ज्यादा खाना खाते हुए तस्वीर (सौ. एआई)
Healthy Eating Habits: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम भूख लगने पर कुछ भी और कितना भी खा लेते हैं। आम धारणा है कि ज्यादा खाने से ताकत मिलती है जबकि विज्ञान और आयुर्वेद इसके उलट कहते हैं। सही मात्रा में खाया गया भोजन ही दवा का काम करता है।
आधुनिक जीवनशैली में हम स्वाद के चक्कर में अक्सर अपनी भूख से ज्यादा खा लेते हैं। लोगों को लगता है कि जितना ज्यादा भोजन उतनी ज्यादा ऊर्जा लेकिन हकीकत में ओवरईटिंग हमारे पाचन तंत्र पर बोझ डालती है। डॉक्टरों और आयुर्वेद विशेषज्ञों का मानना है कि हल्का और संतुलित आहार ही शरीर को निरोगी रखने का एकमात्र रास्ता है।
जब हम पेट भरकर या भारी भोजन करते हैं तो पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। भारी खाने को पचाने में शरीर को दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है जिससे मेटाबॉलिज्म सुस्त हो जाता है। यही कारण है कि भारी भोजन के बाद हमें नींद और सुस्ती महसूस होती है। लंबे समय तक यह आदत गैस, ब्लोटिंग, कब्ज और आगे चलकर मोटापे, डायबिटीज व हृदय रोगों में बदल जाती है।
संतुलित आहार लेने से पाचन अग्नि सक्रिय रहती है। शोध बताते हैं कि कम आहार लेने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है और शरीर को भोजन से पूरा पोषण मिलता है। इससे शरीर में इंफ्लेमेशन यानी सूजन और एसिड रिफ्लक्स का खतरा कम हो जाता है। जब पेट हल्का रहता है तो शरीर अपनी ऊर्जा का उपयोग अंगों की मरम्मत और मानसिक स्पष्टता में करता है जिससे आप दिन भर ऊर्जावान महसूस करते हैं।
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अब सवाल उठता है कि सही मात्रा क्या है। आयुर्वेद ने इसका बहुत सटीक पैमाना दिया है। आयुर्वेद के अनुसार हमें अपने पेट को तीन हिस्सों में बांटकर देखना चाहिए।
एक भाग ठोस (Solid): अनाज, सब्जी आदि।
एक भाग तरल (Liquid): पानी, छाछ या सूप।
एक भाग खाली: हवा और पाचन क्रिया के लिए।
सरल शब्दों में कहें तो हमेशा अपनी भूख का 70 फीसदी ही खाना चाहिए। पेट को थोड़ा खाली छोड़ना पाचन की प्रक्रिया को आसान बनाता है और एसिडिटी जैसी समस्याओं को पनपने नहीं देता।