आर्मी को भईया कभी बदनाम नहीं करेंगे, संसद में मचा बवाल तो राहुल गांधी के बचाव में उतरीं प्रियंका

Parliament Session 2026: कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा है कि भईया आर्मी को कभी बदनाम नहीं करेंगे। आज संसद में बवाल मचने के बाद राहुल गांधी के बचाव में बहन प्रियंका उतरीं हैं।
Brother, we will never defame the army, Priyanka Gandhi said in defense of Rahul Gandhi amid uproar in Parliament
प्रियंका गांधी और राहुल गांधी।
Updated on

Priyanka Gandhi News : संसद में पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की किताब को लेकर मचे घमासान के बीच अब प्रियंका गांधी भी अपने भाई राहुल गांधी के बचाव में उतर आई हैं। सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद प्रियंका गांधी ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि राहुल गांधी कभी भी भारतीय सेना को बदनाम नहीं कर सकते और सरकार उनकी बातों से पूरी तरह डरी हुई है।

प्रियंका गांधी ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी सदन में केवल एक किताब का हिस्सा पढ़ रहे थे, जो पहले ही सार्वजनिक रूप से एक मैगजीन में प्रकाशित हो चुका है। उन्होंने सरकार के तर्कों को खारिज करते हुए सवाल उठाया। जब कोई जानकारी पब्लिक सोर्स (किताब या मैगजीन) में उपलब्ध है तो उसे अप्रमाणित कैसे कहा जा सकता है? सरकार इस सच को सामने आने देने से आखिर क्यों डर रही है? प्रियंका का इशारा उस विवाद की ओर था, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष ने अप्रकाशित सामग्री का हवाला देकर राहुल गांधी को बोलने से रोका था।

56 इंच की छाती बनाम जमीनी हकीकत

राहुल गांधी ने सरकार पर सीधा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी नेतृत्व को डर है कि यदि पूर्व आर्मी चीफ की किताब की बातें जनता के सामने आ गईं, तो सरकार की असलियत खुल जाएगी। राहुल का कहना है कि वे केवल यह बताना चाहते थे कि चीन के सामने सरकार की '56 इंच की छाती' वाली छवि की हकीकत क्या है। डोकलाम और सीमा विवाद पर जनरल नरवणे के कथित खुलासे सरकार के लिए राजनीतिक रूप से असहज करने वाले साबित हो रहे हैं।

संसद में बना रहा गतिरोध

इस मुद्दे पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तकरार इतनी बढ़ गई कि मंगलवार को सदन की बैठक दो बार स्थगित करनी पड़ी। भारी शोर-शराबे और हंगामे के चलते अंततः कार्यवाही को अगले दिन सुबह 11 बजे तक के लिए टाल दिया गया।

रक्षा नीति के लिए बड़ी चुनौती बना

संसदीय नियमों के तहत जब कोई सांसद किसी दस्तावेज का हवाला देता है तो उसे उस कागज की सत्यता की जिम्मेदारी लेनी होती है। राहुल गांधी का तर्क है कि चूंकि यह हिस्सा मीडिया और मैगजीन में आ चुका है, इसलिए यह गोपनीय नहीं रहा। यह पहली बार नहीं है, जब किसी किताब के अंश ने संसद को हिला कर रख दिया हो। मगर, डोकलाम और चीन जैसे रणनीतिक मुद्दों पर पूर्व सेना प्रमुख की बातों को सदन के पटल पर रखना सरकार की रक्षा नीति के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

Navbharat Live
navbharatlive.com