
ओटीटी प्लेटफॉर्म। इमेज-एआई
OTT Addiction Concern: लोग और खासकर बच्चे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के बहुत आदी होते जा रहे हैं। आरोप भी लगते रहे हैं कि ओटीटी प्लेटफॉर्म के कारण बच्चों की मानसिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ रहा, क्योंकि प्लेटफॉर्म पर अश्लीलता पड़ोसी जा रही है। इस वजह से सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि नेटफ्लिक्स और यूट्यूब देखने के लिए आधार कार्ड जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार को सलाह दी है कि नेटफ्लिक्स और यूट्यूब, इंस्टाग्राम समेत सभी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आधार आधारित आयु सत्यापन को अनिवार्य बनाए, जिससे अश्लील और 18 से अधिक उम्र वाली सामग्री को बच्चों से दूर रखा जा सके।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि सिर्फ चेतावनी संदेश दिखाकर आगे बढ़ जाना काफी नहीं है। चेतावनी दिखाने के कुछ सेकंड के भीतर सामग्री शुरू हो जाती है, इसलिए उन्होंने सुझाव दिया कि 18 से अधिक आयु वर्ग की सामग्री देखने के लिए आधार कार्ड के जरिए आयु सत्यापन की व्यवस्था शुरू की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जा सकता है। पहले इसका परीक्षण किया जा सकता है।
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने चिंता जताते हुए कहा कि किताबों या फिल्मों में अश्लीलता पर नियंत्रण है, लेकिन मोबाइल पर कोई नियंत्रण नहीं है। साथ ही फोन चालू करते ही स्क्रीन पर अनुचित सामग्री आ जाती है। इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि बच्चे गलती से ऐसी सामग्री देख लें। इस चलते उन्होंने कहा कि अदालत का मानना है कि इसे रोकने के लिए आधार-आधारित लॉक अच्छा उपाय है।
इस बीच अदालत ने कॉमेडियन समय रैना और पॉडकास्टर रणवीर इलाहाबादिया के खिलाफ मामलों की सुनवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्रता के नाम पर दिव्यांगों का मजाक उड़ाना स्वीकार्य नहीं है। सीजेआई सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि दिव्यांगों की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले चुटकुलों के लिए सख्त कानून होना चाहिए। आगे कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब अनियंत्रित गतिविधि नहीं है। अदालत ने कहा कि ऑनलाइन सामग्री को विनियमित करने के लिए स्वतंत्र और स्वायत्त नियामक संस्था का गठन किया जाना चाहिए और स्व-नियामक संस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि एक ऐसे संगठन की आवश्यकता है, जो बाहरी दबाव के अधीन न हो।
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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पैरवी कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमण ने कहा कि सरकार इस मामले पर गंभीरता से विचार-विमर्श कर रही है। उन्होंने कहा कि वे सभी हितधारकों से परामर्श करेंगे और एक सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने कहा कि कोई भी निर्णय जल्दबाजी में नहीं लिया जाएगा।






