की और मामूली गिरावट देखने को मिल सकती है।

भविष्य की मजबूत स्थिति

मुद्रा कोष ने साल 2026 के साथ-साथ साल 2027 में भी भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत पर बने रहने का शानदार अनुमान जताया है। यह आंकड़ा दिखाता है कि भारतीय बाजार और यहां की नीतियां भविष्य के किसी भी आर्थिक जोखिम से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। दुनिया भर के बड़े विदेशी निवेशक भी भारत की इस शानदार और स्थिर आर्थिक स्थिति को देखकर यहां पैसा लगाने के लिए काफी आकर्षित होंगे।

वैश्विक वृद्धि दर का हाल

आईएमएफ की इस विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार साल 2026 में वैश्विक वृद्धि दर लगभग 3.1 प्रतिशत और 2027 में 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह अनुमानित आंकड़ा साल 2025 के 3.4 प्रतिशत के पुराने अनुमान से थोड़ा कम जरूर है लेकिन इसमें काफी स्थिरता दिखाई दे रही है। इसके अलावा बाजार विनिमय दरों के आधार पर कुल वैश्विक उत्पादन भी 2026 और 2027 में 2.6 प्रतिशत की दर से ही बढ़ने का अनुमान है।

सकारात्मक कारकों का प्रभाव

वैश्विक वृद्धि के अनुमान में बहुत ही सीमित कटौती की गई है क्योंकि कई सकारात्मक आर्थिक कारक आज भी अपना काम मजबूती से कर रहे हैं। कम आयात शुल्क और पहले से लागू मजबूत नीतिगत समर्थन ने दुनिया भर की आर्थिक स्थिति को काफी हद तक नीचे गिरने से बचा लिया है। इसके साथ ही 2025 के आखिर और 2026 की पहली तिमाही में अपेक्षा से बेहतर वैश्विक आर्थिक प्रदर्शन ने भी स्थिति को बहुत अच्छे से नियंत्रित किया है।

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