
पुतिन की भारत यात्रा के दौरान थी राजधानी को दहलाने का प्लान (सोर्स- सोशल मीडिया)
White Coat Terror Nexus in India: दिल्ली में सोमवार को लाल किले के पास आतंकी हमले के तहत कार में धमाका हुआ। इसके आरोप में पुलिस ने डॉक्टरों और अन्य पेशेवरों के गिरफ्तार किया है। जिसने आतंकवाद के नए नेक्सस ‘व्हाइट कॉलर मॉड्यूल के खुलासे ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। इसी बीच रिटायर्ड डिफेंस एनालिस्ट मेजर जनरल डीसी कटोच ने इसे लेकर एक बड़ा खुलासा किया है।
मेजर जनरल कटोच के मुताबिक, यह नेटवर्क जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी गतिविधियों से कहीं बड़ा और जटिल है। उनका मानना है कि यह कोई साधारण हमला नहीं था, बल्कि इसे एक क्लासिक ‘रेजीम चेंज’ ऑपरेशन की तरह योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया जाना था। उन्होंने कहा कि यह साजिश दिसंबर से जनवरी के बीच तैयार की गई थी, और इसी समय रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे का समय भी था।
उन्होंने बताया कि इस साजिश के तहत 26 जनवरी तक कई धमाके किए जाने की योजना थी। यह एक सुनियोजित योजना थी जिसमें भू-राजनीतिक मकसद छिपा था। उनका कहना है कि इस साजिश के निशान साफ तौर पर पाकिस्तान से जुड़ते हैं। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि जैश-ए-मोहम्मद (JEM) इस पूरे नेटवर्क का मुख्य संगठन था, जिसका सीधा संबंध पाकिस्तान की मिलिट्री और सरकार से है। कश्मीर में प्रोपेगैंडा पोस्टर से लेकर विस्फोटकों की खरीदारी तक सभी गतिविधियां पाकिस्तान की मदद से ही संचालित की गई थीं।
इन समूहों ने भारत में सालों तक स्लीपर सेल्स के रूप में छिपकर इंतजार किया। उन्हें स्थानीय स्तर पर रेडिकलाइज किया गया और बाद में विदेश भेजकर ट्रेनिंग दी गई। मेजर जनरल कटोच ने इसे भारत की सबसे सफल काउंटर-इंटेलिजेंस ऑपरेशन बताया, क्योंकि इंटेलिजेंस एजेंसियों ने समय रहते इन हमलों को रोक लिया। उन्होंने कहा कि इन हमलों का मकसद बदला था। यह साजिश ऑपरेशन सिंदूर का प्रतिकार थी, जिसके तहत अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर सटीक कार्रवाई की थी।
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मेजर जनरल कटोच ने इस साजिश को ‘युद्ध का कार्य’ करार दिया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कर दिया है कि अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा और भारत का जवाब समय, स्केल और तरीके से सटीक होगा। इस खुलासे ने पूरे देश में सनसनी मचा दी है। वर्तमान में इंटेलिजेंस एजेंसियां इस नेटवर्क को और गहराई से खंगाल रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रोफेशनल्स जैसे भरोसेमंद लोग आतंकवादी गतिविधियों में शामिल किए जा रहे हैं ताकि उनकी पहचान पर शक न हो और योजनाओं को अंजाम देने में आसानी हो।






