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Bangladesh Protest : मुश्किल हालातों में पहले भी भारत की शरण में आ चुकी हैं शेख हसीना, जानिए पूरी कहानी
- Written By: अभिषेक सिंह
बांग्लादेश में लगातार बिगड़ रहे हालात के बीच प्रधानमंत्री शेख हसीना ने त्यागपत्र देकर भारत का रुख कर लिया है। शेख हसीना के लिए मुश्किल हालात में भारत जाना पहली बार नहीं हुआ है। इसके पहले भी वह कई मौंकों पर भारत से मदद ले चुकी हैं।

बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना (सोर्स-मीडिया)
नई दिल्ली : बांग्लादेश में लगातार बिगड़ रहे हालात के बीच प्रधानमंत्री शेख हसीना ने त्यागपत्र देकर भारत का रुख कर लिया है। माना जा रहा है कि वह अभी अगले कुछ दिनों तक हिंदुस्तान में किसी सुरक्षित ठिकाने पर रहेंगी। शेख हसीना के लिए मुश्किल हालात में भारत जाना पहली बार नहीं हुआ है। इसके पहले भी वह कई मौंकों पर भारत से मदद ले चुकी हैं।
आपको बता दें कि बांग्लादेश में लगातार आगजनी और हिंसा की घटनाएं हो रही हैं। इसी को लेकर जब सेना प्रमुख वकार-उज-जमान ने शेख हसीना को 45 मिनट के भीतर इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया तो प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश छोड़ने मुनासिब समझा और अपने पद से इस्तीफा देते हुए सेना के विशेष हेलीकाप्टर से भारत के लिए रवाना हो गईं।
छात्र राजनीति से पीएम की कुर्सी का सफर
सबको ज्ञात है कि शेख हसीना के पिता और बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान थे। हसीना उनकी सबसे बड़ी बेटी हैं। उनका शुरुआती जीवन बांग्लादेश के ढाका में गुजरा और वह एक छात्र नेता के रूप में राजनीति में धीरे-धीरे अपना कदम बढ़ाया। शेख हसीना ने यूनिवर्सिटी आफ ढाका में पढ़ाई के दौरान स्टूडेंट पॉलिटिक्स में अपनी खास भूमिका निभायी। इतना ही नहीं अपने काम के दम पर अपने पिता से तारीफ पाई और पिता की अवामी लीग पार्टी की स्टूडेंट विंग की मुखिया बनीं।
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बताया जाता है कि पार्टी का नेतृत्व सामान संभालने के बाद शेख हसीना बुरे दौर से तब गुजरीं जब उनके माता-पिता और तीन भाइयों की हत्या कर दी गई। यह साल 1975 की बात है, जब बांग्लादेश में सेना ने बगावत कर दिया था और हसीना के परिवार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनके माता-पिता के साथ तीन भाइयों के निर्मम हत्या कर दी थी, लेकिन शेख हसीना और उनके पति वाजिद मियां और एक छोटी बहन की जान बच गई थी।
इंदिरा से थे अच्छे रिश्ते
कहा जाता है कि उस दौरान वह पिता और परिवार के लोगों की हत्या के बाद कुछ समय के लिए जर्मनी चली गईं थीं। शेख हसीना से भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से अच्छे रिश्ते थे। इसके बाद इंदिरा गांधी ने शेख हसीना को जर्मनी से भारत बुला लिया और वह कई सालों तक दिल्ली में रहीं। इसके बाद 1981 में जब स्थिति सामान्य हो गई तो शेख हसीना अपने देश वापस लौटीं।
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वापस लौट के बाद से हसीना ने अपनी पार्टी ज्वाइन की और दोबारा कार्यभार संभाला। इसी दौरान उन्होंने अपनी पार्टी में कई बदलाव करके पार्टी को मजबूत करने की कोशिश की। शेख हसीना ने जनवरी 2009 से बांग्लादेश के प्रधानमंत्री का पद संभाले हुए थीं। उन्होंने 1986 से 1990 तक और 1991 से 1995 तक विपक्ष के नेता के तौर पर भी काम किया। शेख हसीना 1981 से अवामी लीग का नेतृत्व कर रही है। उन्होंने 1996 से जुलाई 2001 तक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया था।
2009 से कायम था करिश्मा
इसके बाद 2009 में उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ ली। उसके बाद 2014 में उन्होंने तीसरे कार्यकाल के लिए चुना गया। इसके बाद उन्होंने 2018 में एक बार फिर से जीत दर्ज की और चौथे कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री बनकर अपने राजनीतिक पकड़ का नमूना पेश किया। तब से वह सत्ता में बनी हुयी हैं।
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