Trump G2 Formula: क्या अमेरिका और चीन की नई दोस्ती भारत और क्वाड के लिए है एक बड़ा खतरा?
Trump G2 Formula: ट्रंप अमेरिका और चीन की G2 साझेदारी का जिक्र कर रहे हैं। इंडो-पैसिफिक का नाम बदलने और एक गलत नक्शा जारी होने से आज भारत की तमाम कूटनीतिक और रणनीतिक चिंताएं बढ़ गई हैं।
- Written By: प्रिया सिंह
अमेरिका और चीन की G2 साझेदारी (सोर्स- AI डिज़ाइन)
Donald Trump G2 Formula: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आजकल सार्वजनिक मंचों पर लगातार अमेरिका और चीन की नई साझेदारी का जिक्र कर रहे हैं। ट्रंप की इस नई कूटनीतिक सोच को मुख्य रूप से जी2 फॉर्मूला कहा जा रहा है जिसका अर्थ है दुनिया के दो सबसे बड़े देश मिलकर काम करें।
अमेरिका की दशकों पुरानी नीति में यह एक बहुत बड़ा बदलाव है क्योंकि चीन को अब तक अमेरिका अपना सबसे बड़ा रणनीतिक दुश्मन मानता आया है। ट्रंप की यह नई सोच भारत के लिए चिंता का विषय बन गई है क्योंकि इसका असर एशिया के क्षेत्रीय संतुलन और सुरक्षा पर सीधा पड़ेगा।
कुछ समय पहले तक भारत को अमेरिका का सबसे अहम रणनीतिक साझेदार माना जाता था और क्वाड को मुख्य सुरक्षा कवच कहा जाता था। लेकिन अब ट्रंप के इस नए कदम से भारत की बहुध्रुवीय एशिया नीति के सामने एक बहुत बड़ी और नई चुनौती खड़ी हो गई है।
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अगर अमेरिका और चीन आपसी सहमति से फैसले लेने लगे तो क्वाड जैसे महत्वपूर्ण सुरक्षा मंच की अहमियत काफी हद तक कम हो जाएगी। भारत के लिए यह स्थिति कूटनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण होगी क्योंकि वह इस क्षेत्र में किसी एक शक्ति का वर्चस्व कभी नहीं चाहता है।
इंडो-पैसिफिक से ‘इंडो’ शब्द हटाना
अमेरिका ने अपने सबसे बड़े सैन्य कमांड यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर दोबारा यूएस पैसिफिक कमांड कर दिया है। साल 2018 में ट्रंप ने ही भारत की अहमियत दिखाने के लिए इसका नाम इंडो-पैसिफिक किया था।
अब इंडो शब्द हटाने के इस बड़े प्रतीकात्मक फैसले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत की रणनीतिक भूमिका को कम करने का एक स्पष्ट संकेत हो सकता है।
गलत नक्शे ने बढ़ाया भारी विवाद
पेंटागन द्वारा जारी किए गए एक हालिया नक्शे ने भारत और अमेरिका के बीच इस तनाव को और भी ज्यादा बढ़ा दिया है। इस नक्शे में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके को गलत तरीके से पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया गया है।
भारतीय राजनयिकों ने अमेरिका की इस भारी गलती पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। इन दोनों घटनाओं ने कूटनीतिक गलियारों में एक नया और गंभीर भू-राजनीतिक विवाद पैदा कर दिया है।
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भारत की नई बहुस्तरीय कूटनीति
इन सभी बदलावों के बीच भारत ने भी अपनी विदेश नीति और कूटनीति में तेजी से बड़े बदलाव करने शुरू कर दिए हैं। भारत अब केवल अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय यूरोप और अन्य देशों के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहा है।
हाल ही में प्रधानमंत्री ने कई यूरोपीय देशों का दौरा किया है और मुक्त व्यापार समझौतों पर खास जोर दिया है। भारत अब अपनी नौसेना और रक्षा उत्पादन को आत्मनिर्भर बनाने पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित कर रहा है।
