राहुल गांधी को नसीहत देने पर भड़कीं कांग्रेस (फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Rahul Gandhi letter controversy: देश की राजनीति में तब उबाल आ गया जब 272 प्रतिष्ठित हस्तियों ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को एक खुला पत्र लिख दिया। इन वरिष्ठ नागरिकों ने चुनाव आयोग पर गड़बड़ी के आरोप लगाने के लिए राहुल गांधी की आलोचना की थी, लेकिन यह बात कांग्रेस को बिल्कुल रास नहीं आई। कांग्रेस नेत्री अलका लांबा इस पत्र पर इतनी तीखी प्रतिक्रिया दी कि हर कोई हैरान रह गया। उन्होंने इन दिग्गजों के लिए बेशर्म, बिकाऊ, भ्रष्ट और कायर जैसे बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है।
अलका लांबा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उस खबर को शेयर किया जिसमें राहुल गांधी को लिखे गए पत्र का जिक्र था। इसके साथ उन्होंने किसी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन कैप्शन में शब्द: बेशर्म, बिकाऊ, भ्रष्ट, कायर, सत्ता के दलाल लिखकर अपना गुस्सा जाहिर कर दिया। जिन लोगों ने यह पत्र लिखा है, वे कोई आम नागरिक नहीं बल्कि देश के पूर्व न्यायाधीश, रिटायर्ड आईएएस, आईपीएस और सेना के बड़े अधिकारी हैं। लांबा ने जिस अंदाज में खबर साझा की, उससे साफ है कि उनका निशाना सीधे तौर पर इन्हीं 272 प्रतिष्ठित लोगों पर है।
इन वरिष्ठ नागरिकों ने मंगलवार को जारी अपने खुले पत्र में साफ कहा कि सेना, न्यायपालिका और चुनाव आयोग जैसी संस्थाएं पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता से लोकतंत्र को मजबूत कर रही हैं। उन्होंने लिखा कि केवल राजनीतिक फायदे के लिए संवैधानिक संस्थाओं की छवि खराब करना गलत और निंदनीय है। पत्र में राहुल गांधी को नसीहत दी गई है कि अब समय आ गया है कि नेतृत्व की बुनियाद सच्चाई पर हो, न कि विचारों में कोई नाटक हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में भाव सेवा का होना चाहिए, अपमान का नहीं, और सियासी लाभ के लिए किसी भी तरह का तमाशा नहीं किया जाना चाहिए।
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राहुल गांधी को पत्र लिखने वालों की इस लिस्ट में 16 पूर्व जज, 14 पूर्व राजदूत और 123 रिटायर्ड नौकरशाह शामिल हैं। इसके अलावा सेना और पुलिस के 133 पूर्व अधिकारी भी इस मुहिम का हिस्सा हैं। पत्र के साथ दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज एस एन ढींगरा और झारखंड की पूर्व डीजीपी निर्मल कौर का नाम प्रमुखता से दिया गया है। इनका मानना है कि आयोग निष्पक्ष तरीके से काम कर रहा है और उस पर पक्षपात का आरोप लगाना निराधार है। इन नागरिकों ने लिखा है कि कुछ राजनेता बेबुनियाद आरोप लगाकर संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करते हुए जहर उगल रहे हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है।