ऑफिस में काम करते हुए तस्वीर (सौ. एआई)
Silent Working Trend: आधुनिक वर्क कल्चर में साइलेंट को-वर्किंग एक नया ट्रेंड बनकर उभर रहा है। यह एक ऐसा कॉन्सेप्ट है जहां लाइब्रेरी जैसा सन्नाटा और ऑफिस जैसी सुविधाएं एक साथ मिलती हैं। डीप-वर्क और फोकस की तलाश करने वाले वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए यह जगह अब पहली पसंद बनती जा रही है।
क्या आपने कभी सोचा है कि एक ऐसा ऑफिस हो जहां कोई फोन पर जोर से बात न करे, सहकर्मी आपस में गपशप न करें और केवल कीबोर्ड के टैप-टैप की आवाज आए। इसे ही साइलेंट को-वर्किंग (Silent Co-working) कहा जाता है। दुनिया भर में और अब भारत के मेट्रो शहरों में यह नया वर्क कल्चर तेजी से पैर पसार रहा है।
यह एक पारंपरिक को-वर्किंग स्पेस की तरह ही होता है लेकिन यहां का सबसे बड़ा नियम है सन्नाटा। यहां आने वाले लोग एक-दूसरे से बात नहीं करते। अगर किसी को कॉल अटेंड करनी है या मीटिंग करनी है तो उसके लिए अलग साउंडप्रूफ बूथ होते हैं। मुख्य हॉल केवल डीप फोकस के लिए आरक्षित होता है। यह उन लोगों के लिए स्वर्ग जैसा है जो घर के शोर या कैफे की भीड़भाड़ से दूर रहकर एकाग्रता के साथ काम करना चाहते हैं।
आज के दौर में डिस्ट्रैक्शन यानी ध्यान भटकना सबसे बड़ी समस्या है। एक रिपोर्ट के अनुसार ऑफिस में होने वाली बेवजह की बातचीत और शोर से कर्मचारी की कार्यक्षमता 40% तक कम हो सकती है। साइलेंट को-वर्किंग इसी समस्या का समाधान है।
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सन्नाटा होने के कारण दिमाग भटकता नहीं है जिससे जटिल प्रोजेक्ट्स कम समय में पूरे हो जाते हैं।
लगातार शोर और शोरगुल वाले वातावरण से होने वाली मानसिक थकान यहाँ नहीं होती।
यहां हर कोई अपने काम के प्रति गंभीर होता है जो दूसरों को भी प्रेरित करता है।
यह कल्चर विशेष रूप से उन लेखकों, कोडर्स, डिजाइनर्स और फ्रीलांसरों के लिए रामबाण है जिन्हें रचनात्मक कार्य करने के लिए उच्च स्तर की एकाग्रता की आवश्यकता होती है।
बदलते समय के साथ अब नेटवर्किंग से ज्यादा आउटपुट पर ध्यान दिया जा रहा है। साइलेंट को-वर्किंग ने साबित कर दिया है कि कभी-कभी बिना बोले काम करना ही असली प्रोफेशनलिज्म है।