1 दिसंबर से बदल जाएगा सुप्रीम कोर्ट का नियम? नए CJI सूर्यकांत ने दिए बड़े बदलाव के संकेत

देश की सबसे बड़ी अदालत में 1 दिसंबर से कुछ बड़ा होने वाला है। CJI सूर्यकांत ने एक बड़ा सस्पेंस खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि Supreme Court में काम करने के पुराने तौर-तरीकों में अब बदलाव का वक्त आ गया।
india supreme-court-reforms-cji-surya-kant-december-1-new-plan-news
सुप्रीम कोर्ट में नए CJI सूर्यकांत ने दिए बड़े बदलाव के संकेत (फोटो- सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

New CJI Justice Surya Kant: देश की सबसे बड़ी अदालत में 1 दिसंबर से कुछ बड़ा होने वाला है। भारत के नए मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने वकीलों और वादियों के लिए एक बड़ा सस्पेंस खड़ा कर दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में काम करने के पुराने तौर-तरीकों में अब बदलाव का वक्त आ गया है। जस्टिस सूर्यकांत ने एक वकील की दलील सुनने के बाद स्पष्ट किया कि वे सुधारों का एक नया सेट लेकर आ रहे हैं, जो सीधे तौर पर केस मेंशनिंग से जुड़ा होगा। आखिर क्या है उनका यह प्लान?

दरअसल, जस्टिस कांत की यह ताजा टिप्पणी केस मेंशनिंग सिस्टम में आने वाले बड़े बदलाव की ओर इशारा करती है। उन्होंने इस संकेत को समझाते हुए कहा कि वे 1 दिसंबर से कुछ नया करने जा रहे हैं। सुधार के पहले चरण में मेंशनिंग की प्रक्रिया को सुधारा जाएगा। उन्होंने बार की चिंताओं को समझते हुए भरोसा दिलाया है कि वकीलों को अब सिर्फ मेंशनिंग के लिए अपना कीमती समय बर्बाद करके कोर्ट तक आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उनका उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और समय बचाने वाला बनाना है।

वकीलों को मिली बड़ी राहत और चेतावनी

नए सीजेआई ने एक मामले को मेंशन करने आए वकील को रोकते हुए कहा कि 1 दिसंबर तक इंतजार करें, हम कुछ योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें आपके मुद्दों की जानकारी है और अब आपको जिक्र करने की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में सुधारों का यह पहला सेट 1 दिसंबर से ही लागू हो जाएगा। मुख्य न्यायाधीश का कहना है कि वे यह पक्का करेंगे कि वकील मेंशनिंग के लिए अपना समय न गंवाएं। यह कदम न केवल वकीलों के लिए राहत भरा होगा, बल्कि कोर्ट के समय का भी सही उपयोग सुनिश्चित करेगा।

पहले दिन ही जाहिर कर दी थी नाराजगी

आपको बता दें कि जस्टिस सूर्यकांत ने 24 नवंबर को देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। पदभार ग्रहण करने के पहले दिन ही उन्होंने केस मेंशनिंग के पुराने तौर-तरीकों पर घोर ऐतराज जताया था। उन्होंने सख्त लहजे में कहा था कि किसी केस को मेंशन करने और उसी दिन उसे लिस्ट करने का तरीका हमेशा के लिए स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने साफ किया कि मौत की सजा या अभिव्यक्ति की आजादी जैसे बेहद खास मामलों को छोड़कर, अर्जेंट लिस्टिंग के लिए मेंशनिंग स्लिप लिखकर देनी होगी, न कि बोलकर। रजिस्ट्री पहले स्लिप और अर्जेंट होने के कारणों को देखेगी, उसके बाद ही मामला लिस्ट किया जाएगा।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com