India Russia Pact: भारत में 3000 रूसी सैनिकों की तैनाती और सैन्य लॉजिस्टिक समझौते का क्या है असली सच?
India Russia Pact: भारत और रूस के बीच सैन्य समझौता लागू हो गया है। इस डील से भारत में 3000 रूसी सैनिकों की तैनाती का दावा किया जा रहा है, जिसकी वास्तविकता विशेषज्ञों ने विस्तार से बताई है।
- Written By: प्रिया सिंह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (सोर्स-सोशल मीडिया)
India Russia Pact Military Deal: भारत और रूस की दशकों पुरानी दोस्ती एक बार फिर से सुर्खियों में छा गई है। दोनों देशों की सेनाओं के बीच एक अहम सैन्य लॉजिस्टिक सपोर्ट समझौता यानी कि RELOS इसी साल जनवरी महीने से पूरी तरह लागू कर दिया गया है। इस शानदार समझौते पर पिछले कई सालों से लगातार बहुत ही गहन विचार-विमर्श किया जा रहा था। जब से यह खास समझौता हुआ है तब से दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग का एक नया अध्याय शुरू हो गया है।
इस ऐतिहासिक समझौते के बाद रूसी पक्ष ने यह बड़ा दावा किया था कि भारत की जमीन पर 3000 रूसी सैनिक तैनात हो सकेंगे। इसके साथ ही भारत के भी 3000 सैनिक रूस में तैनात होने की बात कही गई थी। सोशल मीडिया पर कई लोग इसे एक बहुत ही बड़े और स्थायी सैन्य समझौते के रूप में जोर-शोर से दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों ने अब इस पूरे समझौते की वास्तविकता और इसकी अहम शर्तों को देश के सामने स्पष्ट कर दिया है।
समझौते की अहम शर्तें और नियम
विशेषज्ञों के अनुसार भारत और रूस के बीच हुआ यह लॉजिस्टिक सपोर्ट समझौता ठीक वैसा ही है जैसा अन्य देशों के साथ है। द हिंदू की रिपोर्ट बताती है कि यह मूलभूत सैन्य सहयोग समझौता है जिसमें ठिकाने और बंदरगाह इस्तेमाल होते हैं। दोनों देश एक-दूसरे के संसाधनों का इस्तेमाल सप्लाई, ईंधन और जरूरी रिपेयरिंग कार्यों के लिए बहुत ही आसानी से कर सकेंगे।
सम्बंधित ख़बरें
Sheikh Hasina के सार्वजनिक रूप से सामने आने से भड़का बांग्लादेश बोला- भगोड़े की वजह से भारत न बिगाड़े संबंध
पाकिस्तान में अज्ञात हमलावर ने 30 Lashkar Terrorists को मारा, वीडियो से हुआ खुलासा
PoK Election में जितने के बाद नवाज शरीफ को PM बनाएंगे शहबाज? पूरा करेंगे बड़े भाई का सपना
रोजी-रोटी से शुरू आंदोलन बना बगावत, PoK में जारी हिंसा से बेनकाब हुई पाक सरकार और मुनीर सेना
सैनिकों की स्थायी तैनाती का सच
साल 2017 में तत्कालीन भारतीय रक्षा राज्य मंत्री ने भी स्पष्ट किया था कि ऐसे समझौते सैन्य अड्डे बनाने के लिए बिल्कुल नहीं होते हैं। इसके तहत खाना, पानी, ट्रांसपोर्टेशन, मेडिकल सेवाएं, पेट्रोल और कपड़ों जैसी कई मूलभूत सुविधाएं दी जाती हैं। 3000 सैनिकों की जो संख्या बताई गई है वह केवल एक ऊपरी सीमा है जो विमानों और युद्धपोतों के साइज पर निर्भर करती है।
50 हजार सैनिकों की मदद का उदाहरण
भारत ने ऐसे ही एक सैन्य समझौते का बेहतरीन इस्तेमाल साल 2020 में चीन के साथ हुए तनाव के दौरान बड़ी ही समझदारी से किया था। उस समय भारत ने लद्दाख में तैनात अपने 50 हजार सैनिकों के लिए जाड़े के कपड़े बहुत ही कम समय में मंगाए थे। रूस के साथ हुए इस नए और अहम RELOS समझौते की वैधता फिलहाल 5 साल के लिए ही तय की गई है।
यह भी पढ़ें: Trump G2 Formula: क्या अमेरिका और चीन की नई दोस्ती भारत और क्वाड के लिए है एक बड़ा खतरा?
भारतीय सैनिक जाएंगे आर्कटिक
रूस के साथ हुए इस शानदार समझौते में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि दोनों देश एक-दूसरे के यहां स्थायी सैनिक तैनात करेंगे। हालांकि इस डील का सबसे अहम फायदा यह है कि भारतीय सैनिक आर्कटिक में रूसी सैन्य ठिकाने तक आसानी से जा सकेंगे। भारत ने अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, वियतनाम, जापान, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर के साथ भी इसी तरह के समझौते पहले ही किए हुए हैं।
