डॉक्टर से थाइरॉयड की जांच कराती महिला (सौ. एआई)
Thyroid And Weight Gain: आजकल की बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल का सबसे बुरा असर महिलाओं की सेहत पर पड़ रहा है जिसमें थायरॉयड एक गंभीर समस्या बनकर उभरा है। यह केवल गले की ग्रंथि की बीमारी नहीं है बल्कि आपके मेटाबॉलिज्म को सुस्त कर मोटापे का सबसे बड़ा कारण बनती है।
थायरॉयड ग्रंथि हमारे शरीर के कंट्रोल रूम की तरह काम करती है जो मेटाबॉलिज्म और ऊर्जा उत्पादन को नियंत्रित करती है। जब यह ग्रंथि हार्मोन का उत्पादन कम कर देती है तो उस स्थिति को हाइपोथायरायडिज्म कहा जाता है। आज के समय में वजन बढ़ने की समस्या से जूझ रहे अधिकांश लोगों में थायरॉयड ही मुख्य जड़ पाया जा रहा है।
हाइपोथायरायडिज्म में शरीर की कैलोरी जलाने की क्षमता काफी कम हो जाती है। जब शरीर कैलोरी को ऊर्जा में नहीं बदल पाता तो वह फैट के रूप में जमा होने लगती है। इसके कारण पाचन सुस्त पड़ जाता है शरीर में भारीपन आता है और हर वक्त सुस्ती महसूस होती है। आयुर्वेद के नजरिए से देखें तो यह स्थिति शरीर में कफ और वात दोष के असंतुलन से पैदा होती है जो न केवल मोटापा बढ़ाती है बल्कि शरीर में सूजन का कारण भी बनती है।
थायरॉयड के साथ वजन घटाना मुश्किल जरूर है लेकिन नामुमकिन नहीं है। आयुर्वेद में मेटाबॉलिज्म को अग्नि कहा गया है जिसे इन तरीकों से फिर से सक्रिय किया जा सकता है।
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सोंठ, काली मिर्च और पिप्पली से बना यह चूर्ण पाचन अग्नि को तीव्र करता है। रोजाना शहद के साथ इसका सेवन मेटाबॉलिज्म को मजबूत कर फैट बर्निंग प्रोसेस को तेज करता है।
ये दोनों न केवल इम्यूनिटी बढ़ाते हैं बल्कि रक्त की शुद्धि कर टी-3 और टी-4 हार्मोन्स को संतुलित करने में मदद करते हैं।
सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर पीना मेटाबॉलिक एक्टिवेशन के लिए सबसे सरल और प्रभावी तरीका है।
थायरॉयड में केवल दवा के भरोसे रहना काफी नहीं है। संतुलित आहार और इन आयुर्वेदिक उपायों के साथ सक्रिय जीवनशैली अपनाकर आप न केवल वजन को नियंत्रित कर सकते हैं बल्कि हार्मोन्स को भी बैलेंस कर सकते हैं।