जलगांव में टीकाकरण के 10 मिनट बाद ढाई माह की मासूम की मौत, जलगांव की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
Jalgaon Hospital News: जलगांव के चालीसगांव में टीकाकरण के 10 मिनट बाद ढाई महीने की बच्ची की मौत हो गई। अयोध्या में तैनात सेना के जवान की बेटी के शव को रातभर फ्रीजर तक नहीं मिला, जिससे आक्रोश है।
- Written By: रूपम सिंह
टीकाकरण (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Jalgaon Chalisgaon Infant Death: जलगांव एक तरफ सरकार ‘बेटी बचाओ’ का नारा बुलंद कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर ऐसा गंभीर सवाल खड़ा हुआ है जिसने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। चालीसगांव तहसील के तहाकली गांव में टीकाकरण के महज 10 मिनट बाद ढाई महीने की मासूम बच्ची की मौत हो गई। घटना के बाद अब सरकारी वैक्सीन की गुणवत्ता, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और मेडिकल सिस्टम की संवेदनहीनता पर उंगलियां उठने लगी हैं।
सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि मृत बच्ची सचिता बोरसे के पिता दीपक बोरसे भारतीय सेना में कार्यरत हैं और फिलहाल अयोध्या में तैनात होकर देश सेवा कर रहे हैं। सीमा पर देश की रक्षा करने वाले जवान की बेटी को अपने ही राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं बचा सकी। इस घटना ने सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई उजागर कर दी है।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
रिजनों ने आशंका जताई है कि पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद प्रशासन की ओर से न तो स्पष्ट जवाब दिया गया और न ही किसी उच्चस्तरीय जांच की घोषणा की।
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टीका लगने के बाद बिगड़ी तबियत
परिजनों का आरोप है कि बच्ची को नियमित टीकाकरण के लिए ले जाया गया था, लेकिन वैक्सीन लगने के कुछ ही मिनटों में उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी घटना कैसे हुई। सवाल किया जा रहा है कि क्या वैक्सीन का डोज गलत दिया गया? क्या इस्तेमाल की गई वैक्सीन एक्सपायर्ड थी? क्या टीकाकरण करने वाले कर्मचारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण मिला था? घटना के बाद तत्काल उपचार क्यों नहीं मिला? इन सवालों का जवाब अब जिला परिषद स्वास्थ्य विभाग को देना होगा।
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इंसानियत हुई शर्मसार
- घटना के बाद जलगांव शासकीय मेडिकल कॉलेज में जो हुआ, उसने लोगों के गुस्से को और भड़का दिया। परिजनों का आरोप है कि मासूम बच्ची के शव को फ्रीजर में रखने के बजाय उन्हें पूरी रात शव लेकर अस्पताल परिसर में बैठाए रखा गया,
- दादा अपनी पोती का शव गोद में लेकर रातभर इंतजार करते रहे, लेकिन अस्पताल प्रशासन का दिल नहीं पसीजा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अस्पताल कर्मचारी और जिम्मेदार अधिकारी पूरी रात बेपरवाह बने रहे।
- इस अमानवीय व्यवहार ने सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठ रही है।
- परिजनों ने आशंका जताई है कि पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद प्रशासन की ओर से न तो स्पष्ट जवाब दिया गया और न ही किसी उच्चस्तरीय जांच की घोषणा की।
