क्या आपको भी आती है बार-बार छींक? जुकाम समझने की न करें गलती, जानें कारण और बचाव
Cold Allergy Symptoms: बार-बार छींक आना सिर्फ सामान्य जुकाम नहीं होता। यह एलर्जी या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है। समय रहते इसके कारणों को पहचानकर इसका इलाज करना चाहिए।
- Written By: प्रीति शर्मा
छींकता हुआ व्यक्ति (सौ. फ्रीपिक)
Causes of Frequent Sneezing: सर्दियों के मौसम में छींक आना एक आम बात लगती है लेकिन अगर यह सिलसिला बार-बार चलता है तो यह सेहत के लिए खतरे की घंटी हो सकती है। जानकारों के अनुसार बार-बार आने वाली छींक सर्दी जुकाम नहीं बल्कि एलर्जी और संक्रमण का परिणाम हो सकती है जो समय के साथ साइनस का रूप ले सकती है।
अक्सर लोग बार-बार छींक आने को बदलते मौसम का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार छींक आने का सीधा संबंध हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम और बाहरी उत्तेजकों से होता है। जब नाक के भीतर की झिल्ली बाहरी धूल, धुएं या ठंडी हवा के संपर्क में आती है तो शरीर उसे बाहर निकालने के लिए छींक का सहारा लेता है।
संक्रमण का कारण
सर्दियों में हवा शुष्क हो जाती है और नाक अपनी नमी खो देती है। इससे सांस लेने में परेशानी होती है और ये आगे जाकर संक्रमण का कारण बनती है। इसके अलावा हवा में मौजूद प्रदूषण भी फेफड़ों और नाक में संक्रमण का कारण बनता है। बार-बार छींक से बचने के लिए कई घरेलू उपाय आयुर्वेद में मौजूद हैं लेकिन उससे पहले उसके कारण और लक्षणों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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बार-बार छींक आने के लक्षण
सर्द हवा के सीधा नाक में टकराने की वजह से नाक के भीतरी हिस्से में इरिटेशन होती है। आंखों और नाक से पानी बहने लगता है। धुएं के संपर्क में आते ही नाक में खुजली और आंखों में जलन होती है। रात के समय अचानक छींक बढ़ जाती है और सीने में कफ जमने लगता है और सांस लेने में परेशानी होने लगती है। स्थिति ज्यादा खराब होने पर नींद भी नहीं आती।
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नाक को ढककर रखें
बाहर निकलते समय या ठंडी हवा में नाक और मुंह को कपड़े या मास्क से ढकें। इससे सीधी हवा नाक में प्रवेश नहीं कर पाएगी।
भाप लेना
सुबह और शाम गर्म पानी की भाप लें। यह नाक की नमी को बरकरार रखता है और इरिटेशन को कम करता है।
तिल के तेल का प्रयोग
आयुर्वेद के अनुसार रात को सोते समय नाक में दो बूंद अणु तेल या तिल का तेल डालना बेहद फायदेमंद है। यह लुब्रिकेशन का काम करता है और धूल-मिट्टी के असर को रोकता है।
हल्दी वाला दूध
रात को गर्म दूध में चुटकी भर हल्दी डालकर पिएं। हल्दी के एंटी-बैक्टीरियल गुण शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं और इम्युनिटी बढ़ाते हैं।
विटामिन सी और धूप
रोजाना कुछ समय के लिए धूप में बैठें और विटामिन सी से भरपूर चीजों का सेवन करें जैसे संतरा, आंवला या नींबू का सेवन करें।
