Social Anxiety: क्या भीड़ देखते ही आपके भी छूट जाते हैं पसीने? कहीं आप तो नहीं इस गंभीर बीमारी का शिकार
Social Anxiety Reasons: आज के समय में सोशल एंग्जायटी एक आम लेकिन गंभीर मानसिक समस्या बनती जा रही है। भीड़ में जाना, लोगों से बात या सार्वजनिक जगहों पर असहज महसूस करना इसके प्रमुख लक्षण हो सकते है।
- Written By: प्रीति शर्मा
सोशल एंग्जाइटी लक्षण (सौ. एआई)
Mental Health Tips: मौजूदा दौर में शरीर को स्वस्थ रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। बीमारियों का बढ़ता दायरा न केवल बुजुर्गों को बल्कि बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रहा है। अक्सर हम हेल्थ का मतलब सिर्फ शारीरिक मजबूती से जोड़ते हैं लेकिन आंकड़े बताते हैं कि मेंटल हेल्थ की अनदेखी भविष्य में गंभीर परिणाम दे सकती है। इन्हीं मानसिक समस्याओं में से एक सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर (Social Anxiety Disorder SAD) है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम शारीरिक फिटनेस पर तो ध्यान देते हैं लेकिन मानसिक सेहत अक्सर पीछे छूट जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर दुनिया की सबसे आम मानसिक समस्याओं में से एक है।
क्या है सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर
सरल शब्दों में कहें तो यह सामाजिक भय है। इसमें व्यक्ति को समाज के बीच जाने, लोगों से बातचीत करने या किसी सार्वजनिक स्थिति का सामना करने में अत्यधिक घबराहट महसूस होती है। यह समस्या आमतौर पर किशोरावस्था से शुरू होती है और यदि इसका इलाज न किया जाए तो यह व्यक्ति के करियर, पढ़ाई और निजी रिश्तों को पूरी तरह बर्बाद कर सकती है।
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सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर के लक्षण
- नकारात्मक आकलन का डर: हमेशा यह डर सताना कि दूसरे लोग आपके बारे में क्या सोचेंगे या वे आपको जज करेंगे।
- शारीरिक प्रतिक्रियाएं: भीड़ को देखकर अचानक पसीना आना, हाथ-पैर कांपना, आवाज का लड़खड़ाना या चेहरा लाल हो जाना।
- सामाजिक अलगाव: शर्मिंदगी के डर से ऑफिस मीटिंग, इंटरव्यू, पार्टी या रिश्तेदारों से मिलने से बचना।
- अत्यधिक चिंता: किसी भी सोशल इवेंट से कई दिन पहले ही घबराहट शुरू हो जाना।
क्यों होती है यह समस्या?
वैज्ञानिकों ने इसके लिए तीन मुख्य कारणों को जिम्मेदार ठहराया है। सबसे पहले यदि परिवार में किसी को एंग्जायटी की समस्या रही हो तो बच्चों में इसका खतरा बढ़ जाता है। दिमाग का एक हिस्सा जिसे अमिगडाला कहते हैं डर को नियंत्रित करता है। इसके अति-सक्रिय होने पर व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर ज्यादा डरने लगता है। इसके अलावा पुराना अनुभव भी इसके लिए जिम्मेदार है। बचपन में किसी सार्वजनिक अपमान या दुर्व्यवहार का शिकार होना भी भविष्य में SAD का कारण बनता है।
बचाव और समाधान
अच्छी बात यह है कि सोशल एंग्जायटी लाइलाज नहीं है। कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी (CBT), काउंसलिंग और विशेषज्ञ की सलाह पर दवाओं के जरिए इस पर काबू पाया जा सकता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह स्थिति डिप्रेशन या नशे की लत की ओर ले जा सकती है। इसलिए यदि आपको या आपके बच्चों में ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से संपर्क करें।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दिए गए सुझाव केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें। नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।
