बांग्लादेश में तख्तापलट, नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस बन सकते हैं PM, भारत पर क्या होगा असर
बांग्लादेश इस समय सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अचानक पद से इस्तीफा देकर देश छोड़ दिया है। शेख हसीना की सरकार का भारत के प्रति झुकाव रहता था। मगर, जिस तरह वे देश छोड़कर भागीं है। इससे एक बात साफ हो गई है कि वहां कट्टरपंथी तत्वों का उदय हो रहा है।
- Written By: राहुल गोस्वामी
डिज़ाइन फोटो
नई दिल्ली: जहां एक तरफ बांग्लादेश में बीते 2 महीने से चल रहे आरक्षण विरोधी छात्र आंदोलन के बाद यहां की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बीते सोमवार, 5 अगस्त को पद से इस्तीफा देकर देश ही छोड़ दिया और ढाका से अगरतला के रास्ते भारत पहुंचीं। वहीं राष्ट्रपति ने जेल में बंद पूर्व PM और विपक्षी नेता खालिदा जिया की रिहा करने का आदेश दिया है। उन्हें 2018 में भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में 17 साल कारावास की सजा सुनाई गई थी।
खबर यह भी है कि अब नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश के अंतरिम प्रधानमंत्री बने सकते हैं। इस बाबत आरक्षण विरोधी आंदोलन के कॉर्डिनेटर नाहिद इस्लाम ने आज कहा कि नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार की रूपरेखा तैयार होगी। यूनुस ने बांग्लादेश में ग्रामीण बैंक की स्थापना की थी। गरीबी विरोधी अभियान के लिए उन्हें 2006 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला था।
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भारत पर क्या असर
बांग्लादेश में फिलहाल अराजकता का माहौल है। यहां बड़ी संख्या में भीड़ सड़कों पर उतरी आई है और लूटपाट व आगजनी करने में लगी है। ऐसी भी खबर है कि बांग्लादेश में रहने वाले हिंदुओं के घरों में भी आग लगाई जा रही है। हालांकि शेख हसीना की सरकार का भारत के प्रति झुकाव बहुत रहता था। मगर, जिस तरह से उनको देश छोड़कर भागना पड़ा है। इससे यह बात साफ है कि देश में कट्टरपंथी तत्वों का उदय हो रहा है। शेख हसीना की पार्टी ने इसे पीछे जमात-ए-इस्लामी को जिम्मेदार बता रही है। जिस पर पाकिस्तान का समर्थक होने का आरोप पहले भी लगता रहा है।
भारतीय सीमा सुरक्षित
इधर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने कहा कि बांग्लादेश में मची उथल-पुथल के बीच पड़ोसी मुल्क से लगी भारतीय सीमा सुरक्षित है और लोगों को किसी भी अफवाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए। राज्यपाल बोस ने एक ‘निगरानी समिति’ भी गठित की, जो भ्रामक सूचनाओं पर लोगों को जानकारी देने के लिए चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेगी। वहीं भारत सरकार बंगाल का समर्थन कर रही और सीमाओं की सुरक्षा के लिए मजबूत व प्रभावी कदम उठा रही है।
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जानकारी दें कि इससे पहले भारत केही पड़ोसी देश श्रीलंका में आर्थिक संकट के बाद यहां राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे की सरकार के खिलाफ हिंसक आंदोलन हुआ था। यहां भी जुलाई 2022 में ऐसी ही एक विकट स्थिति बनी थी। तब श्रीलंका के लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे और राष्ट्रपति भवन में घुस गए थे।
